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पलामू की रीना देवी ने पारंपरिक खेती छोड़ अपनाया पपीता, पांच कट्ठा जमीन से 30 हजार रुपये तक अतिरिक्त कमाई का बनाया मॉडलसक्सेस स्टोरी
26 अग॰ 2026, 8:29 am (2 घंटे पहले)· 2

पलामू की रीना देवी ने पारंपरिक खेती छोड़ अपनाया पपीता, पांच कट्ठा जमीन से 30 हजार रुपये तक अतिरिक्त कमाई का बनाया मॉडल

पलामू की महिला किसान रीना देवी ने पारंपरिक खेती के साथ पांच कट्ठा जमीन में पपीते की खेती शुरू कर अतिरिक्त आमदनी का नया रास्ता तैयार किया है।

झारखंड के पलामू जिले की महिला किसान रीना देवी ने पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़ते हुए अपनी कृषि पद्धतियों में एक नया मोड़ दिया है। केवल गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने पपीते की खेती शुरू की है। छोटे भूखंड से नियमित और मोटी कमाई हासिल करने के उद्देश्य से की गई यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। रीना देवी का स्पष्ट मानना है कि यदि खेती में फलदार फसलों को शामिल किया जाए, तो कृषि को एक अधिक लाभदायक व्यवसाय में बदला जा सकता है।

कृषि विज्ञान केंद्र से तकनीकी मार्गदर्शन और फसल का चुनाव

अपनी नई योजना को धरातल पर उतारने से पहले रीना देवी ने संस्थागत मार्गदर्शन प्राप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, चियांकी के विशेषज्ञों से संपर्क किया और पपीते की उन्नत खेती से जुड़ी बारीकियों और वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्होंने अपने पांच कट्ठा खेत में पपीते के पौधे लगाने की शुरुआत की।

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फसल के रूप में पपीते को चुनने के पीछे कई व्यावहारिक कारण रहे हैं। पपीता कम समय में तैयार होने वाली फलदार फसलों की श्रेणी में आता है। इसकी खेती में पौधे लगाने के बाद फसल चक्र अपेक्षाकृत जल्दी शुरू होता है। इसके अतिरिक्त स्थानीय बाजारों में पूरे साल पपीते की निरंतर मांग बनी रहती है, जिससे उपज तैयार होते ही बिक्री में कोई असुविधा नहीं आती।

पाँच कट्ठा ज़मीन से कमाई का सटीक गणित

रीना देवी ने अपने पांच कट्ठा खेत से होने वाली संभावित उपज और वित्तीय लाभ का एक व्यावहारिक गणित तैयार किया है। पपीते के पौधों से एक बार में पांच क्विंटल से अधिक फल की पैदावार प्राप्त की जा सकती है। स्थानीय मंडी में यदि पपीता औसतन 50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिकता है, तो पांच क्विंटल की बिक्री से सीधे 25 हजार रुपये की आय अर्जित होती है।

बाजार की स्थिति बेहतर होने और थोक या खुदरा भाव में बढ़ोतरी मिलने पर यही आमदनी बढ़कर 30 हजार रुपये या उससे भी अधिक तक पहुंच सकती है। रीना देवी ने बताया, "पारंपरिक खेती के साथ फलदार फसलें उगाने से किसानों को नियमित और अतिरिक्त आमदनी का एक पक्का साधन मिल जाता है।" चूंकि पपीते का पौधा लगातार फल देता रहता है, इसलिए यह किसानों के पास पूरे सीजन में नकद आय प्रवाह बनाए रखता है।

व्यावसायिक खेती और जलवायु आधारित फसल चयन

रीना देवी की यह पहल कृषि विशेषज्ञों की उस सलाह के अनुकूल है, जिसमें स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के आधार पर फसल चुनने की बात कही जाती है। केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित रहने से किसानों की आय एक सीमा पर थम जाती है। इसके विपरीत जब खेत में फल, सब्जियां और अन्य नकदी फसलें शामिल की जाती हैं, तो जोखिम कम होता है और लाभ का दायरा बढ़ जाता है।

पलामू के मौसम और मिट्टी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पपीते की खेती एक आदर्श विकल्प साबित हो रही है। रीना देवी का यह प्रयास साबित करता है कि छोटी जोत वाले किसान भी सही नियोजन और तकनीकी जानकारी के बल पर अपनी कृषि आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

रीना देवी कौन हैं और वह कहां की रहने वाली हैं?
रीना देवी झारखंड के पलामू जिले की एक महिला किसान हैं, जो पारंपरिक खेती के साथ पपीते की व्यावसायिक खेती कर रही हैं।
रीना देवी ने पपीते की खेती की तकनीकी जानकारी कहां से प्राप्त की?
उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, चियांकी के कृषि विशेषज्ञों से पपीते की वैज्ञानिक खेती और रखरखाव की तकनीकी जानकारी हासिल की।
रीना देवी कितने क्षेत्र में पपीते की खेती कर रही हैं?
उन्होंने लगभग पांच कट्ठा जमीन में पपीते के पौधे लगाकर इस खेती की शुरुआत की है।
पांच कट्ठा खेत से एक बार में कितना पपीता उत्पादित हो सकता है?
रीना देवी के अनुसार पांच कट्ठा जमीन में लगाए गए पपीते के पौधों से एक बार में पांच क्विंटल से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
पपीते की खेती से कितनी आमदनी होने का अनुमान है?
यदि बाजार में 50 रुपये प्रति किलो का औसत भाव मिलता है, तो पांच क्विंटल पपीते से 25 हजार रुपये की आय होगी, जो बेहतर बाजार भाव पर 30 हजार रुपये या उससे अधिक भी हो सकती है।
कृषि विशेषज्ञ किसानों को क्या सलाह देते हैं?
कृषि विशेषज्ञ किसानों को स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुरूप फसलों का चयन करने तथा अनाज के साथ फल-सब्जियों की खेती करने की सलाह देते हैं।
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