नौकरी की बंधी-बंधाई दिनचर्या से बाहर निकलकर खुद का काम शुरू करने का फैसला आसान नहीं होता है, लेकिन जब इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है। दिल्ली के नजफगढ़ इलाके के रहने वाले लक्ष्य कालिया और उनकी पत्नी अंजलि कालिया ने पारंपरिक रोजगार के रास्ते को छोड़कर उद्यमी बनने का कठिन लेकिन साहसिक निर्णय लिया। इस दंपत्ति ने कॉरपोरेट दफ्तरों की भागदौड़ भरी जिंदगी को पीछे छोड़ते हुए अपने खुद के उद्यम की नींव रखी, जिसका नाम उन्होंने लव लाइट रखा है। इस नाम के चुनाव के पीछे एक भावनात्मक कहानी भी है, क्योंकि उन्होंने अपने बेटे लव के नाम को अपने इस स्टार्टअप से जोड़ दिया है।
लक्ष्य गुरुग्राम में एक निजी कंपनी में कार्यरत थे, जबकि अंजलि एक लैब टेक्नीशियन के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं। दोनों का जीवन सामान्य गति से चल रहा था, लेकिन उनके भीतर हमेशा से कुछ मौलिक और स्वतंत्र करने की इच्छा बनी हुई थी। दूसरों के अधीन काम करने की बंदिशों से तंग आकर उन्होंने फैसला किया कि वे नौकरी तलाशने वाले यानी जॉब सीकर नहीं बनेंगे, बल्कि दूसरों को काम देने वाले यानी जॉब प्रोवाइडर की भूमिका निभाएंगे। उनका मानना था कि खुद का कारोबार होने पर निर्णय लेने की पूर्ण स्वतंत्रता मिलती है और साथ ही समाज के अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
शुरुआत में इस दंपति ने सुगंधित मोमबत्तियां यानी सेंटेड कैंडल्स बनाने का काम अपने हाथों में लिया। वे दोनों मिलकर खुद ही इन उत्पादों को तैयार करते थे। समय के साथ उन्होंने अपने काम का दायरा बढ़ाया और क्रोशिया से जुड़ी कलाकृतियों को भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर लिया। उनका मानना है कि क्रोशिया केवल एक हुनर नहीं है, बल्कि यह पुरानी यादों और भावनाओं से जुड़ा हुआ क्षेत्र है। दादी और नानी के हाथों से बुने गए स्वेटर तथा ऊनी वस्त्रों की गर्माहट आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है। इसी पुरानी याद को उन्होंने आधुनिक और आकर्षक अंदाज में ग्राहकों के सामने पेश किया।
वर्तमान में इस ब्रांड के तहत विभिन्न प्रकार की हस्तनिर्मित वस्तुएं तैयार की जाती हैं। इनमें क्रोशिया से बने कलात्मक फूल, विशेष राखियां, हेयर स्क्रंचीज, महिलाओं के लिए विभिन्न प्रकार की एक्सेसरीज, सेंटेड कैंडल्स, फ्रिज मैग्नेट और अनूठे गिफ्ट आइटम्स शामिल हैं। चूंकि इनमें से प्रत्येक उत्पाद को पूरी तरह से हाथों से तैयार किया जाता है, इसलिए हर सामान की अपनी एक अलग विशिष्टता और खूबसूरती होती है। मशीनों की चमक-दमक के बजाय हाथ की कलाकारी इन उत्पादों की सबसे बड़ी खूबी बन गई है।
इस स्टार्टअप के माध्यम से आज बड़े पैमाने पर महिलाओं को जोड़ा गया है। दिल्ली के अलावा फरीदाबाद और शिमला जैसे शहरों की करीब 50 से अधिक महिलाएं इस उद्यम का हिस्सा बन चुकी हैं। ये सभी महिलाएं अपने घरों से ही इन विशेष उत्पादों को तैयार करती हैं, जिससे उन्हें घर बैठे आय का साधन मिल जाता है। लक्ष्य का कहना है कि जब कोई महिला उन्हें फोन करके यह बताती है कि उनके इस काम की वजह से उसे रोजगार मिला है, तो उन्हें सबसे ज्यादा मानसिक संतोष और खुशी मिलती है।
आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह बदलाव इस परिवार के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ है। नौकरी छोड़ने के बाद अब उनकी कुल आमदनी पहले से कहीं अधिक बेहतर हो चुकी है। उनका अनुमान है कि उन्हें हर महीने 50 हजार रुपये से अधिक का मुनाफा आसानी से हो जाता है। हालांकि उनका यह भी मानना है कि इस सफर में पैसे से ज्यादा महत्वपूर्ण वह आजादी है जो उन्हें अपने फैसले खुद लेने की ताकत देती है। अंजलि बताती हैं कि विशेष अवसरों और त्योहारों के समय उनके उत्पादों की बिक्री में जबरदस्त उछाल आता है। रक्षाबंधन, तीज, नवरात्रि और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान उनके द्वारा बनाए जाने वाले सामानों की मांग बाजार में काफी बढ़ जाती है, जिससे मुनाफा भी कई गुना तक बढ़ जाता है।


















