डांडिया रातों में पारंपरिक परिधानों संग भा रहे हाथ से रंगे जूते और गुजराती गहनेफ्लाईदुबई कॉकपिट हमले के बाद एक्शन में था इजरायल, तेल अवीव की तरफ बढ़ने पर विमान को मार गिराने की थी तैयारीअमेरिकी शेयर बाजारों में लौटी रौनक, बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती के बीच सोने और मुद्राओं में हलचलठंड के दिनों में बादाम खाने की सही आदत और जरूरी सावधानियां जानिएबैंक ऑफ जापान की दरों में और बढ़ोतरी की तैयारी, गवर्नर काजुओ उएदा ने 2 प्रतिशत महंगाई लक्ष्य की दिशा में प्रगति का दिया संकेतपाली के लालपुरा में मकान की चौखट पर आ धमका 70 किलो का मगरमच्छ, एक घंटे के अभियान में हुआ सुरक्षित रेस्क्यूलंबी अवधि की ऊंची ब्याज दरों से आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त, ऊर्जा कीमतों का असर सीमित रहने पर रेन ने दी रायअरुणाचल प्रदेश में किसानों के लिए डिजिटल पहचान अभियान शुरू, पहले चरण में छह जिलों को किया गया शामिलहिंदुस्तान शिपयार्ड ने लॉन्च किया फ्लीट सपोर्ट जहाज सूर्या, राजनाथ सिंह बोले समुद्री शक्ति का भविष्य होगा मजबूतनवरात्रि में कैसे सजाएं मां दुर्गा की चौकी, वास्तु दिशा और अखंड ज्योत के जरूरी नियम
हादसे में कमर के नीचे का हिस्सा हुआ बेजान, व्हीलचेयर पर फूड डिलीवरी कर परिवार पाल रहे रमेश नायकसक्सेस स्टोरी
6 अक्तू॰ 2026, 12:03 pm (2 घंटे पहले)· 0

हादसे में कमर के नीचे का हिस्सा हुआ बेजान, व्हीलचेयर पर फूड डिलीवरी कर परिवार पाल रहे रमेश नायक

हैदराबाद में चौथी मंजिल से गिरकर गंभीर रीढ़ की हड्डी की चोट झेलने वाले वी. रमेश नायक ने हार नहीं मानी। आज वह व्हीलचेयर से ज़ोमैटो डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम कर रहे हैं और पैरा-स्पोर्ट्स में पदक भी हासिल कर चुके हैं।

जीवन में आने वाली भीषण विपदाओं के सामने अक्सर लोग हिम्मत हार बैठते हैं, लेकिन कुछ साहसी लोग अपने मजबूत इरादों से अपनी तकदीर खुद लिखते हैं। हैदराबाद के रहने वाले वी. रमेश नायक की जीवन यात्रा इसी अदम्य साहस की मिसाल पेश करती है। एक भयानक कार्यस्थल दुर्घटना में अपने दोनों पैरों की कार्यक्षमता खोने के बाद भी उन्होंने कभी बेबसी का रास्ता नहीं चुना। दूसरों पर निर्भर होने या किसी के सामने हाथ फैलाने के स्थान पर वह आज पूरे स्वाभिमान के साथ अपनी आजीविका कमा रहे हैं और अपने पूरे परिवार का खर्च चला रहे हैं।

चौथी मंजिल से गिरने के बाद बदल गई जिंदगी

हादसे से पहले रमेश नायक निर्माण क्षेत्र में एक मिस्त्री के रूप में अपनी सेवाएं देते थे। एक सामान्य कार्यदिवस पर अचानक संतुलन बिगड़ने से वह एक निर्माणाधीन इमारत की चौथी मंजिल से नीचे जमीन पर आ गिरे। इस भयंकर पतन का सीधा असर उनकी रीढ़ की हड्डी पर पड़ा, जिससे उनकी स्पाइनल कॉर्ड बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना के बाद उनका लंबा चिकित्सीय उपचार चला और कई दौर की गहन फिजियोथेरेपी भी कराई गई। इन तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी कमर के निचले हिस्से की संवेदनशीलता लौट नहीं सकी और दोनों पैर पूरी तरह बेजान हो गए। चिकित्सकों ने उस दौरान साफ बता दिया था कि वह अब दोबारा कभी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाएंगे और उनका शेष जीवन बिस्तर पर ही बीतेगा।

