राजस्थान के जालोर जिले के लिए यह वक्त खास गर्व का है। यहां एक ही घर से निकले दो सगे भाइयों ने वर्दी पहनकर देश सेवा की राह चुनी और दोनों ने अलग अलग बलों में बड़ी कामयाबी हासिल कर ली। एक भाई भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बना है, तो दूसरे ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF में अधिकारी का पद पाया है। पूरे मारवाड़ क्षेत्र में इन दोनों की चर्चा है और लोग उनकी मेहनत को मिसाल के तौर पर देख रहे हैं।
एक परिवार, दो वर्दियां, एक ही लक्ष्य
दिलचस्प बात यह है कि दोनों भाइयों ने भले ही अलग अलग सेवाएं चुनीं, लेकिन उनका मकसद एक ही रहा, देश की सेवा करना। एक ने सीमा और सैन्य मोर्चे की जिम्मेदारी संभाली है तो दूसरे ने देश के भीतर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का काम चुना। यही वजह है कि यह सिर्फ एक परिवार की उपलब्धि नहीं रह गई, बल्कि पूरे जिले और इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
बचपन से ही दिखी अनुशासन की झलक
यह कामयाबी रातोंरात नहीं मिली। इसके पीछे सालों की लगन, अनुशासन और लगातार संघर्ष छिपा है। मुश्किल हालात में भी दोनों भाई अपने लक्ष्य से नहीं भटके और हर बार खुद को और मजबूत बनाते गए। परिवार का भरोसा और साथ उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। बचपन से ही दोनों के मन में देश सेवा का सपना था और उन्होंने उसी दिशा में कदम बढ़ाए।
जानकारी के मुताबिक दोनों भाइयों ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जालोर में ही की और यहीं से मेहनत व अनुशासन की नींव पड़ी। स्कूल के दिनों से ही उनमें जिम्मेदारी का भाव साफ नजर आता था। पढ़ाई के साथ साथ उन्होंने जीवन के मूल्यों को भी अपनाया, और गांव तथा स्कूल के माहौल ने उनके व्यक्तित्व को और निखारा।
सेना में लेफ्टिनेंट बनने तक का सफर
परिवार के एक भाई ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर देश सेवा की नई मिसाल कायम की है। कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरने और करीब 18 महीने के सख्त सैन्य प्रशिक्षण को पूरा करने के बाद ही उन्हें यह प्रतिष्ठित पद मिला। बचपन से अनुशासन और देशभक्ति से जुड़े इस युवा अधिकारी ने अपनी मेहनत और समर्पण के दम पर सपने को हकीकत में बदल दिया। उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरा जालोर जिला गर्व से भर उठा है।
CISF में अधिकारी बनकर देश की आंतरिक सुरक्षा का हिस्सा
वहीं उनके दूसरे भाई ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF में चयन पाकर देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में अपनी पहचान बनाई है। लगातार अभ्यास, कड़ी मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज वे देश की अहम सुरक्षा जिम्मेदारियों का हिस्सा बनकर सेवा दे रहे हैं, जिससे परिवार और पूरे क्षेत्र का मान बढ़ा है।













