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पूर्णिया के डीएसपी अभिनव परासर ने तय किया किसान परिवार से प्रशासनिक सेवा तक का सफरसक्सेस स्टोरी
26 अक्तू॰ 2026, 1:59 am (2 घंटे पहले)· 2

पूर्णिया के डीएसपी अभिनव परासर ने तय किया किसान परिवार से प्रशासनिक सेवा तक का सफर

पूर्णिया के सदर एसडीपीओ अभिनव परासर ने साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हुए अपनी कड़ी मेहनत के दम पर बीपीएससी परीक्षा में 17वीं रैंक हासिल की और डीएसपी पद पर सफलता पाई।

बिहार के पूर्णिया जिले में सदर एसडीपीओ के पद पर तैनात अभिनव परासर की जीवन यात्रा उन तमाम युवाओं के लिए एक मजबूत मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखते हैं। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे अभिनव ने बिना किसी भारी भरकम संसाधनों के अपनी मेहनत और पक्के इरादे के बल पर लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शानदार सफलता अर्जित की। उनके पिता गांव में खेती-किसानी करते हैं और उनकी मां एक गृहिणी हैं। अभिनव का मानना है कि जीवन में चाहे कितनी भी बाधाएं क्यों न आएं, अगर दिशा सही हो और लगातार प्रयास किया जाए तो हर कठिन मंजिल को पाना मुमकिन हो जाता है। उनके इस सफर ने यह साबित कर दिया है कि सफलता का शॉर्टकट नहीं होता बल्कि निरंतरता ही असली ताकत है।

पश्चिम बंगाल में शिक्षा और बिहार में सेवा का संकल्प

अभिनव की शुरुआती और उच्च शिक्षा पश्चिम बंगाल के माहौल में पूरी हुई। उन्होंने कंप्यूटर साइंस विषय से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल में कुछ सिविल सेवा परीक्षाओं में भी सफलता प्राप्त की थी। हालांकि उनके मन में हमेशा से अपने गृह राज्य बिहार में रहकर ही लोगों की सेवा करने की इच्छा थी। अपनी तैयारी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी स्कूली शिक्षा भी बाकी आम बच्चों की तरह ही साधारण ढंग से चली थी। परीक्षा के पूरे पैटर्न को गहराई से समझने के बाद उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की सुनियोजित तैयारी शुरू की। इसी मजबूत रणनीति के बूते उन्होंने बीपीएससी दो हजार बाईस की परीक्षा में सत्रहवीं रैंक हासिल कर डीएसपी पद को प्राप्त किया।

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बड़े भाई की प्रेरणा और मार्गदर्शन

प्रशासनिक सेवा के क्षेत्र में कदम रखने के पीछे अभिनव अपने बड़े भाई के योगदान को सबसे अहम मानते हैं। उन्होंने साझा किया कि उनके बड़े भाई उन्हें हमेशा खाकी और यूनिफॉर्म वाली नौकरी के लिए प्रेरित करते रहते थे। भाई के बार-बार समझाने और प्रोत्साहन देने की वजह से ही उनके भीतर प्रशासनिक सेवा की तरफ जाने का विचार पक्का हुआ। अभिनव का यह भी कहना है कि किसी भी इंसान की कामयाबी में उसके परिवार का साथ होना सबसे बड़ी ताकत होती है। उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और पढ़ाई के माहौल में कोई कमी नहीं आने दी। परिवार की इस मजबूत भावनात्मक और नैतिक सपोर्ट के कारण ही वह अपने लक्ष्य से कभी भटके नहीं और पूरी ऊर्जा के साथ तैयारी में जुटे रहे।

