पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ पर्यटन (सस्टेनेबल टूरिज्म) को नया आयाम देते हुए राजस्थान के एक युवा इंजीनियर ने कमाल कर दिखाया है। सुमेरपुर के रहने वाले इंजीनियर यथार्थ अग्रवाल ने एक ऐसा हाई-टेक प्रीफैब इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्टअप शुरू किया है, जो बिना जंगलों को नुकसान पहुंचाए और सीमेंट-कंक्रीट का इस्तेमाल किए बिना बेहद खूबसूरत लग्जरी कंटेनर रूम तैयार कर रहा है। ट्रेंडकिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस अनूठे आइडिया की शुरुआत जवाई क्षेत्र में पर्यावरण संवेदनशीलता के कारण पक्के निर्माणों पर लगे प्रतिबंध के बाद हुई।
बिना खुदाई और कंक्रीट के 'जीरो लैंड डैमेज' तकनीक
यथार्थ अग्रवाल ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए ऐसे मूवेबल और आलीशान अस्थायी घर विकसित किए हैं, जिन्हें क्रेन की मदद से सीधे जमीन पर स्थापित कर दिया जाता है। इस तकनीक में किसी भी तरह की खुदाई या कंक्रीट की नींव डालने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस 'जीरो लैंड डैमेज' तकनीक के जरिए जमीन की प्राकृतिक बनावट और वहां मौजूद पेड़-पौधों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इस पर्यावरण-अनुकूल स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सरकार ने भी अपनी स्टार्टअप योजना के तहत यथार्थ को 2.5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की है।
चीनी आयात को मात, आधे से भी कम दाम में मिलेंगे घर
यथार्थ ने करीब 3 महीने के कड़े रिसर्च के बाद जनवरी 2025 में अहमदाबाद में अपने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की और वहां अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की। इस यूनिट में स्पेस कैप्सूल होम्स, डोम्स और एप्पल पॉड कैबिन्स का निर्माण किया जा रहा है। चीनी आयातित विला की तुलना में ये भारतीय कौशल और स्थानीय सामग्रियों से तैयार रूम्स बेहद किफायती हैं। चीन से मंगाए जाने वाले विला पर लगने वाले भारी टैक्स और परिवहन खर्च के कारण वे काफी महंगे हो जाते हैं, जबकि यथार्थ द्वारा तैयार ये कमरे चीनी आयात के मुकाबले 40% से 60% तक कम लागत में उपलब्ध हो रहे हैं।
अत्याधुनिक फीचर्स और मौसम के अनुकूल ढांचा
इन आधुनिक केबिनों में बेहतरीन वेदर-प्रूफ मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया गया है। इनकी दीवारों में 4 इंच मोटा विशेष पीयू फोम और रॉकवुल इंसुलेशन लगाया गया है, जो बाहर के तापमान और तेज शोरगुल को अंदर आने से रोकता है। इससे कमरों के भीतर बिजली की खपत भी काफी कम हो जाती है। इसके अलावा, प्रकृति के अनुकूल ड्रेनेज के लिए इनमें पहले से ही इन-बिल्ट प्लंबिंग सिस्टम दिया गया है, जिसे सीधे साइट पर मौजूद सेप्टिक टैंक या एसटीपी से जोड़ा जा सकता है। यथार्थ के मुताबिक, पिछले एक साल में ही राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल और महाराष्ट्र के वन क्षेत्रों में इनकी मांग काफी तेजी से बढ़ी है।
इन प्रीफैब यूनिट्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मुख्य सामग्रियां
इन टिकाऊ और मौसम-प्रतिरोधी केबिनों को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित सामग्रियों का उपयोग किया जाता है:
- जीआई और एमएस स्टील स्ट्रक्चर
- एल्युमिनियम और एसीपी शीट्स
- फाइबर सीमेंट बोर्ड और पॉलीकार्बोनेट शीट्स
- टफेंड ग्लास
- पीयू फोम और रॉकवुल इंसुलेशन
- डब्ल्यूपीसी और जिप्सम पैनल
- एसपीसी या वुडन फ्लोरिंग और टेंसाइल फैब्रिक
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ये शानदार और आधुनिक आवास वर्तमान में धर्मशाला (हिमाचल), लगतपुरी (महाराष्ट्र), अल्मोड़ा (उत्तराखंड) और सवाई माधोपुर (राजस्थान) जैसे पहाड़ी व जंगली पर्यटन क्षेत्रों में सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। यथार्थ अग्रवाल का अगला लक्ष्य राजस्थान के भीतर ही चीन जैसी बड़ी प्रीफैब निर्माण इकाई खड़ी करना है। उनका मानना है कि महाकुंभ, चारधाम यात्रा और जैसलमेर रण उत्सव जैसे बड़े आयोजनों में ये अस्थायी आवास गेम-चेंजर की भूमिका निभा सकते हैं, जिसके लिए वे सरकार से जमीन और नीतिगत सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं।
यदि आप भी इस तरह के पर्यावरण-अनुकूल और लग्जरी घर को अपने रिसॉर्ट या निजी उपयोग के लिए बनवाना चाहते हैं, तो यथार्थ अग्रवाल से सीधे उनके मोबाइल नंबर 8003000130 पर संपर्क कर सकते हैं या उनकी आधिकारिक वेबसाइट www.stunningstays.in पर जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।













