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देहरादून की एक छात्रा ने मोम से खड़ा किया थेरेपी कैंडल्स का कारोबार, कीमत सिर्फ 50 रुपये सेसक्सेस स्टोरी
2 घंटे पहले· 3

देहरादून की एक छात्रा ने मोम से खड़ा किया थेरेपी कैंडल्स का कारोबार, कीमत सिर्फ 50 रुपये से

देहरादून की आंचल पैराफिन मोमबत्तियों के सेहत के लिए नुकसानदेह असर को देखते हुए बी-वैक्स और सोय वैक्स से एरोमा कैंडल्स बना रही हैं, जो सिर्फ 50 रुपये से इंस्टाग्राम पर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

रिया मेननरिया मेननफूड एवं रेसिपी संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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बिजली गुल होने पर या घर की सजावट के लिए इस्तेमाल होने वाली आम मोमबत्तियां अक्सर पैराफिन वैक्स से बनती हैं, और सेहत को लेकर जागरूक होते लोग अब इनसे दूरी बनाने लगे हैं। देहरादून की आंचल इसी बदलाव को अपने कारोबार में ढाल चुकी हैं और बी-वैक्स से खास तरह की एरोमा कैंडल्स तैयार कर रही हैं, जो घर को रोशन करने के साथ-साथ माहौल को खुशबूदार भी बना देती हैं।

पैराफिन मोमबत्तियों से सेहत को खतरा

हेल्थ एक्सपर्ट्स लंबे समय से बताते आए हैं कि पैराफिन वैक्स से बनी परंपरागत मोमबत्तियां जलने पर जो धुआं छोड़ती हैं, वह सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। त्योहारों या किसी खास मौके पर जब घरों में ये मोमबत्तियां जलाई जाती हैं, तो हवा में घुलने वाला यह धुआं सांस से जुड़ी दिक्कतों की वजह बन सकता है। यही कारण है कि अब लोग घर सजाने और रोशन करने के परंपरागत तरीकों से आगे बढ़कर प्राकृतिक विकल्पों की तलाश में हैं।

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बी-वैक्स और सोय वैक्स की बढ़ती मांग

इसी बदलते ट्रेंड के बीच मधुमक्खी के मोम यानी बी-वैक्स और सोय वैक्स से तैयार एरोमा कैंडल्स की मांग तेजी से बढ़ी है। ये मोमबत्तियां घर को सलीके से रोशन करने के साथ-साथ अपनी हल्की खुशबू से पूरे माहौल को खुशनुमा बना देती हैं। दिखने में आकर्षक होने की वजह से इन्हें अब कपल्स भी खास मौकों पर खरीदना पसंद कर रहे हैं। देहरादून की आंचल ने बाजार की इस बदलती जरूरत को समय रहते भांप लिया और बड़े पैमाने पर इन प्राकृतिक मोमबत्तियों को तैयार करना शुरू कर दिया।

पढ़ाई के दौरान ही शुरू हो गया था कारोबार

आंचल के लिए यह सफर करीब ढाई साल पहले शुरू हुआ था, जब वे अभी पढ़ाई ही कर रही थीं। उसी दौरान उन्होंने अपने इस हुनर को एक बिजनेस की शक्ल देने का फैसला किया और मोक्षम कैंडल एंड कॉपरेशन नाम से अपनी संस्था खड़ी की। आंचल का कहना है कि बाजार में आसानी से मिलने वाली आम पैराफिन कैंडल्स सेहत के लिहाज से नुकसानदेह होती हैं, जबकि उनकी बनाई एरोमा कैंडल्स पूरी तरह सुरक्षित हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाले एसेंशियल ऑयल्स को सीधे त्वचा या हवा में छोड़ने के बजाय वैक्स के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है, जिससे इनका असर सेहत पर सकारात्मक रहता है।

मोमबत्ती नहीं, एक तरह की थेरेपी

आंचल बताती हैं कि उनकी एरोमा कैंडल्स का काम सिर्फ अंधेरे में रोशनी देना भर नहीं है, बल्कि ये एक थेरेपी की तरह काम करती हैं। यही वजह है कि इन्हें आजकल मेडिटेशन सेंटर्स, स्पा, योग केंद्रों और आलीशान रेस्टोरेंट्स में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके पास लोगों की अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से कई वैरायटी मौजूद हैं। तनाव कम करने के लिए रोजमेरी लीव्स से बनी कैंडल्स हैं, तो डिप्रेशन से राहत दिलाने के लिए लैवेंडर ऑयल वाली कैंडल्स तैयार की गई हैं। एकाग्रता बढ़ाने की चाहत रखने वालों के लिए चंदन, केसर और दालचीनी के फ्लेवर में मोमबत्तियां बनाई गई हैं। इसके अलावा लोगों की पसंद का ख्याल रखते हुए वनिला, चॉकलेट, ऑरेंज और कई तरह के फूलों की खुशबू वाली कैंडल्स भी उनके कलेक्शन में शामिल हैं।

सिर्फ 50 रुपये से शुरुआत, इंस्टाग्राम पर उपलब्ध

जो लोग अपने घर को केमिकल मुक्त रोशनी और प्राकृतिक खुशबू से सजाना चाहते हैं, उनके लिए आंचल की ये खास मोमबत्तियां बेहद किफायती दामों पर उपलब्ध हैं। इनकी शुरुआती कीमत महज 50 रुपये रखी गई है, जिससे ये आम लोगों की पहुंच में आसानी से आ जाती हैं। फिलहाल आंचल इन एरोमा कैंडल्स की बिक्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए कर रही हैं।

