बिहार के जहानाबाद जिले में एक महिला की सोच और सरकारी प्रोत्साहन ने स्वरोजगार की एक नई मिसाल कायम की है। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली उतरी दौलतपुर निवासी प्रिया देवी आज एक सफल कारोबारी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने उद्योग विभाग की सरकारी योजना का लाभ उठाकर आटा और चोकर पीसने की मिल स्थापित की है। इस उद्योग ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि गांव और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार निर्माण की दिशा में भी बड़ा कदम बढ़ाया है।
सरकारी सहायता और स्वरोजगार की शुरुआत
प्रिया देवी अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताती हैं कि वह सामान्य महिलाओं की तरह घर पर ही समय बिताया करती थीं। जब परिवार की आर्थिक प्रगति और समाज में कुछ नया करने का विचार आया, तो उनके पति ने उन्हें उद्योग लगाने की सलाह दी। पति के विचार से प्रेरित होकर उन्होंने जिला उद्योग विभाग से संपर्क साधा। वहां विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में सरकारी योजना के तहत 10 लाख रुपये का लोन स्वीकृत हुआ। इस ऋण राशि की मदद से उन्होंने दो साल पहले अपने गांव में आटा चक्की मिल की नींव रखी।
20 हजार रुपये की पूंजी से 35 लाख का टर्नओवर
व्यापार की शुरुआत में प्रिया देवी ने महज 20 हजार रुपये की व्यक्तिगत पूंजी लगाई थी। शुरुआत में छोटे स्तर पर काम शुरू करने के बाद उन्होंने गुणवत्ता और आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया। धीरे-धीरे स्थानीय बाजारों और पास के जिलों में उनके आटा और चोकर की मांग बढ़ने लगी। दो वर्षों की निरंतर मेहनत का परिणाम यह हुआ कि जिस कारोबार की शुरुआत मामूली पूंजी से हुई थी, उसका वार्षिक टर्नओवर अब 35 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। आज उनके उत्पाद केवल उतरी दौलतपुर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जहानाबाद और आसपास के जिला बाजारों में भी नियमित रूप से भेजे जा रहे हैं।
आधुनिक ऑटोमेटेड मिल और दैनिक उत्पादन क्षमता
प्रिया देवी की मिल में आधुनिक तकनीक वाली ऑटोमेटेड मशीनें स्थापित की गई हैं। मशीनरी का अधिकांश कार्य स्वचालित रूप से होता है, जिससे अनाज की पिसाई और पैकिंग में गति बनी रहती है। वर्तमान में इस इकाई की दैनिक उत्पादन क्षमता 2 क्विंटल तक पहुंच गई है। मशीनों के स्वचालित होने के बावजूद प्रिया देवी और उनके पति समय-समय पर पूरी प्रक्रिया का व्यक्तिगत निरीक्षण करते हैं, ताकि उत्पादन में किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी या गुणवत्ता संबंधी समस्या न आए। उनके पति दिन-रात मिल के कामकाज में उनका पूरा सहयोग करते हैं।
खुद के रोजगार के साथ दूसरों को दी नौकरी
बिजनेस मॉडल के बारे में प्रिया देवी का मानना है कि केवल खुद के लिए नौकरी ढूंढने से सिर्फ व्यक्तिगत या पारिवारिक भलाई होती है। इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति उद्यमी बनता है, तो वह समाज के अन्य लोगों को भी आत्मनिर्भर बना सकता है। इसी सोच के तहत उन्होंने अपनी मिल में 2 अन्य स्थानीय निवासियों को स्थायी रोजगार प्रदान किया है। एक समय ऐसा था जब प्रिया देवी के पास दिन बिताने के लिए कोई सार्थक कार्य नहीं होता था, लेकिन आज मिल के संचालन, ऑर्डर पूरा करने और बाजार आपूर्ति के प्रबंधन के कारण उन्हें दिन-रात काम से फुर्सत नहीं मिलती।



