प्रतिदिन आठ घंटे की पढ़ाई और दूसरों को पढ़ाने का तरीका

अपनी पढ़ाई की दिनचर्या के बारे में बात करते हुए अभिनव ने बताया कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी के दौरान रोजाना लगभग आठ घंटे नियमित रूप से पढ़ाई की। इसके अलावा उन्हें दूसरे लोगों को पढ़ाने और ज्ञान बांटने का भी काफी शौक था। इस शौक के चलते वह एक शिक्षण संस्थान में जाकर छात्रों को पढ़ाया भी करते थे। उनका पक्का विश्वास है कि जब आप किसी अन्य व्यक्ति को कोई विषय पढ़ाते हैं, तो आपकी अपनी समझ और ज्यादा पैनी हो जाती है। खुद पढ़ने के साथ-साथ दूसरों को पढ़ाने और पूरे पाठ्यक्रम का बार-बार रिवीजन करने की इस अनोखी प्रक्रिया से उन्हें अपनी मुख्य तैयारी में बहुत अधिक सहायता मिली। इसी अनुशासित अध्ययन शैली ने उन्हें परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के योग्य बनाया।

युवाओं के लिए सफलता का मूलमंत्र

आज की युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए अभिनव परासर ने कहा कि अकादमिक विषयों और पठन-पाठन में उनकी रुचि हमेशा से गहरी रही है। उन्होंने नौजवानों को सलाह दी कि कभी भी एक असफलता या हार मिलने के बाद अपने तय किए गए रास्ते को बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। उनका साफ तौर पर कहना है कि बार-बार मिलने वाली असफलताओं से घबराने के बजाय अपनी मेहनत को और अधिक तेज कर देना चाहिए। जो इंसान पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ लगातार कोशिश करता रहता है, उसे एक न एक दिन कामयाबी जरूर मिलती है। यही लगातार प्रयास, कभी न हार मानने का जज्बा और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण ही उनकी इस बड़ी सफलता का असली आधार बना है।

सवाल-जवाब

अभिनव परासर वर्तमान में किस पद पर तैनात हैं?
अभिनव परासर वर्तमान में पूर्णिया जिले में सदर एसडीपीओ यानी डीएसपी के पद पर तैनात हैं।
अभिनव परासर ने बीपीएससी परीक्षा में कौन सी रैंक हासिल की थी?
उन्होंने बीपीएससी 2022 की परीक्षा में 17वीं रैंक हासिल की थी।
अभिनव के माता-पिता क्या करते हैं?
उनके पिता गांव में एक सामान्य किसान हैं और उनकी मां एक गृहिणी हैं।
अभिनव ने अपनी स्कूली और उच्च शिक्षा कहां से पूरी की थी?
उन्होंने अपनी पढ़ाई पश्चिम बंगाल से पूरी की थी और कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की थी.
अभिनव अपनी सफलता का श्रेय किसे देते हैं?
वह अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग, अपनी लगातार मेहनत और बड़े भाई के मार्गदर्शन को देते हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·23 मिनट पहले

मुझे अपने गांव के वो दिन याद आ गए जब लालटेन की रोशनी में बैठकर बड़े भाई मुझे पढ़ने के लिए डांटते थे। अभिनव के बड़े भाई की बात पढ़कर सचमुच आंखें नम हो गईं। ऐसे संघर्ष से निकली सफलता ही असली प्रेरणा होती है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·42 मिनट पहले

किसान परिवार से निकलकर डीएसपी बनना वाकई बड़ी बात है। ऐसे युवाओं को देखकर बहुत प्रेरणा मिलती है।

Priya Sharma@priya-sharma·42 मिनट पहले

सही कहा उमर जी, किसान के बेटे का इस मुकाम तक पहुंचना साबित करता है कि संघर्ष और लगन से कुछ भी मुमकिन है।

Kavya Nair@kavya-nair·1 घंटे पहले

किसान परिवार से निकलकर डीएसपी बनना वाकई बड़ी बात है। ऐसे सफर में आर्थिक तंगी से कैसे पार पाया होगा?

Li Wei@li-wei·1 घंटे पहले

काव्य, सही कहा आपने! तंगी के बीच पढ़ाई जारी रखना और वो भी आठ घंटे रोज, सच में आसान नहीं रहा होगा।

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