उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में स्थित निचलौल विकासखंड के ग्राम पंचायत अहिरौली उर्फ बजहा ने ग्रामीण विकास का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। गांव के ग्राम प्रधान अरविंद कुशवाहा ने सरकारी स्तर पर प्राप्त पुरस्कार राशि का उपयोग ग्रामीण जनता की सहूलियत के लिए एक सर्वसुविधायुक्त मैरेज हॉल का निर्माण कराने में किया है। अमूमन गांवों में वैवाहिक आयोजनों या अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त जगह और बुनियादी संसाधनों की भारी कमी महसूस की जाती थी। ऐसे समय में जब कस्बों और शहरों में मैरेज हॉल बुक करने के लिए मध्यमवर्गीय परिवारों को भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ती है, इस गांव के निवासियों को अब अपने ही गांव में मुफ्त में शहर जैसी सुविधाएं मिलने जा रही हैं।
ग्रामीणों को लाखों के खर्च से मिली मुक्ति
वर्तमान समय में शादी-विवाह, तिलकोत्सव, वर्षगांठ और अन्य छोटे-बड़े कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए एक विशाल और व्यवस्थित स्थान की आवश्यकता होती है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ अब ग्रामीण इलाकों में भी खुले स्थानों की कमी होने लगी है। ऐसे में गांव के लोगों को किसी भी मांगलिक कार्य के लिए नजदीकी कस्बों या शहरों का रुख करना पड़ता था, जहां मैरेज हॉल के किराए के रूप में लाखों रुपये खर्च हो जाते थे। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह भारी आर्थिक बोझ साबित होता था। इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए ग्राम प्रधान अरविंद कुशवाहा ने गांव में ही एक भव्य और आधुनिक मैरेज हॉल का निर्माण कराने का संकल्प लिया। उनकी इस सकारात्मक सोच और पहल के कारण पूरे महराजगंज जिले में उनके गांव की एक अलग पहचान बन गई है।
शहरों की तर्ज पर बनाई गई हैं आधुनिक सुविधाएं
अहिरौली उर्फ बजहा गांव में बनकर तैयार हुआ यह मैरेज हॉल किसी बड़े शहर या आसपास के टाउन में बने निजी मैरेज हॉल से किसी भी मामले में कम नहीं है। इस परिसर में आयोजनों को सुगम बनाने के लिए हर छोटी-बड़ी जरूरत का विशेष ध्यान रखा गया है। मुख्य मांगलिक कार्यक्रमों के संचालन के लिए एक आकर्षक और भव्य स्टेज तैयार किया गया है। स्टेज के ठीक सामने एक विशाल प्रांगण बनाया गया है, जहां सैकड़ों मेहमानों के बैठने के लिए कुर्सियां लगाने की पर्याप्त व्यवस्था है। इसके साथ ही, वर-वधू पक्ष की सुविधा और अन्य व्यवस्थाओं के संचालन हेतु भवन के दोनों हिस्सों में सुसज्जित कमरों का निर्माण किया गया है। महिला और पुरुष आगंतुकों के लिए पृथक-पृथक आधुनिक प्रसाधन सुविधा भी सुनिश्चित की गई है।
खान-पान और कैटरिंग के लिए बना विशाल स्थान
किसी भी मांगलिक या सार्वजनिक कार्यक्रम में भोजन और खान-पान का प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इस मैरेज हॉल की रूपरेखा तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है। परिसर के भीतर कैटरिंग सेवा और भोजन परोसने के लिए अलग से एक सुव्यवस्थित और विशाल जगह निर्धारित की गई है, ताकि मेहमान आसानी से भोजन का आनंद ले सकें। इसके अलावा, भोजन तैयार करने के लिए रसोइयों की सुविधा के अनुसार एक स्वच्छ और बड़ा रसोई क्षेत्र भी बनाया गया है। मैरेज हॉल परिसर के बाहरी हिस्से में भी काफी खाली जमीन उपलब्ध है, जहां वाहनों की पार्किंग के साथ-साथ सैकड़ों लोगों की आवाजाही बिना किसी अव्यवस्था के आसानी से हो सकती है। इस निर्माण से मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सबसे अधिक राहत मिलेगी।
पुरस्कार में मिले 35 लाख रुपये से हुआ कायाकल्प
ग्राम प्रधान अरविंद कुशवाहा द्वारा गांव का कायाकल्प करने का यह पहला प्रयास नहीं है। इससे पूर्व भी वे अपनी दूरदर्शी सोच और विकास कार्यों के बल पर पंचायती राज व्यवस्था में एक मिसाल कायम कर चुके हैं। इससे पहले उन्होंने गांव में एक भव्य अमृत सरोवर का निर्माण करवाया था। इस सरोवर के सौंदर्य और निर्माण गुणवत्ता से प्रभावित होकर भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इसकी तस्वीर साझा करते हुए सराहना की थी। इसके अतिरिक्त, गांव के आंगनबाड़ी केंद्र को भी एक आधुनिक मॉडल केंद्र के रूप में विकसित किया गया, जहां बच्चों के पठन-पाठन और खेलकूद के लिए सभी आवश्यक उपकरण और सुविधाएं मुहैया कराई गईं। इसे भी केंद्रीय मंत्रालय द्वारा सराहा गया था।
मॉडल स्मार्ट विलेज के रूप में उभरा गांव
गांव में कराए गए इन अनुकरणीय और गुणवत्तापूर्ण विकास कार्यों को देखते हुए सरकार की ओर से ग्राम पंचायत और ग्राम प्रधान अरविंद कुशवाहा को 35 लाख रुपये की सम्मानजनक पुरस्कार राशि प्रदान की गई थी। अरविंद कुशवाहा ने इस धनराशि का व्यक्तिगत या साधारण कार्यों में उपयोग करने के बजाय गांव की सबसे बड़ी सामाजिक जरूरत यानी मैरेज हॉल के निर्माण में लगा दिया। निचलौल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला यह गांव आज अपनी इस उपलब्धि के कारण पूरे महराजगंज जिले में मॉडल स्मार्ट विलेज के रूप में उभरा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान की इस सोच ने न केवल उनका आर्थिक बोझ कम किया है, बल्कि गांव के गौरव को भी प्रदेश स्तर पर बढ़ाया है।



















