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रिश्तेदारों के शादी वाले तानों को दरकिनार कर हर्षिता पांडे बनीं सरकारी लेखा परीक्षकसक्सेस स्टोरी
30 अक्तू॰ 2026, 8:05 pm (9 मिनट पहले)· 0

रिश्तेदारों के शादी वाले तानों को दरकिनार कर हर्षिता पांडे बनीं सरकारी लेखा परीक्षक

डेढ़ साल के लंबे इंतजार और समाज के दबाव के बीच हर्षिता पांडे ने बिना महंगी कोचिंग के यूट्यूब से पढ़ाई कर लेखा परीक्षक पद पर सफलता हासिल की। पिता के अटूट विश्वास ने उनके हौसले को बनाए रखा।

सरकारी नौकरी की राह में अक्सर लंबे इंतजार और सामाजिक दबाव की दोहरी चुनौती सामने आती है, जिससे कई अभ्यर्थी विचलित हो जाते हैं। हर्षिता पांडे ने इन दोनों बाधाओं का डटकर मुकाबला किया और आखिरकार लेखा परीक्षक के पद पर चयनित होकर अपनी मेहनत का लोहा मनवाया। अगस्त 2023 में जब इस पद के लिए रिक्तियां जारी हुई थीं, तब उन्होंने तुरंत अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। उस समय उन्हें लगा था कि परीक्षा प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी, लेकिन चयन प्रक्रिया लगातार लंबी खिंचती चली गई। आखिरकार जनवरी 2025 में जाकर यह परीक्षा आयोजित की जा सकी। इस पूरे दौर में, यानी लगभग डेढ़ साल तक, उन्होंने अपनी एकाग्रता को टूटने नहीं दिया और अपने तय लक्ष्य पर टिकी रहीं।

लंबे खिंचते इंतजार के बीच लक्ष्य पर अडिग रहने का फैसला

परीक्षा की तारीखों में निरंतर हो रहे विलंब के कारण कई बार निराशा स्वाभाविक थी। हर्षिता के मन में भी कई मौकों पर यह विचार कौंधा कि अनिश्चितता को देखते हुए किसी दूसरे विकल्प या अन्य परीक्षा की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। इसके बावजूद, उन्होंने अपने मूल निश्चय को कमजोर नहीं पड़ने दिया और भ्रम की स्थिति से खुद को दूर रखा। जैसे ही परीक्षा की अंतिम तिथि नजदीक आई, उन्होंने परीक्षा से ठीक एक महीना पहले अपनी अध्ययन शैली को और तेज कर दिया। बचे हुए समय के हर एक घंटे का सुनियोजित उपयोग करते हुए उन्होंने पाठ्यक्रम के हर हिस्से को गहराई से दोहराया।

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महंगी कोचिंग के विकल्प के तौर पर चुना इंटरनेट का रास्ता

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आम तौर पर लाखों रुपये की फीस वाले संस्थानों का रुख किया जाता है, लेकिन हर्षिता ने बिल्कुल अलग मार्ग चुना। उन्होंने किसी भी महंगी पेड कोचिंग क्लास में दाखिला नहीं लिया। इसके स्थान पर उन्होंने इंटरनेट, यूट्यूब के मुफ्त वीडियो और उपलब्ध ऑनलाइन अध्ययन सामग्री को अपना मुख्य आधार बनाया। उन्होंने अलग-अलग विषयों की जरूरतों को बारीकी से समझा और उसी के अनुसार अपने लिए उपयुक्त ऑनलाइन लेक्चर्स का चयन किया। इस डिजिटल सामग्री के माध्यम से उन्होंने बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के अपनी नियमित पढ़ाई जारी रखी।

