बिहार के समस्तीपुर जिले के एक छोटे से गांव विभूतिपुर का नाम इन दिनों एक ऐसी कहानी की वजह से चर्चा में है, जो बताती है कि इरादे अगर पक्के हों तो शरीर की कमजोरी रास्ते की दीवार नहीं बन सकती। यहां के रहने वाले सावन कुमार ने देश की सबसे मुश्किल इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक, JEE Advanced को पास कर यह साबित कर दिखाया है।
दो साल की उम्र में पोलियो, फिर भी नहीं रुके कदम
सावन सिर्फ दो साल के थे, जब उन्हें पोलियो ने जकड़ लिया। इस बीमारी ने उनके दोनों पैरों को करीब 70 प्रतिशत लोकोमोटर डिसएबिलिटी से प्रभावित कर दिया। लेकिन सावन ने इस शारीरिक चुनौती को कभी अपनी कमजोरी नहीं माना। उन्होंने इसे ही अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया और पढ़ाई में लगातार आगे बढ़ते रहे।
खेत से निकली पढ़ाई की राह
सावन एक बेहद साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता प्रभु राय के पास इतनी जमीन भी नहीं है कि परिवार का खर्च आराम से चल सके, इसलिए वे बंटाई पर खेती कर किसी तरह घर चलाते हैं। आर्थिक तंगी और शारीरिक दिक्कतों के बीच बीते बचपन में भी सावन का हौसला कभी कमजोर नहीं पड़ा। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही एक सरकारी स्कूल से पूरी की।
सिमुलतला से शुरू हुआ कमाल
बचपन से ही पढ़ाई में तेज सावन ने अपनी प्रतिभा के बल पर बिहार के मशहूर सिमुलतला आवासीय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास की और वहां उन्हें निशुल्क शिक्षा का मौका मिला। अपनी काबिलियत का असली परिचय उन्होंने तब दिया, जब 10वीं की बोर्ड परीक्षा में पूरे बिहार की मेरिट सूची में उन्हें 10वां स्थान मिला। यहीं से उनके मन में देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थान IIT तक पहुंचने का सपना पनपा, और इसी सपने को पूरा करने के लिए वे राजस्थान के कोचिंग हब कोटा पहुंचे।
प्रतिभा देखकर मिली 80 प्रतिशत स्कॉलरशिप
कोटा के एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान ने जब सावन की प्रतिभा और जज्बे को देखा, तो आगे बढ़कर उनकी मदद की और उन्हें 80 प्रतिशत की स्कॉलरशिप दी। इसके बाद सावन ने दिन-रात एक कर दिया और तैयारी में पूरी ताकत झोंक दी।
नतीजों ने कह दी मेहनत की पूरी कहानी
सावन की लगन और अटूट समर्पण का नतीजा आज सबके सामने है। उन्होंने JEE Main में 99.14 पर्सेंटाइल हासिल कर अपनी मजबूत तैयारी का सबूत दिया। इसके बाद JEE Advanced में ओपन कैटेगरी के तहत उन्हें 17,532वीं रैंक मिली। PWD कैटेगरी में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 22 हासिल की, जो उनकी असाधारण उपलब्धि को बयां करती है। इतना ही नहीं, OBC-NCL PWD श्रेणी में पूरे देश में उन्हें 9वीं रैंक मिली, जिसने उनके परिवार, शिक्षकों और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया।
शारीरिक चुनौतियाँ केवल शरीर को बांध सकती हैं, आपके सपनों और विचारों को नहीं। – सावन कुमार
अब IIT में नई उड़ान की तैयारी
सावन की यह कामयाबी सिर्फ उनके परिवार के लिए गर्व का पल नहीं है, बल्कि उन लाखों छात्र-छात्राओं के लिए भी प्रेरणा है जो मुश्किल हालात में अपने सपने छोड़ देते हैं। अब सावन IIT में पढ़कर देश और अपने परिवार का नाम रोशन करने के साथ अपने सपनों को नई उड़ान देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।













