फ्लिपकार्ट प्लस मेंबर्स को 1 अगस्त से मुफ्त मिलेगा नेटफ्लिक्स मोबाइल प्लान, जानें Rs 299 की शर्तराष्ट्रमंडल खेल 2026 में हर्ष सिंह ने जूडो में जीता स्वर्ण पदक, अमित शाह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी बधाईअमेरिका के खिलाफ सेमीफाइनल में हार के साथ भारतीय टीम ने जीता कांस्य पदकमानसून में अदरक की चाय या मसालेदार काढ़ा: जानिए सेहत की जरूरत के हिसाब से क्या पीना है सहीनीतीश तिवारी की ₹4,000 करोड़ की रामायण ट्रेलर पर राम, सीता और शूर्पणखा के लुक को लेकर मचा बवालमूलांक 4 अंक ज्योतिष 1 अगस्त 2026: राहु के प्रभाव में रिश्तों, करियर और आर्थिक फैसलों में रखें स्पष्टताअंक ज्योतिष मूलांक 5 राशिफल 1 अगस्त 2026: बुध के प्रभाव से निर्णय लेते समय सतर्कता और स्पष्ट संवाद जरूरीकर्नाटक के थिएटरों में विजय स्टारर जन नायकन का प्रदर्शन ठप, कावेरी मुद्दे पर विरोध के बाद हटे बैनरहरियाली तीज 2026: जानिए नवविवाहित बेटियों को मायके से सिंधारा भेजने का धार्मिक कारण और 15 अगस्त के व्रत का मुहूर्तमूलांक 3 अंक ज्योतिष 1 अगस्त 2026: संबंधों में समझ और कार्यक्षेत्र में रखें स्पष्टता, जानें राशिफल
कबाड़ बीनने वाले के बेटे सागर रेगर ने नीट में हासिल की 27157 ऑल इंडिया रैंक, बुआ की बेटी के कैंसर ने जगाया डॉक्टर बनने का जज़्बासक्सेस स्टोरी
31 जुल॰ 2026, 5:35 pm (11 घंटे पहले)· 2

कबाड़ बीनने वाले के बेटे सागर रेगर ने नीट में हासिल की 27157 ऑल इंडिया रैंक, बुआ की बेटी के कैंसर ने जगाया डॉक्टर बनने का जज़्बा

राजस्थान के कोटा जिले में कबाड़ एकत्र करने वाले के बेटे सागर रेगर ने नीट परीक्षा में 564 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 27157 हासिल की है। पारिवारिक त्रासदी के बाद उन्होंने समाज को जागरूक करने का लक्ष्य चुना।

राजस्थान के कोटा जिले में कैथून कस्बे के निकट स्थित गोदल्याहेडी गांव के निवासी सागर रेगर ने विषम परिस्थितियों और भारी आर्थिक अभावों के बावजूद राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में शानदार सफलता प्राप्त की है। घर-घर कबाड़ बीनकर परिवार चलाने वाले पिता के बेटे सागर ने नीट परीक्षा में 564 अंक अर्जित किए हैं। उन्होंने 98.6296 परसेन्टाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक (AIR) 27157 हासिल की है, जबकि अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में उनकी ऑल इंडिया रैंक 684 रही है। कैथून के सरकारी स्कूल में पढ़ाई करते हुए सागर ने 10वीं कक्षा में 76 प्रतिशत और 12वीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। उनकी इस बड़ी उपलब्धि से परिवार और पूरे गांव में खुशी का माहौल है।

पारिवारिक त्रासदी और डॉक्टर बनने का संकल्प

सागर की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा सामाजिक मकसद और पारिवारिक दर्द जुड़ा हुआ है। सागर का परिवार काफी बड़ा है और उसमें ज्यादातर सदस्य निरक्षर हैं। शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के अभाव के कारण परिवार के कई लोग नशे की आदतों में फंसे हुए हैं। जीवन का सबसे बड़ा दुखद मोड़ तब आया जब उनकी बुआ की बेटी को गुटखे के सेवन के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया। इस घटना ने सागर को भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने महसूस किया कि अज्ञानता और नशे के चंगुल से समाज को मुक्त कराने का सबसे प्रभावी जरिया शिक्षा ही है। इसी घटना से प्रेरणा लेकर उन्होंने डॉक्टर बनने का पक्का इरादा किया, ताकि वे भविष्य में मरीजों का इलाज करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को नशामुक्त जीवन और शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक कर सकें।

