छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के देवतराई गांव की निवासी नाजिमा खान इन दिनों सरदार वल्लभभाई पटेल मैदान के सामने राखियों की दुकान सजाकर लोगों के बीच आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश प्रसारित कर रही हैं। भले ही रक्षाबंधन को मुख्य रूप से सनातन संस्कृति का एक प्रमुख पर्व माना जाता है, लेकिन नाजिमा पिछले लगभग 25 वर्षों से इस पावन अवसर पर राखियों का कारोबार पूरी तन्मयता के साथ करती आ रही हैं। उनका मानना है कि पर्वों की खुशी और स्नेह के बंधन किसी एक विशेष धर्म की सीमाओं में नहीं बंधे होते हैं।
विभिन्न प्रकार की राखियों से सजा है स्टॉल
इस वर्ष उनके स्टॉल पर ग्राहकों के लिए राखियों की एक विस्तृत श्रृंखला मौजूद है। इसमें डोरा राखी, बूटी राखी, फैंसी राखी, लुम्बा राखी, एडी की राखी, पूजा की विशेष राखियां और पारंपरिक रूप से लंबे समय से चलन में चली आ रही स्पंज वाली राखियां शामिल हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों को लुभाने के लिए कार्टून डिजाइन वाली राखियां, चमकती हुई लाइट वाली राखियां और खिलौनेनुमा राखियां भी उनके संग्रह का हिस्सा हैं। विभिन्न आयु वर्ग और पसंद के लोग अपनी रुचि के अनुसार यहां से खरीदारी कर रहे हैं।
बिक्री और कीमतों का हाल
बाजार में राखियों की कीमतों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनके स्टॉल पर 20 रुपये से लेकर 50 रुपये तक की रेंज वाली राखियां सबसे अधिक संख्या में बिक रही हैं। डोरा राखियां 50 रुपये प्रति दर्जन के हिसाब से उपलब्ध कराई जा रही हैं, जबकि छोटे बच्चों के बीच लाइट वाली राखियों का क्रेज काफी ज्यादा है जो लगभग 40 रुपये की कीमत में मिल रही हैं। अलग-अलग डिजाइनों और कीमतों के कारण हर वर्ग का खरीदार अपने बजट के भीतर मनपसंद राखी चुन पा रहा है।
वह यह कारोबार केवल पर्व के विशेष सीजन के दौरान ही संभालती हैं। रक्षाबंधन का त्योहारी सीजन समाप्त होने के बाद वह कपड़े की दुकान का संचालन करती हैं। इस क्षेत्र में ढाई दशकों का लंबा अनुभव होने के कारण उन्हें बाजार में आने वाली नई वैरायटी और ग्राहकों की पसंद-नापसंद की बेहद गहरी समझ हो चुकी है।
व्यक्तिगत जीवन और रिश्तों की डोर
नाजिमा ने बताया कि वह स्वयं भी अपने जीवन के शुरुआती दौर से ही रक्षाबंधन का यह पर्व बेहद उत्साह से मनाती आ रही हैं। वह अपने दो सगे भाइयों सहित कुल 8 लोगों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं। यही कारण है कि उनके लिए राखी महज कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के अटूट प्रेम और गहरी भावनाओं से जुड़ा एक पवित्र पर्व है।
उनकी यह अनोखी पहल समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश करती है, जो यह दर्शाती है कि त्योहारों की असली खूबसूरती आपसी सम्मान, स्नेह और भाईचारे में निहित है। रक्षाबंधन का यह रक्षा सूत्र न केवल रिश्तों में मजबूती लाता है, बल्कि समाज के भीतर सामाजिक सौहार्द और एकता के ताने-बाने को भी और अधिक दृढ़ करता है।



















