शेयर बाजार में आज का दिन एक खास वजह से याद किया जाता है। साल 1960 में आज ही के दिन दिग्गज निवेशक स्वर्गीय राकेश झुनझुनवाला का जन्म हुआ था। एक मिडिल क्लास परिवार में पले बढ़े झुनझुनवाला ने महज ₹5,000 की पूंजी लेकर दलाल स्ट्रीट में कदम रखा था और अपनी दूरदर्शी सोच, धैर्य और सोच समझकर रिस्क लेने की आदत के बल पर करीब ₹40,000 करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर दिया। यही वजह है कि आज उन्हें दलाल स्ट्रीट का किंग, बिग बुल और भारत का वॉरेन बफेट कहा जाता है। 14 अगस्त 2022 को महज 62 साल की उम्र में इस दिग्गज निवेशक का निधन हो गया था।
मुंबई के घर से शुरू हुई शेयर बाजार की समझ
राकेश झुनझुनवाला का जन्म मुंबई में हुआ था। उनके पिता आयकर विभाग में अधिकारी थे और घर में अक्सर शेयर बाजार, देश की अर्थव्यवस्था और अलग अलग कंपनियों के उतार-चढ़ाव पर बातचीत होती रहती थी। बचपन में सुनी गई इन्हीं बातों ने झुनझुनवाला के मन में बाजार को लेकर जिज्ञासा जगा दी। एक दिन उन्होंने पिता से पूछ लिया कि आखिर शेयरों के दाम बदलते क्यों हैं। पिता ने जवाब दिया कि अखबार पढ़ो, क्योंकि खबरें ही बाजार की दिशा तय करती हैं। यह एक छोटी सी सलाह आगे चलकर झुनझुनवाला की पूरी सोच और बाजार को समझने के नजरिए की नींव बन गई।
सीए बनने के बाद भी नहीं छूटा बाजार का शौक
सिडेनहैम कॉलेज से कॉमर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद राकेश झुनझुनवाला ने सीए की डिग्री हासिल की। बचपन से ही उन्हें शेयर बाजार में गहरी दिलचस्पी थी, इसलिए सीए बनने के बाद भी उन्होंने बाजार में उतरने का इरादा नहीं छोड़ा। जब उन्होंने पिता को फुल टाइम शेयर बाजार में उतरने का फैसला बताया तो पिता ने साफ कह दिया कि इसके लिए वे न तो पैसे देंगे और न ही किसी से उधार लेने की इजाजत देंगे। पिता की सलाह थी कि पहले अपनी मेहनत से बाजार को अच्छी तरह समझो, फिर खुद अपने दम पर पैसों का इंतजाम करो और उसके बाद ही दांव लगाओ।
सिर्फ ₹5,000 से दलाल स्ट्रीट में रखा पहला कदम
साल 1985 में राकेश झुनझुनवाला ने अपने भाई और कुछ दोस्तों की मदद से पूंजी जुटाई और महज ₹5,000 की शुरुआती रकम लेकर दलाल स्ट्रीट पर किस्मत आजमाने उतर गए। उस दौर में बीएसई सेंसेक्स सिर्फ 150 अंक के आसपास कारोबार कर रहा था, यानी बाजार खुद अभी अपने बेहद शुरुआती दौर में ही था।
टाटा टी से मिला पहला बड़ा मुनाफा
बाजार में उतरने के करीब एक साल बाद ही झुनझुनवाला को बड़ी कामयाबी मिल गई। साल 1986 में उन्होंने टाटा टी, जो अब टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के नाम से जानी जाती है, के करीब 5,000 शेयर ₹43 प्रति शेयर के भाव पर खरीदे। महज तीन महीने के भीतर ही यह शेयर ₹143 तक पहुंच गया। झुनझुनवाला ने इसे बेचकर ₹5 लाख का शानदार मुनाफा कमाया, जो 1980 के दशक में बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी। इस एक सौदे के बाद झुनझुनवाला ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सेसा गोवा और प्राज इंडस्ट्रीज पर जब सबने कहा गलती हो रही है
