गोंडा की पूजा का अचार बना रोजगार का जरिया: आठवीं पास गृहिणी से उद्यमी तक का सफर, 6 महिलाओं को मिला कामसक्सेस स्टोरी
3 घंटे पहले· 0

गोंडा की पूजा का अचार बना रोजगार का जरिया: आठवीं पास गृहिणी से उद्यमी तक का सफर, 6 महिलाओं को मिला काम

गोंडा जिले के पंडरी कृपाल विकासखंड की पूजा ने घर से अचार बनाने का छोटा काम शुरू कर उसे एक कमाई वाले कारोबार में बदल दिया, जिसमें आज 5 से 6 महिलाएं साथ काम कर रही हैं।

बड़ी डिग्री ही कामयाबी की गारंटी नहीं होती — कई बार घर के भीतर छिपा एक हुनर भी पूरे परिवार की तस्वीर बदल देता है। गोंडा जिले के विकासखंड पंडरी कृपाल की रहने वाली पूजा इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। महज आठवीं तक पढ़ी इस गृहिणी ने अपने रसोईघर से अचार बनाने का जो छोटा-सा काम शुरू किया था, वह आज नियमित आमदनी का भरोसेमंद जरिया बन चुका है और परिवार की माली हालत को मजबूती दे रहा है।

घरेलू काम से कारोबार तक

TrendKia से बातचीत में पूजा ने बताया कि पहले उनकी दुनिया सिर्फ घर के कामकाज तक सीमित थी। परिवार की आमदनी सीमित थी और उसी में घर का खर्च खींचना आसान नहीं था। आठवीं के बाद शादी हो गई और वह हाउसवाइफ की भूमिका में आ गईं। ऐसे में उन्होंने तय किया कि अपने हुनर को ही कमाई का रास्ता बनाएंगी — और वह हुनर था पारंपरिक तरीके से स्वादिष्ट अचार तैयार करने का।

संजू मिश्रा से मिली राह

पूजा के मुताबिक इस सफर की शुरुआत संजू मिश्रा से मुलाकात के बाद हुई। पूजा घर पर थोड़ा-बहुत अचार बना ही लेती थीं, और जब उन्होंने यह बात साझा की तो संजू मिश्रा ने सुझाव दिया कि जब हुनर है तो इसे कारोबार का रूप क्यों न दिया जाए। संजू मिश्रा ने उन्हें अचार बनाने की पूरी विधि समझाई और यहीं से व्यवसाय की नींव पड़ी। आज पूजा संजू मिश्रा के साथ जुड़कर 'Akshara Achar' ब्रांड भी चला रही हैं। वह बताती हैं कि इस फैसले में घरवालों का पूरा साथ मिला, और सबसे बड़ा सहारा उनके पति का रहा। आगे वह और कई तरह के अचार बनाना चाहती हैं, जिसकी ट्रेनिंग वह अभी ले रही हैं।

किन अचारों की सबसे ज्यादा मांग

पूजा बताती हैं कि उनके यहां मिक्स अचार, कटहल का अचार, जिमीकंद का अचार, हरी मिर्च का अचार और लहसुन के अचार की मांग सबसे ज्यादा रहती है। शुरुआत में उन्होंने घर पर ही आम, नींबू, मिर्च और मिश्रित सब्जियों का अचार बनाना शुरू किया था। पहले यह अचार आसपास के लोगों और रिश्तेदारों तक ही बिकता था, लेकिन हाथ के बने इस अचार का स्वाद लोगों को भाने लगा और धीरे-धीरे मांग बढ़ती चली गई।

गुणवत्ता पर पूरा जोर

बढ़ती मांग को देखते हुए पूजा ने उत्पादन भी बढ़ा दिया। वह बताती हैं कि इस समय उनके यहां करीब 15 से 20 प्रकार के अचार बनाए जाते हैं। हर अचार में गुणवत्ता का खास ध्यान रखा जाता है — सभी मसाले और सामग्री सावधानी से चुने जाते हैं ताकि स्वाद और गुणवत्ता बरकरार रहे। यही वजह है कि उनके अचार की मांग लगातार बढ़ रही है। अब उनके ग्राहक सिर्फ गांव और जिले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दूसरे इलाकों से भी लोग उनका अचार मंगवाते हैं।

दूसरी महिलाओं के लिए मिसाल

पूजा अकेले नहीं, बल्कि कुल मिलाकर 5 से 6 महिलाओं की टीम के साथ यह काम कर रही हैं। इस आमदनी से परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं और बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर का पूरा खर्च इसी कारोबार से चल रहा है। पूजा अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही हैं। उनका कहना है कि अगर महिलाओं में आत्मविश्वास और कुछ कर गुजरने की इच्छा हो, तो वे घर बैठे ही अपना कारोबार खड़ा कर सकती हैं।

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