जीवन में यदि पक्का इरादा और कुछ बड़ा हासिल करने का जुनून हो, तो आर्थिक तंगी या विकट परिस्थितियाँ किसी भी इंसान के कदम नहीं रोक सकतीं। आंध्र प्रदेश के रहने वाले रामतुल्ला शेख का जीवन इस बात का सबसे जीवंत प्रमाण है। एक समय ऐसा था जब अपने परिवार के गुजारे के लिए उन्हें चिलचिलाती धूप में रोजाना सिर्फ 300 रुपये की दिहाड़ी पर मजदूरी करनी पड़ती थी। लेकिन उन्होंने अपनी विपरीत परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय शिक्षा को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। आज वही रामतुल्ला देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं और दुनिया भर के शोध जगत में अपनी पहचान बना रहे हैं।
गरीबी और भीषण तंगहाली में बीता बचपन
रामतुल्ला शेख का शुरुआती जीवन अत्यंत अभावों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच बीता। उनके परिवार की माली हालत इतनी ज्यादा खराब थी कि उनके लिए नियमित पढ़ाई का खर्च उठाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया था। कम उम्र में ही उन पर पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ आ गया। अपनी पढ़ाई जारी रखने और घर के खर्च में मदद करने के लिए उन्हें मजदूरी का रास्ता चुनना पड़ा। वे प्रतिदिन कड़ी मेहनत करते थे और शाम को 300 रुपये की मामूली दिहाड़ी लेकर घर लौटते थे। इस कठिन दौर में शारीरिक थकावट के बावजूद उनका ध्यान अपनी किताबों से कभी नहीं हटा। वे जानते थे कि उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बदलने का एकमात्र जरिया केवल बेहतर शिक्षा ही हो सकती है।
GATE 2024 में शानदार प्रदर्शन और 809वीं ऑल इंडिया रैंक
सालों की निरंतर पढ़ाई, अनुशासन और कठोर परिश्रम के बाद रामतुल्ला शेख ने देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक गेट (GATE) की तैयारी शुरू की। वर्ष 2024 में उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विषय से गेट परीक्षा में भाग लिया। जब परिणाम घोषित हुए, तो उनकी सालों की तपस्या रंग लाई। उन्होंने पूरे भारत में ऑल इंडिया 809वीं रैंक हासिल की। इस शानदार ऑल इंडिया रैंक के आधार पर उन्हें देश के शीर्ष अनुसंधान संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु में एमटेक (M.Tech) पाठ्यक्रम में प्रवेश मिला। इसके अतिरिक्त उन्होंने देश के नामी आईआईटी (IIT) से भी अपनी मास्टर डिग्री पूरी की, जहाँ उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को काफी सराहा गया।
15 लाख का कॉर्पोरेट पैकेज ठुकराने की ठोस वजह
गेट परीक्षा में बेहतरीन रैंक हासिल करने के तुरंत बाद रामतुल्ला को एक नामी बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कंपनी (MNC) से 15 लाख रुपये सालाना के पैकेज पर नौकरी का प्रस्ताव मिला। जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में प्रतिदिन 300 रुपये के लिए हाड़-तोड़ मेहनत की हो, उसके लिए 15 लाख रुपये का पैकेज एक बहुत बड़ा वित्तीय सहारा साबित हो सकता था। लेकिन रामतुल्ला का अंतिम लक्ष्य केवल पैसा कमाना या कॉर्पोरेट जॉब करना नहीं था। उनका सपना विज्ञान और रिसर्च क्षेत्र में मौलिक योगदान देना तथा समाज के लिए कुछ नया करना था। इसी दूरगामी सोच के चलते उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के 15 लाख रुपये की नौकरी के ऑफर को मुस्कुराते हुए अस्वीकार कर दिया और उच्च शिक्षा तथा रिसर्च के मार्ग को चुना।
IISc बेंगलुरु से NUS सिंगापुर तक का रिसर्च सफर
मास्टर डिग्री के दौरान रामतुल्ला के उत्कृष्ट रिसर्च वर्क और बेहतरीन अकादमिक ट्रैक रिकॉर्ड ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। उनके शोध पत्र और शैक्षणिक उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें विश्व प्रसिद्ध नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) के डायरेक्ट पीएचडी (PhD) प्रोग्राम में दाखिला मिल गया। वर्तमान में रामतुल्ला शेख सिंगापुर की इस नामी यूनिवर्सिटी में पावर इलेक्ट्रॉनिक्स विषय में पीएचडी कर रहे हैं। वे वहाँ एक रिसर्च स्कॉलर के रूप में कार्यरत हैं और उन्हें अपनी रिसर्च के लिए पूरी स्कॉलरशिप भी मिल रही है। 300 रुपये की दिहाड़ी मजदूरी करने वाले एक साधारण युवा का सिंगापुर के अंतरराष्ट्रीय रिसर्च सेंटर तक पहुँचना उनकी असाधारण क्षमता को दर्शाता है।
देश के लाखों प्रतिस्पर्धी छात्रों के लिए बनी मिसाल
रामतुल्ला शेख की यह वास्तविक सफलता की कहानी भारत के उन लाखों युवाओं के लिए एक जबरदस्त प्रेरणा है जो वित्तीय तंगी या सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से यह सिद्ध कर दिखाया है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो और सही दिशा में मेहनत की जाए, तो कोई भी बाधा मंजिल के रास्ते में नहीं आ सकती। 300 रुपये की मजदूरी से लेकर दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर बनने तक का उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।



















