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गोंडा के राम सिंह ने खेती में पेश की नई मिसाल, मचान विधि से लौकी उगाकर कमा रहे बंपर मुनाफासक्सेस स्टोरी
20 जून 2026, 9:05 pm (38 दिन पहले)· 5

गोंडा के राम सिंह ने खेती में पेश की नई मिसाल, मचान विधि से लौकी उगाकर कमा रहे बंपर मुनाफा

गोंडा के रहने वाले पांचवीं पास राम सिंह ने विपरीत परिस्थितियों से लड़कर खेती को अपना जरिया बनाया और अब वह मात्र एक बीघा जमीन पर मचान विधि से लौकी उगाकर सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक में रहने वाले राम सिंह की कहानी संघर्ष और सफलता की एक अद्भुत मिसाल है। बेहद कम उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया था, जिसके बाद पूरे परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। आर्थिक तंगी के चलते वह अपनी स्कूली शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाए और उन्हें केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ने के बाद स्कूल छोड़ना पड़ा। जीवन यापन के लिए उन्होंने कुछ समय तक दूसरे शहर में नौकरी भी की, लेकिन अंततः वह अपने गांव वापस आ गए और पारंपरिक खेती को ही अपनी आजीविका का माध्यम बनाने का फैसला किया।

बलरामपुर के किसान से मिला आधुनिक खेती का आइडिया

पारंपरिक ढर्रे से अलग कुछ नया करने की चाह में राम सिंह ने आधुनिक तकनीकों की ओर रुख किया। ट्रेंडकिया से विशेष बातचीत के दौरान राम सिंह ने साझा किया कि उन्हें मचान विधि से लौकी उगाने की प्रेरणा पड़ोसी जिले बलरामपुर के एक प्रगतिशील किसान से मिली थी। बलरामपुर में इस विधि से हो रही सफल खेती को देखने के बाद उन्होंने इसे अपने खेत में भी आजमाने का निर्णय लिया। इस अनूठे प्रयोग ने उनके लिए आमदनी के नए द्वार खोल दिए।

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कम लागत में बंपर पैदावार और शानदार मुनाफा

वर्तमान में राम सिंह लगभग एक बीघा जमीन पर मचान विधि का उपयोग करके लौकी उगा रहे हैं। इस आधुनिक तकनीक की वजह से पौधों की बेलों को चढ़ने के लिए सही सहारा मिलता है, जिससे फसल जमीन पर खराब नहीं होती और पैदावार में भारी बढ़ोतरी होती है।

लागत और मुनाफे के आंकड़ों को साझा करते हुए राम सिंह ने ट्रेंडकिया को बताया कि इस एक बीघा खेती में उनका कुल खर्च मात्र 2,000 से ढाई हजार रुपये के आसपास आया है। उन्होंने बताया कि फसल की स्थिति काफी अच्छी है और इसके जरिए उन्हें लगभग 50,000 से 60,000 रुपये तक की कमाई होने की पूरी उम्मीद है। हालांकि, यह आय पूरी तरह से बाजार के उतार-चढ़ाव और सब्जी की तात्कालिक कीमतों पर निर्भर करती है।

कृषि क्षेत्र में युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा

लौकी की यह फसल चक्र आमतौर पर 5 से 6 महीने का होता है। राम सिंह इस तरह की फसलों के जरिए पूरे साल में लाखों रुपये का मुनाफा अर्जित कर रहे हैं, जिससे वह अपने परिवार की जरूरतों को बेहद अच्छे ढंग से पूरा कर पा रहे हैं। उनकी यह कामयाबी उन युवाओं और किसानों की सोच को बदलने का काम कर रही है जो खेती को घाटे का सौदा मानते हैं। राम सिंह की सफलता साबित करती है कि यदि कड़ी मेहनत के साथ सही तकनीक और लगन का मेल हो, तो कृषि भी एक बेहद आकर्षक व्यावसायिक विकल्प बन सकती है।

सवाल-जवाब

राम सिंह कहाँ के रहने वाले हैं और उनकी शैक्षणिक योग्यता क्या है?
राम सिंह उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक के रहने वाले हैं और उन्होंने केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की है।
राम सिंह को मचान विधि से लौकी उगाने का विचार कहाँ से आया?
उन्हें यह विचार पड़ोसी जिले बलरामपुर के एक किसान को इसी तकनीक से लौकी की खेती करते हुए देखकर आया था।
एक बीघा खेत में लौकी की इस खेती में कितनी लागत आती है?
इस तकनीक से एक बीघा खेत में लौकी उगाने की कुल लागत लगभग 2,000 से ढाई हजार रुपये आती है।
लौकी की यह फसल कितने समय की होती है और इससे कितनी आय की उम्मीद है?
यह फसल 5 से 6 महीने की होती है, और फसल अच्छी होने पर इससे लगभग 50,000 से 60,000 रुपये तक की आय की उम्मीद की जा सकती है।
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