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अलवर में घरों से गायब रहा करवा चौथ का चांद, फिर पुलिया पर पहुंची महिलाओं ने ऐसे खोला व्रतराजस्थान
29 अक्तू॰ 2026, 11:45 pm (54 मिनट पहले)· 2

अलवर में घरों से गायब रहा करवा चौथ का चांद, फिर पुलिया पर पहुंची महिलाओं ने ऐसे खोला व्रत

अलवर के तिजारा फाटक इलाके में मकानों की बनावट के कारण महिलाओं को घरों से करवा चौथ का चांद नहीं दिखा। इसके बाद वे परिवार के साथ पुलिया पर पहुंचीं और आसमान में चांद के दर्शन कर अपना व्रत खोला।

करवा चौथ के पावन अवसर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए पूरे दिन कठिन उपवास रखती हैं। शाम ढलने और रात होने के बाद आसमान में चांद का दीदार करने के बाद ही इस व्रत को खोले जाने की परंपरा निभाई जाती है। लेकिन इस बार अलवर शहर के तिजारा फाटक क्षेत्र में एक अलग ही स्थिति देखने को मिली, जब कई महिलाओं को अपने ही घरों से चांद के दर्शन नहीं हो सके। काफी देर तक अपने घरों की छतों और आंगनों में इंतजार करने के बाद महिलाओं ने एक ऐसा अनोखा रास्ता निकाला जिससे उनकी परंपरा में कोई बाधा नहीं आई और उन्होंने विधि-विधान के साथ अपना व्रत पूरा किया।

घरों की बनावट बनी बाधा

अलवर शहर के तिजारा फाटक इलाके में आवासीय मकानों की बनावट इस प्रकार की है कि कई घरों की स्थिति नीचे होने के कारण आसमान का खुला हिस्सा नजर नहीं आता है। जब रात के समय चांद निकलने का समय हुआ, तो इस क्षेत्र की तमाम महिलाएं अपने घरों में बैठकर चंद्र दर्शन का बेसब्री से इंतजार करती रहीं। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब चांद नजर नहीं आया, तो महिलाओं के मन में चिंता बढ़ने लगी क्योंकि बिना चंद्र दर्शन के व्रत का पारण संभव नहीं होता है। ऐसी स्थिति में महिलाओं ने हार न मानते हुए तुरंत एक व्यावहारिक समाधान खोजने का निर्णय लिया और अपने परिवार के सदस्यों के साथ घर से बाहर निकलने का फैसला किया।

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तिजारा फाटक पुलिया पर जमा हुईं सुहागिनें

घर की छतों से चांद दिखाई न देने पर महिलाओं ने अपने परिजनों के साथ तिजारा फाटक पुलिया का रुख किया। जब वे परिवार के साथ उस पुलिया पर पहुंचीं, तो वहां पहले से ही कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे जो इसी तरह की समस्या का सामना कर रहे थे। पुलिया की ऊंचाई और खुले आसमान के कारण वहां से चांद बिल्कुल साफ नजर आ रहा था। महिलाओं ने बिना किसी देरी के वहां से आसमान में चमकते हुए चांद के दर्शन किए और अपनी पूजा की थाली सजाकर करवा चौथ की परंपरा को आगे बढ़ाया। इस तरह अलवर की इन महिलाओं ने अपनी सूझबूझ से व्रत की रस्म को सफलतापूर्वक पूरा किया।

परंपरा और आधुनिकता का अनूठा समन्वय

अलवर में करवा चौथ की रात का यह वाकया शहरभर में चर्चा का विषय बन गया। एक तरफ जहां पारंपरिक रूप से घरों की छतों पर पूजा की तैयारियां चल रही थीं, वहीं दूसरी तरफ तिजारा फाटक की इस पुलिया पर सुहागिन महिलाओं का एक अलग ही जमावड़ा देखने को मिला। परिवार के लोगों ने भी इस मुश्किल घड़ी में महिलाओं का पूरा साथ दिया और उन्हें सुरक्षित रूप से पुलिया तक पहुंचाया। भले ही इस बार महिलाओं को अपनी पारंपरिक जगह यानी घर की छत को छोड़कर बाहर सड़क या पुलिया पर आना पड़ा, लेकिन अंततः उनकी आस्था और परंपरा की जीत हुई और सभी ने हर्षोल्लास के साथ अपना करवा चौथ का व्रत संपन्न किया।

सवाल-जवाब

अलवर में किस इलाके की महिलाओं को चांद नहीं दिखा?
अलवर शहर के तिजारा फाटक इलाके की महिलाओं को अपने घरों से चांद दिखाई नहीं दिया।
महिलाओं को घरों से चांद क्यों नहीं दिखा?
वहां के मकानों की बनावट और घरों के नीचे होने के कारण आसमान साफ नजर नहीं आ रहा था।
चांद देखने के लिए महिलाएं कहां गईं?
महिलाएं अपने परिवार के सदस्यों के साथ तिजारा फाटक पुलिया पर पहुंचीं।
महिलाओं ने अपना व्रत कैसे खोला?
पुलिया पर पहुंचकर आसमान में चांद के दर्शन करने के बाद महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत खोला।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 मिनट पहले

पुलिया पर पूजा की थाली सजाना — यह नज़ारा देर रात वहाँ से गुज़रने वालों के लिए भी अचानक था।

Rohan Verma@rohan-verma·36 मिनट पहले

Karan, सही कहा — पर मन में एक सवाल है: क्या उस पुलिया पर रात को ट्रैफिक भी चल रहा था या उसे उस वक्त बंद रखा गया था?

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