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छत्तीसगढ़ के सरगुजा में स्वावलंबी महिलाओं की अनोखी पहल, अनाज और बीजों से तैयार कीं किफायती राखियांसक्सेस स्टोरी
24 अग॰ 2026, 1:27 pm (66 दिन पहले)· 2

छत्तीसगढ़ के सरगुजा में स्वावलंबी महिलाओं की अनोखी पहल, अनाज और बीजों से तैयार कीं किफायती राखियां

अंबिकापुर के किशुन नगर में स्वयं सहायता समूह की 12 महिलाएं चावल, गेहूं, मक्का और कद्दू के बीजों से पर्यावरण-अनुकूल राखियां बनाकर आर्थिक स्वावलंबन हासिल कर रही हैं।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत किशुन नगर की महिलाओं ने रक्षाबंधन के अवसर पर आत्मनिर्भरता की एक मिसाल पेश की है। यहां की जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की 12 महिलाएं घरेलू खाद्य पदार्थों और बीजों की मदद से बेहद सुंदर और आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। रसोई में आसानी से उपलब्ध होने वाले अनाज जैसे चावल, गेहूं, मक्का और कोहड़े के बीजों का इस्तेमाल करके यह समूह बेहद कम लागत में अनोखी राखियां बना रहा है।

घरेलू अनाज और बीजों से सजावट

राखी बनाने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए समूह की सदस्य सोनाली सिंह और दीप्ति चौधरी ने बताया कि वे सबसे पहले घर में मौजूद सूखे अनाज और बीजों का चयन करती हैं। चावल के दाने, गेहूं, मक्के के दाने और कद्दू या कोहड़े के पुराने बीजों को अलग-अलग रंगों से रंगा जाता है। रंगने के बाद इन्हें सुखाकर खास तरह की डिजाइनों में सजाया जाता है। इसके साथ ही राखी को मजबूत और खूबसूरत बनाने के लिए बाजार से रेशमी धागे, ऊन और कुछ आवश्यक सजावटी सामग्री खरीदी जाती है। स्थानीय स्तर पर मौजूद संसाधनों का इस तरह उपयोग करने से राखियों की उत्पादन लागत काफी कम हो जाती है।

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बाजार और घर दोनों जगह से बिक्री

समूह की सदस्य दीप्ति चौधरी ने जानकारी दी कि समूह की सभी 12 महिलाएं अपने खाली समय में एक जगह एकत्र होकर राखी निर्माण का काम करती हैं। जैसे-जैसे रक्षाबंधन का त्योहार करीब आता है और राखियों की मांग बढ़ती है, महिलाएं काम के घंटों को बढ़ा देती हैं। इन निर्मित राखियों को बेचने के लिए स्थानीय बाजारों में छोटे-छोटे स्टॉल लगाए जाते हैं। इसके अलावा आसपास के ग्रामीण और खरीदार सीधे महिलाओं के घर आकर भी राखियां खरीदते हैं। बिक्री से प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग महिलाएं अपने परिवारों की दैनिक जरूरतों को पूरा करने और अपनी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए करती हैं।

बिहान योजना से मिला बड़ा संबल

महिलाओं के इस प्रयास को राज्य की बिहान योजना से मजबूत आधार मिला है। बिहान योजना के माध्यम से समूह को कम लागत में आजीविका से जुड़ी गतिविधियां संचालित करने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हुआ है। जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं केवल राखी निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मौसम और त्योहारों के अनुसार अलग-अलग व्यावसायिक गतिविधियां चलाती हैं। मौसमी मांग के अनुसार अपनी गतिविधियों को बदलने से इन महिलाओं को पूरे वर्ष नियमित आय प्राप्त करने में मदद मिलती है।

सवाल-जवाब

सरगुजा में महिलाएं किस सामग्री से राखियां बना रही हैं?
महिलाएं घर में मौजूद चावल, गेहूं, मक्का और कोहड़े के बीजों को रंगकर और रेशमी धागों के साथ सजाकर राखियां तैयार कर रही हैं।
इस स्वयं सहायता समूह में कुल कितनी महिलाएं शामिल हैं?
ग्राम पंचायत किशुन नगर के जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह में कुल 12 महिलाएं शामिल हैं।
इन राखियों की बिक्री किस माध्यम से की जाती है?
निर्मित राखियों की बिक्री स्थानीय बाजारों में स्टॉल लगाकर और सीधे महिलाओं के घरों से की जाती है।
महिलाओं को इस आजीविका गतिविधि में किस योजना से सहायता मिली है?
महिलाओं को कम लागत में आजीविका गतिविधियां संचालित करने के लिए बिहान योजना से सहायता प्राप्त हुई है।
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