ये भी पढ़ें

पारिवारिक त्रासदी और नए सिरे से संघर्ष की शुरुआत

शारीरिक अक्षमता के आघात के बीच रमेश को गहरे पारिवारिक दुखों का भी सामना करना पड़ा। विवाह के उपरांत गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्होंने अपने दो बेटों को हमेशा के लिए खो दिया। उनके दूसरे बेटे के हृदय में जन्मजात छेद था और उसे गंभीर इन्फेक्शन ने घेर लिया था, जिसके चलते काफी समय वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद उसने दम तोड़ दिया। लगातार मिले इन बड़े आघातों ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद विचलित कर दिया था। इसके बावजूद अपनी बेटी के सुरक्षित भविष्य और अपनी जीवनसंगिनी के निरंतर सहयोग को देखकर उन्होंने दोबारा संघर्ष करने का संकल्प लिया। पुणे के एक उदार दानदाता ने उन्हें एक विशेष रेट्रोफिटेड व्हीलचेयर वाहन उपलब्ध कराया। इस वाहन की मदद से रमेश ने फूड डिलीवरी मंच ज़ोमैटो के साथ डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम की शुरुआत की।

दो शिफ्टों में डिलीवरी और पैरा-स्पोर्ट्स में पदक

रमेश हर दिन पूरी लगन के साथ दो शिफ्टों में खाने के ऑर्डर पहुंचाने का काम संभालते हैं। कई ऊंची इमारतों में लिफ्ट की अनुपस्थिति या संकरी सीढ़ियों की वजह से व्हीलचेयर से ऊपर तक पहुंचना बेहद कठिन चुनौती बन जाता है, फिर भी वह बिना किसी शिकायत के चेहरे पर मुस्कान लिए हर जिम्मेदारी निभाते हैं। डिलीवरी कार्य के समानांतर रमेश ने खेल जगत में भी अपनी खास जगह बनाई है। उन्होंने गच्चीबाउली और शादनगर स्टेडियम में आयोजित खेल प्रतियोगिताओं में व्हीलचेयर क्रिकेट, भाला फेंक और व्हीलचेयर मैराथन में सक्रिय भागीदारी की है। भाला फेंक प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक भी अपने नाम किया है। रमेश का दृढ़ विश्वास है कि किसी के सामने लाचार बनने से अपनी मेहनत की कमाई खाना और जीवन की अंतिम सांस तक संघर्ष करना ही सच्चा धर्म है।

सवाल-जवाब

वी. रमेश नायक के साथ क्या दुर्घटना हुई थी?
निर्माण कार्य में मिस्त्री के तौर पर काम करते समय वह अचानक चौथी मंजिल से नीचे गिर पड़े थे, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई थी।
हादसे के बाद डॉक्टरों ने उनकी सेहत के बारे में क्या कहा था?
लंबे इलाज और फिजियोथेरेपी के बाद डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया था कि कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न होने के कारण उनका जीवन बिस्तर तक सीमित रहेगा।
रमेश को किन पारिवारिक त्रासदियों का सामना करना पड़ा?
विवाह के बाद बीमारियों से उनके दो बेटों की मृत्यु हो गई, जिनमें से दूसरे बेटे को दिल में छेद और गंभीर संक्रमण था।
रमेश नायक आजीविका के लिए वर्तमान में क्या काम करते हैं?
पुणे के एक डोनर से मिले रेट्रोफिटेड व्हीलचेयर वाहन की मदद से वह ज़ोमैटो में रोजाना दो शिफ्टों में फूड डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम करते हैं।
रमेश ने पैरा-स्पोर्ट्स में कौन-कौन से खेलों में भाग लिया है?
उन्होंने गच्चीबाउली और शादनगर स्टेडियम में आयोजित प्रतियोगिताओं में व्हीलचेयर क्रिकेट, भाला फेंक और व्हीलचेयर मैराथन में हिस्सा लिया है और भाला फेंक में कांस्य पदक जीता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp