उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में ग्रामीण स्वावलंबन और महिला उद्यमिता का एक उल्लेखनीय उदाहरण सामने आया है। फखरपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम रौंदुपुर की निवासी शिल्पा देवी ने अपनी मेहनत, संगठनात्मक क्षमता और व्यापारिक सूझबूझ से न केवल अपनी माली हालत को सुधारा है, बल्कि पूरे इलाके की ग्रामीण महिलाओं के समक्ष आत्मनिर्भरता का व्यावहारिक मॉडल भी पेश किया है।
सीआरपी पद से कृषि उद्यमी बनने का सफर
शिल्पा देवी पिछले 3 से 4 वर्षों से संस्था ट्रस्ट और उद्यमी महिला आजीविका मिशन के साथ मिलकर काम कर रही हैं। अपने सफर के शुरुआती दिनों में उन्होंने कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) के पद पर सेवाएं दी थीं। इस दौरान उन्होंने गांव-गांव जाकर किसानों और महिलाओं को संगठित करने की बारीकियां सीखीं। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी भूमिका को आगे बढ़ाते हुए एक सक्रिय महिला उद्यमी का रूप ले लिया और किसानों को एकजुट कर कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री तथा फसल विपणन का स्वतंत्र व्यवसाय संभालना शुरू किया।
फसल विपणन और 10 लाख रुपये से अधिक का टर्नओवर
कृषि उपज के व्यापार में उतरकर शिल्पा देवी ने स्थानीय काश्तकारों से सीधा संवाद स्थापित किया। बिचौलियों की निर्भरता को घटाते हुए उन्होंने किसानों को उनकी फसलों का उचित और लाभकारी मूल्य दिलाने में मदद की। इस रणनीति के जरिए उन्होंने बहराइच के किसानों द्वारा उगाए गए मक्का और गेहूं को राजस्थान जैसे दूरदराज के बाजारों तक पहुंचाना शुरू किया।
हाल ही में उनके व्यापारिक प्रयासों से मक्का की बड़ी खेप भेजी गई, जिसमें पहले एक ट्रक में लगभग 240 क्विंटल माल रवाना किया गया। इसके तुरंत बाद उन्होंने दो और ट्रक कृषि उत्पाद की सुरक्षित आपूर्ति कराई। इन लगातार खेपों की बदौलत उनके कृषि कारोबार का कुल टर्नओवर 10 लाख रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है, जिससे इलाके में उनकी एक सफल कृषि व्यापारी के रूप में पहचान बनी है।
जिलाधिकारी राजेश पांडे ने किया सम्मानित
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने और किसानों की आय बढ़ाने में निभाई गई इस उत्कृष्ट भूमिका के सम्मान में जिलाधिकारी राजेश पांडे और संस्था की ओर से एक विशेष सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर उन्हें प्रशस्ति पत्र, एक विशेष उपहार और चांदी का सिक्का भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस उपलब्धि पर अपने अनुभव साझा करते हुए शिल्पा देवी ने कहा, "पहले से अब हालात बहुत ठीक हैं।" उन्होंने बताया कि एक महिला उद्यमी के रूप में किसानों के साथ निरंतर समन्वय बनाकर काम करने से जो मुकाम मिला है, उससे उनके सारे सपने साकार हो रहे हैं। उनका यह सफर दिखाता है कि उचित प्रशिक्षण और संसाधन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं किस तरह बदलाव की वाहक बन सकती हैं।
उद्यमी महिला बनने की चरणबद्ध प्रक्रिया
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से कोई भी ग्रामीण महिला आत्मनिर्भरता की यह राह चुन सकती है। इसके लिए तय की गई चरणबद्ध व्यवस्था इस प्रकार है
- स्वयं सहायता समूह से जुड़ाव: सबसे पहले गांव में पहले से चल रहे एनआरएलएम महिला समूह का हिस्सा बनें, या फिर 10 से 15 महिलाएं आपस में मिलकर एक नया स्वयं सहायता समूह गठित करें।
- अधिकारियों और सखियों से संपर्क: समूह गठन के बाद अपने विकास खंड के ब्लॉक मिशन मैनेजर से मिलें, अथवा गांव में कार्यरत कृषि सखी, पशु सखी या सीआरपी से मार्गदर्शन प्राप्त करें।
- कार्यक्षेत्र का चयन: अपनी रुचि और स्थानीय मांग के अनुसार कार्यक्षेत्र तय करें, जैसे कृषि उत्पाद की खरीद-बिक्री, डेयरी संचालन, सिलाई कार्य या जैविक खाद निर्माण।
- प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहायता: सरकार की ओर से व्यवसाय प्रबंधन और मार्केटिंग का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही काम शुरू करने के लिए समूह से किफायती ब्याज दरों पर ऋण और फंड की सुविधा मिलती है।
- उद्यमी के रूप में पंजीकरण: व्यावसायिक प्रशिक्षण पूरा होने के पश्चात महिला का पंजीकरण उद्यमी महिला के रूप में कर दिया जाता है, जिसके बाद सीधे बाजार में उत्पाद बेचना और मार्केटिंग करना संभव हो जाता है। इच्छुक महिलाएं अपने नजदीकी ब्लॉक कार्यालय पहुंचकर इस मिशन से जुड़ सकती हैं।



















