कोटा में हर साल हजारों बच्चे जेईई की तैयारी करने आते हैं, लेकिन सीतामढ़ी, बिहार के गुंजन कुमार की कहानी बाकी सबसे अलग है। जब बीमारी ने उसे बिस्तर तक सीमित कर दिया, तो मां गुंजा खुद क्लासमेट बन गईं, ऑनलाइन क्लास देखकर नोट्स बनाए और बेटे को जेईई एडवांस्ड पास कराने में जुट गईं। नतीजा सामने है, गुंजन अब आईआईटी दिल्ली की कम्प्यूटर साइंस ब्रांच में दाखिला लेने जा रहा है।
बीमारी ने खड़ी की सबसे बड़ी चुनौती
गुंजन दो साल से कोटा में रहकर एलन करियर इंस्टीट्यूट से जेईई की तैयारी कर रहा था। परीक्षा से ठीक पहले उसकी तबीयत बिगड़ गई। 5 अक्टूबर 2025 को उसने इंस्टीट्यूट में रूटीन टेस्ट दिया और अगले ही दिन उसे सीने में तेज दर्द होने लगा। डॉक्टर को दिखाने पर पता चला कि भारी सामान उठाने की वजह से उसके बाएं फेफड़े पर दबाव पड़ा और फेफड़ा कोलैप्स हो गया, जिसे न्यूमोथोरेक्स कहा जाता है। इसके बाद गुंजन करीब तीन महीने तक पूरी तरह बेड रेस्ट पर रहा और क्लास तक अटेंड नहीं कर सका।
मां जब बनी सहपाठी
बेटे की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए मां गुंजा सक्रिय हो गईं। उन्होंने गुंजन को ऑनलाइन वीडियो दिखाए और खुद भी वे क्लास देखकर नोट्स बनाने लगीं। गुंजा गृहिणी हैं और उन्होंने बीएड की पढ़ाई कर रखी है। वे खुद कोटा में बेटे के साथ रहीं और बरसों बाद एक बार फिर किताबों में लौट आईं। बाद में यही नोट्स गुंजन के लिए बेहद काम आए और परीक्षा से पहले उसकी तैयारी मजबूत करने में मददगार साबित हुए।
कमजोर आंखों के साथ बड़े सपने
गुंजन की आंखें कमजोर हैं, उसकी 70 प्रतिशत से ज्यादा आई-साइट वीक है और उसे 9.5 नंबर का चश्मा लगा हुआ है। इसके बावजूद उसने कभी अपनी कमजोरी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। उसने 10वीं कक्षा 82.5 प्रतिशत अंकों से और 12वीं कक्षा 70 प्रतिशत अंकों से पास की। कोटा आने से पहले उसने खुद सर्च किया कि जेईई की तैयारी के लिए कौन-सी कोचिंग सही रहेगी। इसी दौरान उसने साल 2021 में जेईई मेन और एडवांस्ड के ऑल इंडिया टॉपर रहे एलन के स्टूडेंट मृदुल अग्रवाल का वीडियो देखा। उनकी सफलता से प्रभावित होकर गुंजन ने भी कोटा जाने की ठान ली और अपने माता-पिता से जिद करके 2023 में कोटा पहुंच गया।
नतीजा और आगे का रास्ता
गुंजन ने जेईई मेन में 91.8 पर्सेंटाइल स्कोर हासिल किया। जेईई एडवांस्ड में उसकी पीडब्ल्यूडी ओबीसी कैटेगरी रैंक 50 रही, जबकि कॉमन रैंक पीडब्ल्यूडी 120 है। अब वह आईआईटी दिल्ली की कम्प्यूटर साइंस ब्रांच में एडमिशन लेकर आईआईटीयन बनने का अपना सपना साकार करने जा रहा है। उसके पिता राजनारायण प्रसाद बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन में इंजीनियर हैं। गुंजन का छोटा भाई भी फिलहाल कोटा में रहकर जेईई की तैयारी कर रहा है।
बेटे और मां के शब्दों में
रिजल्ट आने के बाद गुंजन ने कहा कि परिस्थितियां हमेशा हमारे साथ नहीं होतीं, परीक्षा सिर्फ पढ़ाई की नहीं बल्कि हौसले की भी परीक्षा होती है। उसने कहा कि बीमार होने पर मां ने जो सपोर्ट किया, वह परीक्षा से पहले बहुत काम आया और फैकल्टीज के मार्गदर्शन से ही वह सफल हो सका। उसका मानना है कि स्टूडेंट्स को हमेशा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
गुंजन की मां गुंजा कहती हैं कि बेटे का सपना ही उनका सपना है। जब गुंजन बीमार हुआ तो वे भी चिंतित हो गई थीं, लेकिन इसके बाद दोनों ने साथ बैठकर वीडियो देखे और उन्होंने नोट्स बनाए। बाद में जब यही नोट्स बेटे के काम आए तो उन्हें बहुत खुशी हुई। उनका कहना है कि कोटा सिर्फ स्टूडेंट्स के लिए नहीं बल्कि पेरेंट्स के लिए भी असली मोटिवेशन है। यह शहर सिर्फ परीक्षा पास कराने के लिए नहीं पढ़ाता, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाना और चुनौतियों का सामना करना भी सिखाता है।













