खेल जगत के इतिहास में कई ऐसी हस्तियां हुई हैं जिन्होंने अपनी शारीरिक सीमाओं को लांघकर दुनिया को हैरत में डाल दिया, लेकिन उनमें से कुछ का पतन उतना ही दर्दनाक और चौंकाने वाला साबित हुआ। साउथ अफ्रीका के पैराएथलीट ऑस्कर पिस्टोरियस एक ऐसा ही नाम रहे हैं, जिन्होंने घुटने के नीचे से दोनों पैर न होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी। वे विशेष रूप से तैयार किए गए कार्बन-फाइबर के कृत्रिम ब्लेड के सहारे दौड़ते थे, जिसकी वजह से उन्हें पूरी दुनिया में ब्लेड रनर के नाम से जाना जाने लगा। वर्ष 2012 में लंदन में आयोजित ओलंपिक खेलों में जब उन्होंने सामान्य धावकों के साथ दौड़ने का साहसिक कदम उठाया, तो खेल प्रेमियों के लिए वह एक अविश्वसनीय पल बन गया था। उन्होंने न केवल दिव्यांग वर्ग में बल्कि सामान्य वर्ग में भी शीर्ष स्तर के एथलीटों को कड़ी चुनौती पेश करते हुए अनेक बड़े खिताब अपनी झोली में डाले थे। उस दौर में उनका पूरा सफर दुनिया भर के लोगों के लिए एक असाधारण प्रेरणा का प्रतीक बन चुका था।
14 फरवरी 2013 की रात और मॉडल रीवा स्टीनकाम्प की हत्या
खेल के मैदान पर जिस बुलंदी को पिस्टोरियस ने हासिल किया था, वह एक ही झटके में उस समय चकनाचूर हो गई जब उनके निजी जीवन की एक खौफनाक सच्चाई सामने आई। तारीख थी 14 फरवरी 2013, यानी वैलेंटाइन्स डे की रात, जब साउथ अफ्रीका के प्रिटोरिया स्थित उनके निजी आवास पर एक दिल दहला देने वाली वारदात हुई। उस रात वे अपनी प्रेमिका और जानी-मानी मॉडल रीवा स्टीनकाम्प के साथ घर पर मौजूद थे। अचानक हुई गोलीबारी की घटना में रीवा स्टीनकाम्प की गोली लगने से दर्दनाक मौत हो गई। इस हत्याकांड की खबर जैसे ही सार्वजनिक हुई, खेल प्रशंसकों से लेकर कानून के जानकारों तक हर कोई सन्न रह गया। किसी को भी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था कि दुनिया का एक महान एथलीट अपनी ही साथी की जान लेने के गंभीर आरोप में घिर जाएगा।
अदालत में चोर वाली दलील और सरकारी वकीलों की जिरह
इस हत्याकांड के बाद साउथ अफ्रीका की अदालत में एक लंबी और बेहद जटिल कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। सुनवाई के दौरान ऑस्कर पिस्टोरियस ने अपने बचाव में यह दलील रखी कि उनसे यह कृत्य एक भयावह गलतफहमी के चलते हुआ था। उनका कहना था कि रात के अंधेरे में उन्हें लगा कि उनके घर के भीतर कोई अनजान घुसपैठिया या चोर घुस आया है, जो बाथरूम के अंदर छिपा हुआ है। पिस्टोरियस का दावा था कि वे अत्यधिक घबरा गए थे और आत्मरक्षा तथा डर के साए में उन्होंने बाथरूम के बंद दरवाजे पर गोलियां दाग दीं। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई कि उनका इरादा रीवा को नुकसान पहुंचाने का कतई नहीं था और यह पूरा वाकया सिर्फ एक अनजानी दुर्घटना थी।
दूसरी ओर, रीवा स्टीनकाम्प के पक्ष की पैरवी कर रहे अभियोजन पक्ष ने पिस्टोरियस की इस कहानी को सिरे से खारिज कर दिया। सरकारी वकीलों ने अदालत में तमाम सबूत पेश करते हुए तर्क दिया कि यह कोई अचानक हुई दुर्घटना नहीं थी, बल्कि गुस्से और तीखे विवाद का नतीजा थी। अभियोजन का कहना था कि गोलीबारी से चंद मिनट पहले दोनों के बीच बेहद उग्र कहासुनी हुई थी। सरकारी वकीलों ने यह तथ्य रेखांकित किया कि बंद दरवाजे के पार लगातार ताबड़तोड़ फायरिंग करना साफ दर्शाता है कि पिस्टोरियस अंदर मौजूद व्यक्ति को जान से मारना चाहते थे, चाहे वह कोई भी रहा हो। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलों और गंभीर तथ्यों की समीक्षा करने के बाद पिस्टोरियस को गंभीर लापरवाही और हत्या का दोषी माना। इसके बाद उनकी सजा की अवधि को बढ़ाते हुए उन्हें एक लंबी अवधि के लिए जेल भेज दिया गया।
जेल से रिहाई और पैरोल की सख्त शर्तें
सलाखों के पीछे कई वर्षों का समय बिताने और सजा से जुड़ी तमाम वैधानिक प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद आखिरकार उन्हें राहत मिली। जनवरी 2024 में पिस्टोरियस को दक्षिण अफ्रीकी जेल प्रशासन द्वारा सशर्त पैरोल पर रिहा कर दिया गया। जेल से बाहर आने के बाद भी उनका जीवन आम नागरिकों जैसा पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है, क्योंकि वे पैरोल के कड़े नियमों से बंधे हुए हैं। इन कानूनी बंदिशों के तहत उन्हें मीडिया से बातचीत करने की इजाजत नहीं दी गई है। इसके साथ ही सामान्य सामाजिक परिवेश में पुनर्वास के लिए उन्हें अदालत और प्रशासन द्वारा तय किए गए कई अनिवार्य आचरण नियमों का अक्षरशः पालन करना पड़ता है। यह पूरा घटनाक्रम यह सीख देता है कि एक पल का अनियंत्रित गुस्सा और हिंसक कदम किसी भी इंसान की वर्षों की कड़ी मेहनत, प्रतिष्ठा और प्रतिभा को हमेशा के लिए मिट्टी में मिला सकता है।


