बिग बुल की सबसे बड़ी ताकत यही थी कि वे भीड़ से हटकर सोचते थे। 1980 के दशक के आखिरी सालों में उन्होंने टाटा पावर जैसी मजबूत कंपनियों में पैसा लगाया। इसके बाद उन्होंने सेसा गोवा, जो आज वेदांता के नाम से जानी जाती है, के 4 लाख शेयर उस वक्त खरीदे जब लौह अयस्क की गिरती कीमतों की वजह से यह कंपनी बेहद खराब दौर से गुजर रही थी। उस समय बाजार में सबको लगा कि झुनझुनवाला बड़ी गलती कर रहे हैं, लेकिन कुछ ही समय बाद कंपनी ने रफ्तार पकड़ ली और उन्हें करोड़ों रुपये का मुनाफा हुआ। इसी तरह जब प्राज इंडस्ट्रीज बुरे दौर से गुजर रही थी, तब उन्होंने इसके शेयर खरीदे और बाद में उन्हें इस दांव पर 250 प्रतिशत का जबरदस्त रिटर्न मिला।
टाइटन कंपनी वाला दांव बना करियर का सबसे बड़ा मोड़
राकेश झुनझुनवाला के करियर का सबसे ऐतिहासिक और टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला निवेश टाइटन कंपनी में था। साल 2002-03 के दौरान जब टाटा ग्रुप की यह कंपनी संघर्ष के दौर से गुजर रही थी और बड़े बड़े निवेशक इस शेयर से दूरी बना चुके थे, तब झुनझुनवाला ने करीब ₹3 के औसत भाव पर इसके करोड़ों शेयर खरीद डाले। उन्होंने कंपनी के विजन पर पूरा भरोसा जताया और सालों तक एक भी शेयर नहीं बेचा। आज टाइटन उनके पूरे पोर्टफोलियो का सबसे मूल्यवान शेयर माना जाता है और इसने अकेले ही उनकी संपत्ति में हजारों करोड़ रुपये जोड़ने का काम किया।
बाय राइट, होल्ड टाइट और औरत वाला मशहूर कोट
राकेश झुनझुनवाला अक्सर एक ही मंत्र दोहराते थे, सही शेयर खरीदो और उसे मजबूती से पकड़े रखो। उनका मानना था कि बाजार में आने वाली गिरावट से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि मंदी के समय ही अच्छे शेयर सस्ते दाम पर खरीदने का असली मौका मिलता है। वे कहा करते थे कि बड़ा मुनाफा कमाने के लिए सोच समझकर रिस्क लेना जरूरी है। बाजार को लेकर उनका एक मशहूर कथन आज भी हर ट्रेडर की जुबान पर रहता है। वे कहते थे कि बाजार महिलाओं की तरह है, हमेशा कमांडिंग, रहस्यमयी, अप्रत्याशित और अस्थिर। उनका मानना था कि बाजार को कभी कोई पूरी तरह काबू नहीं कर सकता, इसलिए उसके सामने सिर झुकाकर उसके साथ चलना ही असली समझदारी है।
रेयर एंटरप्राइजेज, बॉलीवुड में निवेश और आकासा एयर का सपना
राकेश झुनझुनवाला सिर्फ एक पैसिव निवेशक नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी कारोबारी भी थे। उन्होंने अपनी एसेट मैनेजमेंट कंपनी रेयर एंटरप्राइजेज बनाई। सिनेमा से उन्हें खासा लगाव था, यही वजह है कि उन्होंने इंग्लिश विंग्लिश, शमिताभ और की एंड का जैसी बॉलीवुड फिल्मों में भी पैसा लगाया। उनके जीवन का सबसे आखिरी और सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट विमानन क्षेत्र में उतरना था। साल 2022 में उन्होंने अपनी खुद की एयरलाइन आकासा एयर की शुरुआत की, जो उनके सबसे बड़े सपनों में से एक माना जाता था।
62 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
14 अगस्त 2022 को 62 साल की उम्र में इस महान निवेशक ने दुनिया को अलविदा कह दिया। निधन के समय उनकी कुल संपत्ति करीब 5.8 अरब डॉलर, यानी लगभग ₹40,000 करोड़ आंकी गई थी। इतनी अकूत दौलत होने के बावजूद झुनझुनवाला हमेशा बेहद सादे कपड़ों में नजर आते थे। वे खुद को पहले एक निवेशक और उसके बाद ही एक उद्योगपति मानते थे।
झुनझुनवाला का पूरा सफर सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि धैर्य और भरोसे की मिसाल है। महज ₹5,000 की पूंजी से शुरू हुआ यह सफर टाटा टी, सेसा गोवा, प्राज इंडस्ट्रीज और टाइटन कंपनी जैसे दांव से होते हुए ₹40,000 करोड़ के साम्राज्य तक पहुंचा। यही वजह है कि आज भी हर नए निवेशक को दलाल स्ट्रीट के इस बिग बुल की कहानी से सीख लेने की सलाह दी जाती है।













