ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में फ्लावियो बोल्सोनारो की बढ़त से रियाल और बॉन्ड बाजार में मजबूतीघर पर बनाएं शादी और ढाबे जैसी गाढ़ी मिक्स वेज, दही और काजू की ग्रेवी से आएगा असली जायकाअकबरपुर में नीम करौरी बाबा की जन्मस्थली जाने का आसान मार्ग, ट्रेन और बस से ऐसे पहुंचे फिरोजाबादबत्तखों के पैरों में सूजन बन सकती है बंबल फुट का खतरा, पोल्ट्री किसानों के मांस और अंडा उत्पादन पर पड़ेगा असरछतरपुर के किसान ने समझाई गुलाब की खेती, 1 बीघा जमीन से हर दिन कमा रहे 1 से 2 हजार रुपयेजोधपुर में शादी के वादे के बाद ब्लैकमेलिंग का खेल, 50 लाख और मकान मांगने पर युवती के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर केसघर की बालकनी में गमले के भीतर इस आसान तरीके से तैयार करें ताजा लहसुनजेम्स बॉन्ड की नई फिल्म का इंतजार खत्म किए बिना ओमेगा ने उतारी 007 और स्पैक्टर सीरीज़ की 6 घड़ियांउत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र के बीच त्योहारी भीड़ को देखते हुए गाजीपुर सिटी और हडसपर के मध्य नई विशेष रेलगाड़ी का एलानकेरल भाग्यतारा बीटी-74 लॉटरी का आज ड्रॉ, पहले इनाम में मिलेंगे 1 करोड़ रुपये
बोकारो के किसान अरुण महतो ने तोरई की उन्नत तकनीक से 50 हजार की लागत पर कमाया एक लाख का शुद्ध मुनाफासक्सेस स्टोरी
5 अक्तू॰ 2026, 5:30 pm (57 मिनट पहले)· 0

बोकारो के किसान अरुण महतो ने तोरई की उन्नत तकनीक से 50 हजार की लागत पर कमाया एक लाख का शुद्ध मुनाफा

झारखंड के बोकारो जिले में किसान अरुण महतो ने एक एकड़ में मचान और मल्चिंग तकनीक से झींगा यानी तोरई उगाकर 50 क्विंटल पैदावार ली और 50 हजार की लागत पर एक लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया.

झारखंड के बोकारो जिले में पारंपरिक फसलों की जगह आधुनिक तौर-तरीकों से सब्जियों की खेती कर किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं. पेटरवार प्रखंड स्थित भंगाट गांव के रहने वाले किसान अरुण महतो ने इस दिशा में एक सफल मिसाल पेश की है. उन्होंने अपनी एक एकड़ जमीन पर मचान और मल्चिंग विधि के जरिए झींगा यानी तोरई की खेती की और कम समय में शानदार मुनाफा अर्जित किया. अरुण कुमार महतो एक पारंपरिक कृषि परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने इस काम की बुनियादी सीख अपने माता-पिता और दादा-दादी से हासिल की थी. पारिवारिक प्रेरणा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्होंने खेती को अपनी आय का मुख्य जरिया बनाया और कई तरह की सब्जियों की पैदावार शुरू की.

अगस्त में बुवाई और 35 दिनों में पहली तुड़ाई

अरुण महतो ने अगस्त के महीने में एक एकड़ खेत में झींगा की बुवाई शुरू की थी. इस दौरान उन्होंने खेत में पौधों के बेहतर फैलाव के लिए मचान बनाया और जमीन की सुरक्षा के लिए मल्चिंग प्लास्टिक का सहारा लिया. इस संयुक्त तकनीक की बदौलत बेलों का विकास काफी तेजी से और सुरक्षित माहौल में हुआ. मल्चिंग के कारण जमीन में लंबे समय तक आवश्यक नमी बनी रही, जिससे पानी की बर्बादी भी रुकी. पौधों में बढ़वार के बाद मात्र 30 से 35 दिनों के भीतर फसल तुड़ाई के योग्य हो गई. एक बार तुड़ाई शुरू होने के बाद लगभग डेढ़ महीने तक लगातार खेत से ताजी तोरई मिलती रही, जिससे किसान को दैनिक स्तर पर नियमित आमदनी हासिल करने में काफी मदद मिली.

