उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद बड़े शहरों की कॉरपोरेट दुनिया में करियर बनाना आज ज्यादातर युवाओं की पहली पसंद बन चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक युवा ने इस तय ढर्रे से हटकर मिसाल पेश की है। गुलई गांव के रहने वाले प्रफुल्ल ने एमकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी शुरू की थी। वहां उन्हें बेहतरीन सैलरी पैकेज और तमाम कॉरपोरेट सुविधाएं मिल रही थीं, फिर भी उनका लगाव अपने गांव और खेतों से कम नहीं हुआ। आखिरकार उन्होंने आरामदेह दफ्तर की नौकरी को अलविदा कहकर अपनी मिट्टी की तरफ लौटने और खेती को ही अपना मुख्य पेशा बनाने का पक्का फैसला कर लिया।
पारंपरिक तौर-तरीकों के साथ नए कृषि प्रयोगों की शुरुआत
गांव लौटने के बाद प्रफुल्ल ने खेती को पुराने ढर्रे पर चलाने के बजाय उसमें वैज्ञानिक और टिकाऊ बदलाव लाने की रणनीति बनाई। उन्होंने प्राकृतिक खेती का रास्ता चुना और जमीन को रसायनों से मुक्त रखने की दिशा में कदम बढ़ाया। फिलहाल वह अपनी करीब 5 एकड़ जमीन पर मिश्रित खेती कर रहे हैं। एक ही खेत में एक साथ कई तरह की फसलें उगाने और अलग-अलग कृषि गतिविधियों को जोड़ने से उनकी जमीन का हर हिस्सा उत्पादक बन गया है। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बाहरी उर्वरकों और कीटनाशकों पर होने वाला भारी खर्च बच जाता है, जिससे खेती की लागत पूरी तरह नियंत्रण में रहती है और जमीन की प्राकृतिक उपजाऊ क्षमता भी लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहती है।
गांव के 8 परिवारों को साल भर का पक्का रोजगार
प्रफुल्ल का यह 5 एकड़ का कृषि मॉडल सिर्फ उनके अपने परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह पूरे गांव के लिए मददगार साबित हो रहा है। उनके खेत में चल रही अलग-अलग फसलों और नियमित कृषि गतिविधियों के चलते गांव के करीब 8 लोगों को पूरे साल रोजगार मिल रहा है। जहां ग्रामीण इलाकों में मौसमी बेरोजगारी एक बड़ी समस्या रहती है, वहीं इस प्रयोग से स्थानीय मजदूरों को गांव में ही आजीविका का पक्का साधन मिल गया है। इस तरह प्रफुल्ल ने खुद को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ दूसरों के लिए भी काम के मौके तैयार किए हैं।
खेती को व्यवसाय और भविष्य मानने का नजरिया
प्रफुल्ल का मानना है कि आज की पीढ़ी को कृषि क्षेत्र को केवल गुजारे का पारंपरिक जरिया समझना बंद करना होगा। आधुनिक समय में खेती को एक व्यवस्थित और मुनाफे वाले बिजनेस मॉडल के तौर पर देखने की जरूरत है। फसल विविधीकरण, सही तकनीकों का चयन और लगातार मेहनत के दम पर कृषि से एक स्थिर और मजबूत आमदनी बनाई जा सकती है। एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी का आकर्षक करियर छोड़कर गांव के खेत में पसीना बहाने वाले प्रफुल्ल की यह यात्रा उन सभी शिक्षित युवाओं के लिए एक व्यावहारिक रास्ता दिखाती है जो आधुनिक खेती में अपना भविष्य तलाशना चाहते हैं।



