ऑनलाइन मंचों और शिक्षकों से मजबूत किए कॉन्सेप्ट

अपनी विषयवार तैयारी के लिए हर्षिता ने ऑनलाइन शिक्षकों की विशेषज्ञता का पूरा लाभ उठाया। उन्होंने परीक्षा की सामान्य और समग्र समझ विकसित करने के लिए रोजगार विद अंकित के वीडियो से मार्गदर्शन लिया। वहीं, कंप्यूटर से जुड़े तकनीकी प्रश्नों और पाठ्यक्रम की तैयारी के लिए धीरेंद्र सर के वीडियो लेक्चर्स का अध्ययन किया। वित्तीय और लेखा संबंधी कॉन्सेप्ट्स की स्पष्टता के लिए उन्होंने सीए सौरभ के विश्लेषणात्मक वीडियो की मदद ली। इन सभी संसाधनों को उन्होंने अपनी व्यक्तिगत अध्ययन आवश्यकताओं के अनुसार ढाला और लगातार अभ्यास किया।

सामाजिक तानों के बीच पिता बने सबसे बड़ा संबल

डेढ़ साल के इस लंबे सफर में सबसे कठिन चुनौती पढ़ाई से ज्यादा सामाजिक दबाव का सामना करना था। तैयारी के दौरान रिश्तेदारों और आसपास के लोगों ने अक्सर उनकी उम्र का हवाला देकर शादी कर देने के ताने दिए। ऐसे समय में जब समाज की टिप्पणियां मनोबल तोड़ सकती थीं, तब हर्षिता के पिता चट्टान की तरह उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने रिश्तेदारों के नकारात्मक सवालों की कतई परवाह नहीं की और अपनी बेटी की मेहनत तथा उसकी क्षमता पर पूरा भरोसा बनाए रखा। पिता के इस अटूट विश्वास ने हर्षिता को हर प्रतिकूल परिस्थिति से लड़ने की हिम्मत दी।

सफलता से साबित हुआ पिता का अटूट विश्वास

जब परीक्षा परिणाम आया और लेखा परीक्षक के रूप में चयन हुआ, तो यह हर्षिता के लिए केवल एक सरकारी पद पाने की व्यक्तिगत खुशी नहीं थी। यह उपलब्धि उनके पिता के अटूट विश्वास की विजय थी, जिसे उन्होंने समाज के सामने सच साबित कर दिखाया। हर्षिता का अनुभव बताता है कि लोगों की नकारात्मक बातें अभ्यर्थी को कमजोर करने के बजाय आगे बढ़ने की एक बड़ी प्रेरणा भी बन सकती हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि अगर अभ्यर्थी दूसरों के सवालों और तानों में उलझने के बजाय अपनी संपूर्ण ऊर्जा लक्ष्य पर केंद्रित रखे, तो सफलता जरूर मिलती है।

सवाल-जवाब

हर्षिता पांडे किस सरकारी पद के लिए चुनी गई हैं?
हर्षिता पांडे का चयन सरकारी लेखा परीक्षक के पद पर हुआ है।
उन्होंने परीक्षा की तैयारी कब शुरू की थी और परीक्षा कब आयोजित हुई?
उन्होंने अगस्त 2023 में वैकेंसी आने के बाद तैयारी शुरू की थी और परीक्षा जनवरी 2025 में हुई।
क्या उन्होंने तैयारी के लिए किसी महंगी कोचिंग की मदद ली?
नहीं, उन्होंने किसी महंगी पेड कोचिंग के बजाय यूट्यूब वीडियो, इंटरनेट और ऑनलाइन स्टडी मटेरियल से पढ़ाई की।
ऑनलाइन तैयारी के लिए उन्होंने किन शिक्षकों और चैनलों की मदद ली?
उन्होंने रोजगार विद अंकित के वीडियो, कंप्यूटर के लिए धीरेंद्र सर और कॉन्सेप्ट्स के लिए सीए सौरभ के लेक्चर्स की मदद ली।
तैयारी के दौरान उन्हें किस सामाजिक चुनौती का सामना करना पड़ा?
रिश्तेदार उनकी उम्र का हवाला देकर शादी कर देने के ताने देते रहे, लेकिन उनके पिता ने उनका पूरा समर्थन किया।
परीक्षा से ठीक पहले उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति कैसे बदली?
परीक्षा से करीब एक महीने पहले उन्होंने पढ़ाई पर अतिरिक्त ध्यान दिया और बचे हुए समय का पूरा इस्तेमाल रिवीजन में किया।
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