ये भी पढ़ें

आर्थिक तंगी और स्कूल प्रधानाचार्य का मार्गदर्शन

सागर के पिता मुरली रेगर कबाड़ इकट्ठा करके परिवार का लालन-पालन करते हैं। उनकी मां एक गृहिणी हैं, जिन्होंने 8वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और वे पिता के लाए कबाड़ में से स्क्रैप अलग करने के काम में मदद करती हैं। पूरा परिवार केवल दो कमरों के छोटे से घर में रहता है। सागर की दो छोटी बहने हैं, जिनमें से बड़ी बहन मानसी 12वीं कक्षा में जीव विज्ञान विषय से पढ़ रही है, जबकि सबसे छोटी बहन इशिका 10वीं कक्षा की छात्रा है। पिता मुरली रेगर ने बताया कि सागर का हमेशा से डॉक्टर बनने का सपना था, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते वे निजी कोचिंग संस्थान की फीस भरने में पूरी तरह असमर्थ थे। इस मुश्किल मोड़ पर राजकीय विद्यालय कैथून के प्रधानाचार्य ने सागर का मार्गदर्शन किया और उन्हें एलन शिक्षा संबल योजना की जानकारी देकर प्रवेश परीक्षा देने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुफ्त कोचिंग, आवास और सामाजिक परिवर्तन की सोच

चयन परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सागर का जीवन बदल गया। एलन शिक्षा संबल योजना के माध्यम से उन्हें कोटा में नीट परीक्षा की पूरी तरह निशुल्क कोचिंग मिली। इसके अतिरिक्त एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास की ओर से उनके कोटा में रहने और भोजन की मुफ्त व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। सागर का कहना है कि यदि उन्हें यह संबल न मिलता, तो आर्थिक तंगी के कारण नीट की तैयारी छोड़कर किसी सामान्य कॉलेज में बीएससी में दाखिला लेना पड़ता। हालांकि उनके पिता निरक्षर हैं और मां 8वीं पास हैं, लेकिन दोनों ने शिक्षा का महत्व समझते हुए हमेशा बेटे का हौसला बढ़ाया। इस संबंध में एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास के ट्रस्टी और एलन के संस्थापक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि सरकारी स्कूलों के हिंदी माध्यम के मेधावी बच्चों को आगे लाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम संचालित किया जाता है, जिससे सफल होकर ये छात्र पूरे समाज में बदलाव ला सकें।

सवाल-जवाब

सागर रेगर ने नीट परीक्षा में कितना स्कोर और कौन सी रैंक हासिल की?
सागर रेगर ने नीट में 564 अंक प्राप्त किए और 98.6296 परसेन्टाइल हासिल किया। उनकी ऑल इंडिया रैंक 27157 और एससी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 684 रही।
सागर को डॉक्टर बनने की प्रेरणा किस घटना से मिली?
गुटखा सेवन के कारण उनकी बुआ की बेटी को कैंसर हो गया था। इस पारिवारिक घटना ने सागर को deeply प्रभावित किया और उन्होंने समाज को जागरूक करने के लिए डॉक्टर बनने का संकल्प लिया।
सागर रेगर के परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी है?
उनके पिता मुरली रेगर घर-घर से कबाड़ बिनने का काम करते हैं और मां कबाड़ से स्क्रैप अलग करने में मदद करती हैं। परिवार केवल दो कमरों के छोटे मकान में रहता है।
सागर को नीट की तैयारी के लिए किस संस्था से सहायता मिली?
उन्हें एलन शिक्षा संबल योजना के तहत मुफ्त नीट कोचिंग मिली, जबकि एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास ने कोटा में उनके रहने और खाने का नि:शुल्क प्रबंध किया।
यदि नि:शुल्क कोचिंग न मिलती तो सागर की क्या योजना थी?
सागर के अनुसार यदि उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलता, तो परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें किसी कॉलेज में सामान्य बीएससी कोर्स में दाखिला लेना पड़ता।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR