बिहार के भागलपुर जिले में पारंपरिक फसलों को छोड़कर अधिक मुनाफा देने वाली बागवानी की ओर किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। मौसमी सब्जियों और फलों की खेती में स्ट्रॉबेरी अब एक प्रमुख विकल्प बनकर उभरी है। हालांकि स्ट्रॉबेरी की खेती में शुरुआती लागत और महंगे पौधों का चयन हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इस समस्या का समाधान तलाशते हुए स्थानीय स्तर पर ही पौधे तैयार करने की सफल कोशिश की गई है।
भागलपुर में तैयार हुए विंटर डॉन के पौधे
बागवानी के क्षेत्र में काम कर रहे किसान गूंजेश गुंजन ने स्ट्रॉबेरी की खेती को आसान और किफायती बनाने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने इटली की प्रसिद्ध किस्म विंटर डॉन के पौधों को भागलपुर की जलवायु के अनुकूल स्थानीय स्तर पर तैयार करने में सफलता हासिल की है। अब तक राज्य के किसानों को इन पौधों की आपूर्ति के लिए पूरी तरह अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था।
लागत में गिरावट और स्थानीय वातावरण का फायदा
पहले बिहार के किसान महाराष्ट्र से विंटर डॉन किस्म के पौधे 14 रुपये प्रति पौधे की दर से मंगवाते थे, जिससे परिवहन और पौधे खराब होने का जोखिम बना रहता था। गूंजेश गुंजन अब यही पौधे स्थानीय किसानों को मात्र 10 रुपये प्रति पौधे की कीमत पर उपलब्ध करा रहे हैं। स्थानीय पर्यावरण में तैयार होने के कारण इन पौधों की सहनशीलता अधिक है और खेतों में रोपते ही इनकी वृद्धि तेजी से होती है, जिससे फल की गुणवत्ता में सुधार आता है।
मार्च के अंत तक लगातार फलन और अधिक उपज
विंटर डॉन किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी उच्च उत्पादन क्षमता है। यह किस्म अन्य साधारण प्रजातियों की तुलना में अधिक उपज देती है और मार्च के अंतिम सप्ताह तक इसमें लगातार फल आते रहते हैं। इसके अलावा इस किस्म के फलों की भण्डारण क्षमता यानी शेल्फ लाइफ काफी बेहतर होती है, जिससे दूर-दराज के बाजारों तक भेजने में सड़ने का खतरा कम रहता है।
स्थानीय बाजार में बढ़ी मांग और उपभोक्ताओं को लाभ
क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी का उत्पादन बढ़ने से स्थानीय बाजारों में ताजा फल आसानी से बिक्री के लिए उपलब्ध हो रहे हैं। उपभोक्ताओं को अब सस्ते दामों पर ताजा स्ट्रॉबेरी मिल रही है, जिससे इसकी मांग लगातार बनी हुई है। बाजार में मजबूत मांग के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।



