इसका आप पर असर

अगर आप घर के लिए मोमबत्ती खरीदते हैं, तो यह खबर आपके रोजमर्रा के फैसलों पर असर डाल सकती है।

  • भारत में: पैराफिन मोमबत्तियों की जगह अब बी-वैक्स और सोय वैक्स जैसे प्राकृतिक और सेहत के लिहाज से सुरक्षित विकल्प सिर्फ 50 रुपये से उपलब्ध हैं।
  • देहरादून में: आंचल जैसी स्थानीय उद्यमी की मोक्षम कैंडल एंड कॉपरेशन से शहर में छोटे स्तर पर रोजगार और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है।

प्रेरणा और सीख

आंचल की कहानी बताती है कि पढ़ाई के साथ-साथ भी एक ठोस बिजनेस खड़ा किया जा सकता है।

  • अपने हुनर को शौक तक सीमित न रखकर उसे विधिवत बिजनेस का नाम और पहचान दी, मोक्षम कैंडल एंड कॉपरेशन इसका उदाहरण है।
  • बाजार में मौजूद कमी को पहचाना, यानी सेहत के प्रति जागरूक ग्राहकों के लिए पैराफिन के सुरक्षित विकल्प की जरूरत को समझा।
  • ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतों, तनाव, डिप्रेशन और एकाग्रता को ध्यान में रखकर उत्पादों की कई वैरायटी तैयार कीं।
  • कीमत सिर्फ 50 रुपये से शुरू रखकर उत्पाद को आम लोगों की पहुंच में बनाए रखा, जिससे व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंचना आसान हुआ।
  • इंस्टाग्राम जैसे सुलभ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर बिना बड़े निवेश के अपने उत्पाद को ग्राहकों तक पहुंचाया।

सवाल-जवाब

आंचल कहां की रहने वाली हैं?
आंचल देहरादून की रहने वाली हैं।
आंचल की कैंडल्स किस चीज से बनती हैं?
वे बी-वैक्स यानी मधुमक्खी के मोम और सोय वैक्स से एरोमा कैंडल्स तैयार करती हैं।
आंचल ने अपना कारोबार कब शुरू किया था?
उन्होंने करीब ढाई साल पहले, अपनी पढ़ाई के दौरान ही, यह कारोबार शुरू किया था।
आंचल के बिजनेस का नाम क्या है?
उनकी संस्था का नाम मोक्षम कैंडल एंड कॉपरेशन है।
इन कैंडल्स की शुरुआती कीमत कितनी है?
इनकी शुरुआती कीमत सिर्फ 50 रुपये तय की गई है।
ये कैंडल्स कहां बिकती हैं?
फिलहाल ये ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
इन एरोमा कैंडल्स का इस्तेमाल कहां किया जाता है?
इनका इस्तेमाल मेडिटेशन सेंटर्स, स्पा, योग केंद्रों और आलीशान रेस्टोरेंट्स में किया जा रहा है।
कैंडल्स में कौन-कौन से फ्लेवर उपलब्ध हैं?
तनाव के लिए रोजमेरी लीव्स, डिप्रेशन के लिए लैवेंडर ऑयल, एकाग्रता के लिए चंदन, केसर और दालचीनी के अलावा वनिला, चॉकलेट, ऑरेंज और फूलों की खुशबू वाली कैंडल्स भी उपलब्ध हैं।
रिया मेनन
लेखक के बारे मेंरिया मेननफूड एवं रेसिपी संवाददाता अमृतसर
विशेषज्ञताफूड लेखन, रेसिपी, पाककला रुझान, कुकिंग टिप्स, रेस्तराँ रिव्यू, वैश्विक व्यंजन, घरेलू खाना, फूड संस्कृति, लाइफस्टाइल फूड कंटेंट, पाकशास्त्र

रिया मेनन एक फूड एवं रेसिपी संवाददाता हैं जो पाककला के रुझानों, रेसिपी, रेस्तराँ संस्कृति, फूड रिव्यू और खाना बनाने की टिप्स को कवर करती हैं। वे फूड प्रेमियों और घरेलू रसोइयों के लिए दिलचस्प सामग्री साझा करती हैं।

रिया मेनन एक फूड एवं रेसिपी संवाददाता हैं जो पाककला पत्रकारिता, रेसिपी विकास, फूड संस्कृति, रेस्तराँ रुझानों और लाइफस्टाइल कुकिंग कंटेंट में विशेषज्ञता रखती हैं। वे रोज़मर्रा के घरेलू खाने के विचारों और पारंपरिक रेसिपी से लेकर आधुनिक फ़्यूज़न व्यंजनों, फूड नवाचारों और डाइनिंग अनुभवों तक — सब कुछ कवर करती हैं। सहज और दिलचस्प कहानी कहने पर ज़ोर देते हुए रिया वैश्विक व्यंजनों, मौसमी रेसिपी, खाना बनाने की तकनीकों और फूड से जुड़े लाइफस्टाइल रुझानों की पड़ताल करती हैं। उनका काम पाठकों को नए व्यंजन खोजने, अपनी कुकिंग बेहतर बनाने और फूड व पाकशास्त्र की बदलती दुनिया से अपडेट रहने में मदद करता है।

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