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सीतामढ़ी के शशि रंजन सुमन बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, जानिए कैसे पूरी की यह शानदार यात्रासक्सेस स्टोरी
27 जून 2026, 11:10 pm (45 दिन पहले)· 2

सीतामढ़ी के शशि रंजन सुमन बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, जानिए कैसे पूरी की यह शानदार यात्रा

सीतामढ़ी के शशि रंजन सुमन ने 22 साल 8 महीने की उम्र में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर जिले का मान बढ़ाया है। उन्होंने टेक्निकल एंट्री स्कीम के माध्यम से अपनी सफलता की राह तय की।

सीतामढ़ी के रहने वाले शशि रंजन सुमन ने मात्र 22 साल 8 महीने की छोटी उम्र में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद तक पहुंचकर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस कामयाबी ने स्थानीय युवाओं में राष्ट्र सेवा का जज्बा पैदा कर दिया है। अपनी इस उपलब्धि का श्रेय शशि रंजन ने अपनी शुरुआती शिक्षा की मजबूत नींव, माता-पिता के सही दिशा-निर्देश और अपने गुरुओं से मिलने वाले लगातार प्रोत्साहन को दिया है।

तकनीकी प्रवेश योजना के लिए जरूरी योग्यताएं

सेना में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए टेक्निकल एंट्री स्कीम (TES) एक प्रमुख माध्यम है। इसमें शामिल होने के लिए शैक्षणिक योग्यता पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। उम्मीदवारों को 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) विषयों के साथ पढ़ाई करनी होती है और इसमें 85 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाना अनिवार्य है। साथ ही, JEE Mains परीक्षा में 85 परसेंटाइल से ऊपर का स्कोर हासिल करना आवश्यक है। इन अनिवार्य अर्हताओं को पूरा करने के बाद, उम्मीदवार को अपना स्कोर भारतीय सेना के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करना होता है, जिसके बाद ही इंटरव्यू का बुलावा भेजा जाता है।

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एसएसबी इंटरव्यू और ट्रेनिंग की चुनौतियां

चयन प्रक्रिया के अगले पड़ाव में उम्मीदवारों को पांच दिनों तक चलने वाले कठिन एसएसबी (SSB) इंटरव्यू का सामना करना पड़ता है। इस दौरान उम्मीदवार की शारीरिक और मानसिक क्षमताओं की कड़ी परीक्षा ली जाती है। एक बार इस चरण को पार करने के बाद मेडिकल टेस्ट और अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। शशि रंजन सुमन ने बताया कि उनका सैन्य सफर ओटीए (OTA) गया में शुरू हुआ था। इसके बाद उन्होंने सीटीडब्ल्यू (CTW) सिकंदराबाद में तीन साल की टेक्निकल ट्रेनिंग ली और देहरादून में एक महीने की पीओपी प्रैक्टिस पूरी करने के बाद उन्हें सेना में कमिशन मिला।

असफलता से सीखना ही सफलता की कुंजी

भारतीय सेना में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए शशि रंजन ने एक बहुत ही प्रेरणादायक संदेश दिया है। उनका कहना है कि सफलता के लिए निरंतरता बहुत आवश्यक है। खुद शशि रंजन भी इस मुकाम पर पहुँचने से पहले तीन बार स्क्रीन आउट हो चुके थे, लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी। उनका मानना है कि यदि कोई छात्र पहली बार असफल होता है, तो उसे हार मानकर रुकना नहीं चाहिए। बल्कि, अपनी कमियों को सुधारते हुए कड़ी मेहनत और लगन के साथ दोबारा प्रयास करने से सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होती है।

सवाल-जवाब

शशि रंजन सुमन ने भारतीय सेना में कौन सा पद हासिल किया है?
उन्होंने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया है।
टेक्निकल एंट्री स्कीम के लिए 12वीं में कितने अंक जरूरी हैं?
इस स्कीम के लिए 12वीं कक्षा में PCM विषयों के साथ 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
JEE Mains में कितना परसेंटाइल होना चाहिए?
उम्मीदवार का JEE Mains में 85 परसेंटाइल से ऊपर का स्कोर होना अनिवार्य है।
एसएसबी इंटरव्यू कितने दिनों का होता है?
एसएसबी इंटरव्यू की प्रक्रिया पांच दिनों तक चलती है।
शशि रंजन सुमन की ट्रेनिंग कहां हुई?
उनकी प्रारंभिक ट्रेनिंग ओटीए गया में हुई, इसके बाद सीटीडब्ल्यू सिकंदराबाद में टेक्निकल ट्रेनिंग और अंत में देहरादून में पीओपी प्रैक्टिस पूरी हुई।
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