राजस्थान के कोटा जिले में कैथून कस्बे के निकट स्थित गोदल्याहेडी गांव के निवासी सागर रेगर ने विषम परिस्थितियों और भारी आर्थिक अभावों के बावजूद राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में शानदार सफलता प्राप्त की है। घर-घर कबाड़ बीनकर परिवार चलाने वाले पिता के बेटे सागर ने नीट परीक्षा में 564 अंक अर्जित किए हैं। उन्होंने 98.6296 परसेन्टाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक (AIR) 27157 हासिल की है, जबकि अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में उनकी ऑल इंडिया रैंक 684 रही है। कैथून के सरकारी स्कूल में पढ़ाई करते हुए सागर ने 10वीं कक्षा में 76 प्रतिशत और 12वीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। उनकी इस बड़ी उपलब्धि से परिवार और पूरे गांव में खुशी का माहौल है।
पारिवारिक त्रासदी और डॉक्टर बनने का संकल्प
सागर की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा सामाजिक मकसद और पारिवारिक दर्द जुड़ा हुआ है। सागर का परिवार काफी बड़ा है और उसमें ज्यादातर सदस्य निरक्षर हैं। शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के अभाव के कारण परिवार के कई लोग नशे की आदतों में फंसे हुए हैं। जीवन का सबसे बड़ा दुखद मोड़ तब आया जब उनकी बुआ की बेटी को गुटखे के सेवन के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया। इस घटना ने सागर को भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने महसूस किया कि अज्ञानता और नशे के चंगुल से समाज को मुक्त कराने का सबसे प्रभावी जरिया शिक्षा ही है। इसी घटना से प्रेरणा लेकर उन्होंने डॉक्टर बनने का पक्का इरादा किया, ताकि वे भविष्य में मरीजों का इलाज करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को नशामुक्त जीवन और शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक कर सकें।
आर्थिक तंगी और स्कूल प्रधानाचार्य का मार्गदर्शन
सागर के पिता मुरली रेगर कबाड़ इकट्ठा करके परिवार का लालन-पालन करते हैं। उनकी मां एक गृहिणी हैं, जिन्होंने 8वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और वे पिता के लाए कबाड़ में से स्क्रैप अलग करने के काम में मदद करती हैं। पूरा परिवार केवल दो कमरों के छोटे से घर में रहता है। सागर की दो छोटी बहने हैं, जिनमें से बड़ी बहन मानसी 12वीं कक्षा में जीव विज्ञान विषय से पढ़ रही है, जबकि सबसे छोटी बहन इशिका 10वीं कक्षा की छात्रा है। पिता मुरली रेगर ने बताया कि सागर का हमेशा से डॉक्टर बनने का सपना था, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते वे निजी कोचिंग संस्थान की फीस भरने में पूरी तरह असमर्थ थे। इस मुश्किल मोड़ पर राजकीय विद्यालय कैथून के प्रधानाचार्य ने सागर का मार्गदर्शन किया और उन्हें एलन शिक्षा संबल योजना की जानकारी देकर प्रवेश परीक्षा देने के लिए प्रोत्साहित किया।
मुफ्त कोचिंग, आवास और सामाजिक परिवर्तन की सोच
चयन परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सागर का जीवन बदल गया। एलन शिक्षा संबल योजना के माध्यम से उन्हें कोटा में नीट परीक्षा की पूरी तरह निशुल्क कोचिंग मिली। इसके अतिरिक्त एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास की ओर से उनके कोटा में रहने और भोजन की मुफ्त व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। सागर का कहना है कि यदि उन्हें यह संबल न मिलता, तो आर्थिक तंगी के कारण नीट की तैयारी छोड़कर किसी सामान्य कॉलेज में बीएससी में दाखिला लेना पड़ता। हालांकि उनके पिता निरक्षर हैं और मां 8वीं पास हैं, लेकिन दोनों ने शिक्षा का महत्व समझते हुए हमेशा बेटे का हौसला बढ़ाया। इस संबंध में एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास के ट्रस्टी और एलन के संस्थापक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि सरकारी स्कूलों के हिंदी माध्यम के मेधावी बच्चों को आगे लाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम संचालित किया जाता है, जिससे सफल होकर ये छात्र पूरे समाज में बदलाव ला सकें।



















