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लखीमपुर खीरी के किसान राममूर्ति ने रेशम कीट पालन से बदली अपनी किस्मत, व्यापारी खुद घर आकर खरीदते हैं कोकूनसक्सेस स्टोरी
8 अग॰ 2026, 9:20 am (83 दिन पहले)· 0

लखीमपुर खीरी के किसान राममूर्ति ने रेशम कीट पालन से बदली अपनी किस्मत, व्यापारी खुद घर आकर खरीदते हैं कोकून

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में पारंपरिक खेती के साथ रेशम कीट पालन किसानों के लिए कमाई का जरिया बन रहा है, जहां 30 सालों से रेशम उत्पादन कर रहे किसान राममूर्ति से व्यापारी घर आकर कोकून खरीद रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में पारंपरिक कृषि पद्धतियों के साथ-साथ अब रेशम कीट पालन किसानों की आय बढ़ाने का एक बेहद प्रभावी और लाभदायक माध्यम बनकर उभर रहा है। कम भू-भाग में अपेक्षाकृत अधिक आमदनी की संभावना और वर्ष में कई बार पैदावार मिलने के कारण स्थानीय किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर रेशम उत्पादन की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। जिले में शहतूत की खेती और रेशम कीट पालन को प्रोत्साहन देने के लिए कृषि विभाग और प्रशासन द्वारा किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। किसान शहतूत के पौधे लगाकर उसकी पत्तियों से रेशम कीटों का सफलता पूर्वक पालन कर रहे हैं और तैयार कोकून को बाजार में बेचकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।

रेशम कीट पालन की प्रक्रिया और शहतूत का महत्व

रेशम उत्पादन व्यवसाय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसानों को बार-बार पौधे रोपने की आवश्यकता नहीं होती। एक बार शहतूत का पौधा लगा देने के बाद किसान कई सालों तक उसकी पत्तियों का उपयोग रेशम कीटों के आहार के लिए कर सकते हैं। कीट पालन की प्रक्रिया में रेशम के कीड़े शहतूत की कोमल पत्तियों को खाकर तेजी से विकसित होते हैं और कुछ ही समय के भीतर अपने आसपास कोकून का निर्माण करते हैं। तैयार किया गया यही कोकून रेशम उत्पादन उद्योग की मुख्य कच्ची सामग्री है, जिसे बाजार में बेचकर किसान नियमित आमदनी प्राप्त करते हैं।

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लखीमपुर खीरी के रहने वाले किसान राममूर्ति पिछले 30 वर्षों से लगातार रेशम कीट पालन का कार्य कर रहे हैं और इससे अच्छा खासा लाभ अर्जित कर रहे हैं। वे बताते हैं कि वे एक साल में चार बार रेशम कीट पालन का काम करते हैं। इतने लंबे समय के अनुभव और लगातार कीट पालन के चलते उनकी किस्मत बदल चुकी है और वे इस व्यवसाय से हर साल लाखों रुपये की आमदनी हासिल कर रहे हैं।

कोकून का बाजार और घर बैठे बिक्री का फायदा

बाजार में रेशम के कोकून की मांग में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। वर्तमान में बाजार में कोकून की औसत कीमत लगभग 400 रुपये प्रति किलोग्राम तक चल रही है। हालांकि, इसकी अंतिम कीमत कोकून की गुणवत्ता, किस्म, बाजार में मांग की स्थिति और कोकून की तागी अवस्था पर निर्भर करती है। यदि कोकून की गुणवत्ता अच्छी होती है, तो किसानों को बाजार में 400 रुपये प्रति किलो से भी बेहतर और प्रीमियम दाम मिलने की पूरी उम्मीद रहती है। यही वजह है कि लखीमपुर खीरी में किसान रेशम उत्पादन को एक व्यावसायिक मॉडल के रूप में अपना रहे हैं।

किसान राममूर्ति का कहना है कि उत्पादित कोकून की बिक्री के लिए उन्हें किसी दूर स्थित मंडी या बाजार जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती। कोकून की उच्च मांग को देखते हुए व्यापारी सीधे उनके घर तक आते हैं और वहीं से सारा कोकून खरीद कर ले जाते हैं। इससे किसानों का समय, श्रम और माल ढुलाई का खर्च बच जाता है और घर बैठे ही नकद कमाई हो जाती है।

मौसम का असर और कीट पालन गृह में जरूरी सावधानियां

रेशम कीट बेहद नाजुक और संवेदनशील होते हैं, इसलिए उनके पालन के दौरान मौसम और पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। खासतौर पर बरसात के मौसम में कीट पालन गृह के भीतर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी जरूरी होती है। बारिश के दौरान हवा में अत्यधिक नमी, जलभराव और तापमान में अचानक आने वाले बदलाव कीटों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।

बरसात के दिनों में कीट पालन गृह के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए और हवा के निर्बाध आवागमन के लिए वेंटिलेशन का सही प्रबंध होना चाहिए। यदि पालन गृह में नमी की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो कीटों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां और रोग फैलने का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। वहीं दूसरी ओर, बहुत अधिक भीषण गर्मी का मौसम भी कीटों के समुचित विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए तापमान और आद्रता को नियंत्रित रखकर ही कीटों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

सवाल-जवाब

लखीमपुर खीरी में रेशम कीट पालन से किसान कैसे कमाई कर रहे हैं?
किसान शहतूत के पौधे लगाकर उनकी पत्तियों से रेशम कीट पालते हैं और तैयार कोकून को बाजार में बेचकर हर साल लाखों रुपये मुनाफा कमा रहे हैं।
बाजार में रेशम के कोकून की क्या कीमत मिल रही है?
वर्तमान में बाजार में कोकून की औसतन कीमत लगभग 400 रुपये प्रति किलो है, जो गुणवत्ता और मांग के आधार पर ऊपर-नीचे हो सकती है।
एक साल में रेशम कीट पालन कितनी बार किया जा सकता है?
रेशम कीट पालन का काम एक वर्ष में चार बार किया जा सकता है।
रेशम कीटों को पालने के लिए किस पौधे की आवश्यकता होती है?
रेशम कीटों के पालन के लिए शहतूत के पौधों की आवश्यकता होती है, जिनकी कोमल पत्तियां कीटों का मुख्य भोजन होती हैं।
बरसात के मौसम में रेशम कीट पालन के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं?
बरसात में कीट पालन गृह में जलजमाव न होने दें, वेंटिलेशन सही रखें और अत्यधिक नमी व तापमान के बदलाव से कीटों को बचाएं।
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