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इंश्योरेंस की नौकरी छोड़कर मोनिका ने खोला फ्रूट शेक का ठेला, एक घंटे में खाली हो जाती है दुकानसक्सेस स्टोरी
3 जुल॰ 2026, 11:13 pm (45 दिन पहले)· 2

इंश्योरेंस की नौकरी छोड़कर मोनिका ने खोला फ्रूट शेक का ठेला, एक घंटे में खाली हो जाती है दुकान

जमशेदपुर की मोनिका ने इंश्योरेंस कंपनी की नौकरी छोड़कर हेल्दी फूड कार्ट शुरू किया, जहां रोज सुबह महज एक घंटे में लगभग पूरा सामान बिक जाता है.

झारखंड के जमशेदपुर में मोनिका ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद एक इंश्योरेंस कंपनी में नौकरी शुरू की थी, लेकिन कुछ साल बाद उन्होंने यह नौकरी छोड़कर सड़क किनारे हेल्दी फूड का ठेला लगाना शुरू कर दिया. आज उनकी यही दुकान जमशेदपुर में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि यहां रोज सुबह महज एक घंटे में लगभग पूरा सामान बिक जाता है.

नौकरी में दबाव ज्यादा, कमाई कम, इसलिए बदला रास्ता

इंश्योरेंस कंपनी में काम करते हुए मोनिका को महसूस हुआ कि उन पर काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जबकि इसके बदले मिलने वाली सैलरी उतनी संतोषजनक नहीं है. यही फासला उनके मन में कुछ अपना शुरू करने का बीज बन गया. मोनिका ने तय किया कि वह अपनी मेहनत और हुनर को किसी और की नौकरी में खपाने के बजाय अपने ही व्यवसाय में लगाएंगी.

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सुबह 6 बजे लगती है दुकान, मेन्यू में हेल्दी ऑप्शन ही ऑप्शन

अपने इस इरादे को अमली जामा पहनाने के लिए मोनिका ने हेल्दी फूड और ड्रिंक्स का एक छोटा-सा स्टार्टअप शुरू किया. वह हर दिन सुबह ठीक 6 बजे एग्रीको ट्रांसपोर्ट मैदान के पास अपना फूड कार्ट लगाती हैं. उनके स्टॉल पर ग्राहकों को ताजा नारियल पानी से बना मिल्क, ताजे कटे फलों से तैयार शेक्स, इन्फ्यूज्ड वाटर, जामुन शॉट्स जैसे कई हेल्दी विकल्प मिलते हैं. लोगों में सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता के चलते मोनिका का यह कॉन्सेप्ट खूब पसंद किया जा रहा है.

अकेले संभालती हैं पूरा काम, एक घंटे में बिक जाता है माल

सबसे खास बात यह है कि मोनिका अपना पूरा सेटअप अकेले ही संभालती हैं. वह अपनी स्कूटी पर ही सारा सामान लादकर लाती हैं और खुद अपने हाथों से स्टॉल तैयार करती हैं. उनकी मेहनत और सामान की क्वालिटी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महज एक घंटे के भीतर उनका लगभग पूरा स्टॉक खत्म हो जाता है. रोजाना 100 से ज्यादा शेक्स और कट फ्रूट्स बेचकर वह सुबह-सुबह ही अपनी दिनभर की बिक्री निपटा लेती हैं.

'धोखा खाने से अच्छा, फ्रूट्स खा लो' वाली लाइन ने बनाई पहचान

मोनिका के मार्केटिंग करने का तरीका भी लोगों को खूब भा रहा है. उन्होंने अपने स्टॉल पर एक मजेदार कैप्शन लिख रखा है, 'धोखा खाने से अच्छा, मेरे यहां फ्रूट्स खा लो.' यह लाइन पढ़कर ग्राहकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और अब यही वन-लाइनर उनके स्टॉल की पहचान बन चुका है.

जमशेदपुर के युवाओं के लिए बनीं मिसाल

मोनिका की यह कहानी बताती है कि अगर सोच नई हो, मेहनत ईमानदार हो और आत्मविश्वास मजबूत हो तो छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी बड़ी कामयाबी में बदल सकता है. आज वह जमशेदपुर के युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं और यह संदेश दे रही हैं कि सफलता सिर्फ नौकरी में ही नहीं, बल्कि अपने सपनों को हकीकत में बदलने में भी छिपी होती है.

सवाल-जवाब

मोनिका पहले क्या काम करती थीं?
पढ़ाई पूरी करने के बाद मोनिका कुछ वर्षों तक एक इंश्योरेंस कंपनी में काम करती थीं.
मोनिका ने नौकरी क्यों छोड़ी?
उन्हें लगा कि नौकरी में काम का दबाव ज्यादा है, जबकि उसके मुकाबले सैलरी उतनी संतोषजनक नहीं थी.
मोनिका अपना स्टॉल कहां और किस समय लगाती हैं?
वह हर दिन सुबह ठीक 6 बजे एग्रीको ट्रांसपोर्ट मैदान के पास अपना फूड कार्ट लगाती हैं.
उनके स्टॉल पर क्या-क्या मिलता है?
स्टॉल पर फ्रेश कोकोनट मिल्क, ताजे कटे फलों से बने शेक्स, इन्फ्यूज्ड वाटर और जामुन शॉट्स जैसे हेल्दी विकल्प मिलते हैं.
मोनिका रोजाना कितना सामान बेचती हैं?
वह रोजाना 100 से भी अधिक शेक्स और कट फ्रूट्स बेचती हैं, और यह सामान महज एक घंटे में ही बिक जाता है.
मोनिका अपना पूरा सेटअप कैसे संभालती हैं?
वह अपनी स्कूटी पर सारा सामान लेकर आती हैं और खुद ही स्टॉल तैयार करती हैं, पूरा काम अकेले करती हैं.
मोनिका के स्टॉल की खास पहचान क्या बन गई है?
उनका कैप्शन 'धोखा खाने से अच्छा, मेरे यहां फ्रूट्स खा लो' उनके स्टॉल की पहचान बन चुका है.
मोनिका की कहानी से क्या सीख मिलती है?
उनकी कहानी बताती है कि नई सोच, ईमानदार मेहनत और मजबूत आत्मविश्वास से छोटे स्तर का काम भी बड़ी कामयाबी में बदल सकता है.
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