टेस्ट क्रिकेट में तीन अंकों का आंकड़ा छूना हर बल्लेबाज के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन पूरे साल निरंतर प्रदर्शन करते हुए शतकों की लड़ी लगा देना एक दुर्लभ प्रतिभा को दर्शाता है। खेल के सबसे लंबे प्रारूप में एक ही कैलेंडर वर्ष के दौरान रन बनाना और विरोधी गेंदबाजों पर हावी रहना आसान नहीं होता। क्रिकेट इतिहास में अब तक केवल पांच ऐसे महान बल्लेबाज हुए हैं जिन्होंने एक ही साल के भीतर 7 या उससे ज्यादा टेस्ट शतक बनाने की अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। इनमें मोहम्मद युसूफ का दो दशक पुराना विश्व रिकॉर्ड आज भी शीर्ष पर कायम है।
मोहम्मद युसूफ का ऐतिहासिक 2006 का सत्र और 9 शतकों का अटूट रिकॉर्ड
साल 2006 में पाकिस्तान के मध्यक्रम के बल्लेबाज मोहम्मद युसूफ ने टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजी का एक ऐसा मानक स्थापित किया, जिसे अब तक कोई भी खिलाड़ी छू नहीं सका है। उस एक वर्ष में उनका बल्ला हर मुकाबले में रन उगलता रहा। युसूफ ने वर्ष 2006 के दौरान कुल 11 टेस्ट मैच खेले, जिनकी 19 पारियों में वे 1 बार नाबाद रहे। उन्होंने 99.33 की असाधारण औसत से कुल 1,788 रन बनाए।
इस ऐतिहासिक सफर के दौरान मोहम्मद युसूफ ने 2,854 गेंदों का सामना किया और 62.64 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। उनके बल्ले से 222 चौके और 12 छक्के निकले। उस वर्ष उनका उच्चतम व्यक्तिगत स्कोर 202 रन रहा। युसूफ ने 2006 में 9 शतक ठोके, जो एक कैलेंडर वर्ष में किसी भी बल्लेबाज द्वारा बनाए गए सबसे ज्यादा टेस्ट शतक का ऑल-टाइम वर्ल्ड रिकॉर्ड है। इसके अलावा उन्होंने 3 अर्धशतक भी जमाए और पूरे साल में वे केवल 1 बार शून्य पर आउट हुए।
रिकी पोंटिंग की 2006 में 7 शतकीय पारियां और दबदबा
जिस वर्ष मोहम्मद युसूफ अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में थे, ठीक उसी साल ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने भी गेंदबाजों पर अपना पूरा दबदबा बनाया। पोंटिंग ने वर्ष 2006 में खेले गए 10 टेस्ट मैचों की 18 पारियों में हिस्सा लिया, जिसमें वे 3 बार नाबाद पवेलियन लौटे। उन्होंने 88.86 की बेहतरीन औसत से 1,333 रन अपने नाम किए।
पोंटिंग ने इस दौरान 2,193 गेंदों का सामना किया और उनका स्ट्राइक रेट 60.78 का रहा। उन्होंने अपनी पारियों में 139 चौके और 7 छक्के जड़े। उस साल पोंटिंग का सर्वाधिक स्कोर 196 रन रहा। उन्होंने 2006 में 7 शतक और 4 अर्धशतक बनाए। विशेष बात यह रही कि पोंटिंग उस पूरे कैलेंडर वर्ष में एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए।
सर विवियन रिचर्ड्स का 1976 में बिना हेलमेट का तूफानी प्रदर्शन
एक कैलेंडर वर्ष में शतकों का अंबार लगाने की इस परंपरा की शुरुआत बहुत पहले ही हो चुकी थी। वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज सर विवियन रिचर्ड्स ने वर्ष 1976 में बेखौफ और आक्रामक टेस्ट बल्लेबाजी का एक नया अध्याय लिखा था। बिना किसी हेलमेट के मैदान पर उतरने वाले रिचर्ड्स ने विरोधी गेंदबाजों के मन में डर पैदा कर दिया था। उन्होंने 1976 में 11 टेस्ट मैचों की 19 पारियों में 90.00 की औसत से 1,710 रन कूटे।
रिचर्ड्स ने उस वर्ष 72.85 की तूफानी स्ट्राइक रेट से रन बनाए और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कम से कम 1,584 गेंदों का सामना किया। अपनी आक्रामक शैली का परिचय देते हुए उन्होंने 179 से अधिक चौके और 7 छक्के लगाए। उस साल उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 291 रन रहा। उन्होंने 1976 के दौरान 7 शतक और 5 अर्धशतक जमाए, जो कई दशकों तक टेस्ट क्रिकेट में एक मिसाल बना रहा।
अरविंद डिसिल्वा का 1997 का मास्टरक्लास और 7 शतक
श्रीलंका के तकनीकी रूप से दक्ष बल्लेबाज अरविंद डिसिल्वा ने वर्ष 1997 में इस प्रतिष्ठित सूची में अपना नाम दर्ज कराया। डिसिल्वा ने स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों के खिलाफ बेहतरीन संयम और तकनीक का परिचय दिया। उन्होंने 1997 में खेले गए 11 टेस्ट मैचों की 19 पारियों में बल्लेबाजी की और 3 बार नाबाद रहे। उन्होंने 76.25 की औसत से कुल 1,220 रन बनाए।
अपनी शतकीय पारियों के दौरान अरविंद डिसिल्वा ने कुल 2,075 गेंदों का सामना किया। उन्होंने अपनी बल्लेबाजी के दौरान 149 चौके और 6 छक्के जड़े। उस वर्ष उनका उच्चतम स्कोर 168 रन रहा। हालांकि वे उस वर्ष 2 बार शून्य पर भी आउट हुए, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने 7 शतक और 2 अर्धशतक बनाकर अपनी टीम को कई मौकों पर मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
सचिन तेंदुलकर का 2010 में 7 शतकों के साथ शानदार प्रदर्शन
शताब्दी बदलने के बाद भी दिग्गजों का बल्ला रन उगलता रहा। वर्ष 2010 में भारतीय क्रिकेट के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपने लंबे करियर के उत्तरार्ध में एक बार फिर अपनी महानता साबित की। सचिन ने 2010 के कैलेंडर वर्ष में 14 टेस्ट मैचों की 23 पारियों में हिस्सा लिया, जिसमें वे 3 बार नाबाद रहे। उन्होंने 78.10 की शानदार औसत से कुल 1,562 रन बनाए।
सचिन ने उस वर्ष 2,794 गेंदों का सामना किया और उनका स्ट्राइक रेट 55.90 रहा। उन्होंने अपनी पारियों में 181 चौके और 10 छक्के लगाए। 2010 में उनका उच्चतम व्यक्तिगत स्कोर 214 रन रहा। पूरे साल बिना किसी शून्य के बल्लेबाजी करते हुए सचिन ने 7 शतक और 5 अर्धशतक जड़े, जिसने साबित किया कि उनका क्लास और रनों की भूख समय के साथ कम नहीं हुई थी।



