ये भी पढ़ें

लागत, उत्पादन और मुनाफे का पूरा गणित

एक एकड़ खेत में इस पद्धति से झींगा लगाने का पूरा खर्च लगभग 50 हजार रुपये के आसपास बैठता है. अगर फसल की देखरेख समय पर हो, तो एक एकड़ से करीब 50 क्विंटल तक झींगा का कुल उत्पादन हासिल किया जा सकता है. बाजार में आमतौर पर पूरे साल झींगा सब्जी का औसत मूल्य 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक बना रहता है. यदि 50 क्विंटल उपज को 30 रुपये प्रति किलोग्राम के सामान्य भाव पर भी बेचा जाए, तो किसान को करीब 1.50 लाख रुपये की सकल कमाई प्राप्त होती है. इसमें से 50 हजार रुपये की शुरुआती लागत घटाने के बाद किसान के पास लगभग 1 लाख रुपये का सीधा शुद्ध मुनाफा बचता है.

रोग प्रबंधन और कृषि विशेषज्ञों की सलाह

झींगा की सफल फसल लेने के लिए अरुण महतो अन्य किसानों को सावधानी बरतने की सलाह भी देते हैं. उनके मुताबिक फसल की बढ़वार के दौरान कई बार पत्तों का पीला पड़ना और पत्तियों का मुड़ना जैसी परेशानियां सामने आ जाती हैं. ऐसी समस्याओं के उभरने पर किसानों को खुद से या बिना सोचे-समझे किसी भी कीटनाशक दवा का इस्तेमाल करने से परहेज करना चाहिए. सही तरीका यही है कि समय रहते किसी योग्य कृषि विशेषज्ञ से परामर्श लिया जाए और उनकी बताई हुई दवाओं का ही संतुलित छिड़काव किया जाए. इस तरह के वैज्ञानिक प्रबंधन से फसल को नुकसानदेह कीटों और बीमारियों से आसानी से बचाया जा सकता है, जिससे पैदावार की गुणवत्ता और मात्रा दोनों सुरक्षित रहती हैं.

सवाल-जवाब

किसान अरुण महतो कहां के रहने वाले हैं?
अरुण महतो झारखंड के बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड अंतर्गत भंगाट गांव के रहने वाले हैं.
उन्होंने झींगा यानी तोरई की खेती किस विधि से की?
उन्होंने एक एकड़ जमीन पर मचान और मल्चिंग विधि का इस्तेमाल करके झींगा की खेती की.
इस फसल की बुवाई किस महीने में की गई थी?
अरुण महतो ने अगस्त के महीने में एक एकड़ खेत में झींगा की बुवाई शुरू की थी.
फसल कितने दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है?
मचान और मल्चिंग विधि से झींगा की फसल लगभग 30 से 35 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है.
तुड़ाई का सिलसिला कितने समय तक चलता है?
फसल तैयार होने के बाद लगभग डेढ़ महीने तक लगातार तोरई की तुड़ाई की जा सकती है.
एक एकड़ में कुल कितना उत्पादन प्राप्त होता है?
फसल की सही देखरेख होने पर एक एकड़ से लगभग 50 क्विंटल तक झींगा का उत्पादन मिल सकता है.
एक एकड़ खेती में कितनी लागत और कितना शुद्ध मुनाफा हुआ?
खेती में करीब 50 हजार रुपये की लागत आई, जिससे 1.50 लाख रुपये की सकल आय और लगभग 1 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ.
बाजार में झींगा का औसत भाव क्या रहता है?
बाजार में पूरे साल झींगा सब्जी का औसत भाव करीब 30 रुपये प्रति किलोग्राम रहता है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp