तुर्की में गरजे भारत के तीर: धीरज और 17 साल की कुमकुम ने कोरिया को हराकर रचा रिकर्व मिक्स्ड टीम का सुनहरा इतिहासखेल
3 घंटे पहले· 0

तुर्की में गरजे भारत के तीर: धीरज और 17 साल की कुमकुम ने कोरिया को हराकर रचा रिकर्व मिक्स्ड टीम का सुनहरा इतिहास

अंताल्या में तीरंदाजी विश्व कप चरण तीन के रिकर्व मिश्रित टीम फाइनल में धीरज बोम्मादेवरा और कुमकुम मोहोद ने ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

तुर्की के अंताल्या में भारतीय तीरंदाजी ने एक बार फिर अपनी धमक दिखाई है। तीरंदाजी विश्व कप के तीसरे चरण में धीरज बोम्मादेवरा और उभरती हुई कुमकुम मोहोद की जोड़ी ने रिकर्व मिश्रित टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत लिया। खास बात यह रही कि इस जोड़ी ने खिताबी मुकाबले में दुनिया की सबसे ताकतवर मानी जाने वाली टीमों में से एक — ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया — को सीधे सेटों में पटखनी दी।

कोरिया के दिग्गजों पर 5-1 की जीत

24 साल के अनुभवी धीरज और सिर्फ 17 साल की कुमकुम ने फाइनल में दक्षिण कोरिया के ओह ये जिन और किम जे देओक की मजबूत जोड़ी को 5-1 से हराया। सेट दर सेट स्कोर इस बात की गवाही देता है कि मुकाबला कितना करीबी था — पहले दो सेट 37-36 से भारत के नाम रहे और तीसरा सेट 39-39 की बराबरी पर छूटा। इतने दबाव भरे माहौल में भी भारतीय जोड़ी ने जिस तरह संयम और सटीकता बनाए रखी, वही जीत और हार के बीच की दीवार साबित हुई।

आखिरी दो तीरों ने तय की किस्मत

निर्णायक पलों में अनुभव की अहमियत साफ दिखी। ओलंपियन धीरज ने अपने आखिरी दो तीर ऐन निशाने पर मारते हुए परफेक्ट 10 का स्कोर किया और टीम की जीत पर मुहर लगा दी। यह असाधारण मानसिक मजबूती का नमूना था, क्योंकि ऐसे मौकों पर एक भी चूक पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है।

दोनों के लिए पहला विश्व कप मिश्रित स्वर्ण

यह उपलब्धि इसलिए और भी खास है क्योंकि मिश्रित टीम स्पर्धा में धीरज और कुमकुम — दोनों के करियर का यह पहला विश्व कप स्वर्ण पदक है। भारत के शीर्ष वरीयता प्राप्त तीरंदाज धीरज का अभियान यहीं नहीं थमेगा; वे अब व्यक्तिगत वर्ग के सेमीफाइनल में उतरकर इस आयोजन से अपना दूसरा पदक जीतने की कोशिश करेंगे।

कुमकुम का सुनहरा सिलसिला

किशोरी कुमकुम के लिए यह कामयाबियों की कड़ी में ताजा अध्याय है। पिछले महीने ही वे शंघाई में हुए विश्व कप चरण दो में स्वर्ण जीतने वाली भारत की महिला रिकर्व टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। इतनी कम उम्र में लगातार बड़े मंचों पर पदक जीतना उन्हें भारतीय तीरंदाजी का भविष्य बना रहा है।

अंताल्या से पुराना रिश्ता

दिलचस्प बात यह है कि विश्व कप चरण में भारत का इससे पहले का रिकर्व मिश्रित टीम स्वर्ण भी इसी अंताल्या की धरती पर आया था। साल 2022 में रिद्धि फोर और तरुणदीप राय की जोड़ी ने ग्रेट ब्रिटेन की ब्रायोनी पिटमैन और एलेक्स वाइज को शूट ऑफ के रोमांचक मुकाबले में हराकर वह पदक जीता था। अब उसी शहर में नई पीढ़ी ने वह सुनहरी विरासत आगे बढ़ा दी है।

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