स्मार्टफोन की लत और लगातार स्क्रीन स्क्रॉल करने की आदत को अक्सर गिरते अटेंशन स्पैन और पढ़ाई से ध्यान भटकने का मुख्य कारण माना जाता है। ज्यादातर लोग रात को सोने से पहले घंटों सोशल मीडिया पर बिना वजह रील्स देखते रहते हैं, जिससे न केवल समय बर्बाद होता है बल्कि मानसिक थकान भी होती है। इसी आदत को सकारात्मक दिशा में मोड़ने के मकसद से एक नए एडटेक प्लेटफॉर्म ने जन्म लिया है। स्क्रॉलएड नाम के इस मोबाइल ऐप्लिकेशन की सोच यह है कि अगर युवाओं की स्क्रॉल करने की आदत को पूरी तरह बदला नहीं जा सकता, तो क्यों न उस कंटेंट को ही बदल दिया जाए जिसे वे स्क्रीन पर देख रहे हैं।
पीडीएफ और किताबों को वर्टिकल वीडियो में बदलने की तकनीक
स्क्रॉलएड ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर टूल विकसित किया है जो किसी भी सामान्य टेक्स्ट फाइल, जैसे भारी भरकम पीडीएफ या कॉलेज की किताबों को, इंस्टाग्राम रील्स या टिकटॉक जैसी वर्टिकल फीड में तब्दील कर देता है। जब कोई छात्र ऐप में स्क्रॉल करता है, तो उसके सामने वही जटिल विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किए गए वीडियो, ऑडियो, संक्षेप टेक्स्ट या इंटरैक्टिव क्विज के रूप में दिखाई देते हैं। इस प्लेटफॉर्म का नेविगेशन भी काफी सहज बनाया गया है। स्क्रीन पर ऊपर की तरफ स्वाइप करने से एक नया अध्याय या विषय सामने आता है, जबकि साइड में स्वाइप करके यूजर उसी विषय की बारीकियों को गहराई से समझ सकता है। विषय के अंत में एक क्विज भी रखी गई है ताकि पाठक अपनी समझ को तुरंत परख सकें।
युवा पीढ़ी की पसंद के अनुसार अध्ययन का तरीका
प्लेटफॉर्म के सह-संस्थापक उत्सव गुप्ता के अनुसार, आज की युवा पीढ़ी खासतौर पर 18 साल के युवा बड़े पैमाने पर शॉर्ट फॉर्म वर्टिकल वीडियो की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसे में गहराई और एकाग्रता की मांग करने वाले शैक्षणिक कंटेंट के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया है। उत्सव गुप्ता ने बताया कि उनकी योजना छात्रों को उनकी मौजूदा आदतों के बीच ही समाधान देने की है। उन्होंने कहा, “हम उन्हें वहीं मिलना चाहते हैं जहां वे पहले से मौजूद हैं।” उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका मकसद केवल स्क्रीन पर समय बिताना बढ़ाना नहीं है, बल्कि उस समय का सही और सार्थक उपयोग करना है।
उत्सव गुप्ता का मानना है कि एक छोटा वीडियो मन में जिज्ञासा पैदा कर सकता है, लेकिन उस जिज्ञासा को शांत करने के लिए अक्सर लोग ऐप छोड़ देते हैं या भटक जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ऐसा सिस्टम तैयार किया है जिससे विषय की गहराई में जाना उतना ही आसान हो जाता है जितना कि अगले वीडियो पर स्वाइप करना।
बिस्तर पर फोन देखने की बेचैनी से आया स्टार्टअप का विचार
इस स्टार्टअप की शुरुआत उत्सव गुप्ता और उनकी पत्नी व सह-संस्थापक रेबेका नेफ ने इस साल बूटस्ट्रैप करके की। दोनों को यह विचार तब आया जब वे अक्सर रात को सोने से पहले फोन पर गैर-जरूरी चीजें स्क्रॉल करने के बाद असंतोष महसूस करते थे। दोनों वर्तमान में छात्र हैं। उत्सव गुप्ता स्टैनफोर्ड में एआई और ह्यूमन पर्पस की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि रेबेका नेफ यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया में कंप्यूटर साइंस की छात्रा हैं। निजी अनुभव और पढ़ाई के दौरान आई दिक्कतों को देखते हुए उन्होंने खुद यह समाधान तैयार करने का फैसला किया।
बिजनेस मॉडल और भविष्य की योजनाएं
स्क्रॉलएड केवल आम पाठकों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि इसका लक्ष्य शिक्षण संस्थान और कॉर्पोरेट ट्रेनिंग प्रोग्राम भी हैं। यह स्टार्टअप फ्रीमियम मॉडल पर काम कर रहा है, जिसमें आम यूजर्स के लिए एक मुफ्त फीड दी गई है। इसके अलावा गंभीर पाठकों के लिए एक पेड स्क्रॉलएड प्रो सब्सक्रिप्शन और कॉलेजों व संस्थानों के लिए वार्षिक लाइसेंस का विकल्प रखा गया है। शैक्षणिक संस्थान इस प्लेटफॉर्म के जरिए अपना स्टडी मैटेरियल पहुंचा सकते हैं और बदले में छात्रों के जुड़ाव, पाठ की प्रगति और सीखने के अन्य आंकड़ों की विस्तृत रिपोर्ट हासिल कर सकते हैं। कंपनी एक ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर रही है जिससे शिक्षक हर छात्र की व्यक्तिगत जरूरतों का मूल्यांकन कर सकें। उत्सव गुप्ता का कहना है कि उनकी अंतिम महत्वाकांक्षा एक ऐसा सोशल नेटवर्क बनाने की है जो वास्तव में लोगों के लिए बेहतर और मददगार साबित हो।



















