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शादी के बाद नौकरी छोड़ पटना की स्नेहा ने शुरू किया चिकनकारी का काम, लखनऊ से लाकर तैयार किया खास कलेक्शनसक्सेस स्टोरी
31 अक्तू॰ 2026, 12:28 pm (8 मिनट पहले)· 0

शादी के बाद नौकरी छोड़ पटना की स्नेहा ने शुरू किया चिकनकारी का काम, लखनऊ से लाकर तैयार किया खास कलेक्शन

पटना की स्नेहा ने शादी के बाद अपनी नौकरी छोड़कर हाउस ऑफ थ्रेड नाम से प्रामाणिक हस्तनिर्मित चिकनकारी का उद्यम स्थापित किया है। महज छह महीनों में 50 पीस से शुरू हुआ उनका सफर ज्ञान भवन प्रदर्शनी तक पहुंच चुका है।

पारंपरिक परिधानों के प्रति गहरा लगाव जब एक सुदृढ़ कारोबारी दृष्टिकोण में बदल जाए, तो उद्यमिता की एक नई मिसाल तैयार होती है। बिहार की राजधानी पटना की निवासी स्नेहा ने पारंपरिक चिकनकारी परिधान पहनने के अपने निजी शौक को एक सफल और व्यवस्थित व्यवसाय का रूप दे दिया है। वैवाहिक जीवन की शुरुआत के बाद उन्होंने अपनी पुरानी नौकरी को अलविदा कहने का फैसला किया। इसके बाद फैशन और प्रामाणिक हस्तशिल्प के क्षेत्र में कदम रखते हुए उन्होंने हाउस ऑफ थ्रेड नाम से अपने नए उद्यम की नींव रखी।

लखनऊ के कारीगरों से सीधे जुड़ाव और हस्तनिर्मित कपड़ों का चयन

स्नेहा के इस व्यावसायिक प्रयास को आरंभ हुए अभी केवल छह महीने का समय बीता है, लेकिन इतने कम समय में ही उन्होंने स्थानीय बाजार में अपनी एक मजबूत उपस्थिति दर्ज करा ली है। उनके पूरे संग्रह की सबसे अहम विशेषता यह है कि इसमें शामिल कोई भी परिधान मशीनों से तैयार नहीं किया जाता। सभी कपड़े कुशल कारीगरों द्वारा सुई और धागे से हाथों द्वारा बुने जाते हैं। परिधानों की प्रमाणिकता और कारीगरी की उच्च गुणवत्ता बनाए रखने के लिए स्नेहा स्वयं उत्तर प्रदेश के लखनऊ जाती हैं। वहां के बुनकरों और कारीगरों से मिलकर वह प्रत्येक पैटर्न और डिजाइन को अपनी निगरानी में परखती हैं और फिर उन्हें पटना के ग्राहकों के लिए लेकर आती हैं।

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कुर्तियों से लेकर पार्टी वियर तक की विस्तृत श्रृंखला

हाउस ऑफ थ्रेड में चिकनकारी के कद्रदानों के लिए विभिन्न प्रकार के परिधानों की एक विस्तृत शृंखला उपलब्ध कराई गई है। संग्रह में साधारण कुर्तियों से लेकर आधुनिक स्टाइल के कॉर्ड सेट, थ्री पीस सूट सेट और पारंपरिक मुकेश वर्क वाले पार्टी वियर वस्त्र शामिल हैं। स्नेहा का मुख्य ध्यान कपड़ों के कपड़े और उन पर की गई कढ़ाई के स्तर पर रहता है, जिसमें वह किसी भी स्तर पर गुणवत्ता में ढिलाई नहीं बरततीं। व्यक्तिगत रूप से हर डिजाइन को चुनने के पीछे उनकी यही सोच काम करती है कि ग्राहकों को पारंपरिक शिल्प का सर्वोत्तम रूप मिले।

मूल्य निर्धारण के मामले में भी विविधता रखी गई है। यहां उपलब्ध कपड़ों की शुरुआती कीमत 1,000 रुपये है, जो कारीगरी की जटिलता के आधार पर 5,000 रुपये से लेकर 6,000 रुपये तक जाती है। परिधान की अंतिम कीमत कपड़े के रेशे, डिजाइन के विस्तार और उस पर हस्तकला में लगे समय के अनुसार तय होती है। इसके अलावा शादी-विवाह के आयोजनों और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के मद्देनजर विशेष रूप से तैयार किए गए पार्टी वियर के कई आकर्षक विकल्प भी तैयार रखे गए हैं।

50 वस्त्रों से आरंभ हुआ सफर और ज्ञान भवन प्रदर्शनी की सफलता

अपने उद्यम की शुरुआत स्नेहा ने बहुत ही सीमित संसाधनों के साथ की थी। पहले चरण में उन्होंने मात्र 50 पीस मंगवाकर इस काम की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में गुणवत्ता पसंद करने वाले ग्राहकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, जिससे उनका उत्साह बढ़ा और धीरे-धीरे स्टॉक का दायरा भी विस्तृत होता गया। पटना के प्रतिष्ठित ज्ञान भवन में आयोजित प्रदर्शनी में भी स्नेहा ने अपने उत्पादों का स्टॉल लगाया, जहां आगंतुकों ने उनके हस्तनिर्मित काम को खूब सराहा।

स्नेहा का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि हाथ से बनाए गए वस्त्रों का आकर्षण मशीन से बने कपड़ों से बिल्कुल अलग और श्रेष्ठ होता है। मशीनें भले ही तेजी से कपड़े तैयार कर दें, लेकिन जो बारीकी, नफासत और कलात्मक गहराई हाथों के काम में दिखती है, वह बेजोड़ होती है। इसी प्रतिबद्धता के तहत वह अपने ब्रांड के तहत केवल और केवल पूरी तरह हस्तनिर्मित वस्त्रों को ही शामिल करती हैं।

पारिवारिक प्रोत्साहन और पति के सहयोग से आसान हुई राह

स्नेहा के लिए यह उद्यम महज आजीविका या आय का माध्यम नहीं है, बल्कि अपनी रचनात्मक रुचि को एक ठोस पहचान दिलाने का माध्यम है। शादी के बाद सुरक्षित नौकरी छोड़ना एक बड़ा फैसला था, लेकिन इस मोड़ पर उन्हें अपने परिवार का भरपूर समर्थन मिला। स्नेहा बताती हैं कि इस पूरे सफर में उनके पति ने सबसे अहम भूमिका निभाई और उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए लगातार प्रेरित किया। इसके साथ ही ससुराल के अन्य सदस्यों ने भी हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। वह मानती हैं कि यदि जीवनसाथी और परिवार का ऐसा सहयोग न मिलता, तो व्यवसाय की जटिलताओं का सामना करना आसान नहीं होता। उनके पति व्यावसायिक जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने के साथ-साथ प्रदर्शनियों में स्टॉल प्रबंधन में भी सक्रिय रूप से साथ खड़े रहते हैं।

डिजिटल माध्यमों से खरीदारी और संपर्क की सुविधा

राजधानी पटना में जो ग्राहक प्रामाणिक और उच्च स्तरीय चिकनकारी कपड़ों की तलाश में हैं, वे हाउस ऑफ थ्रेड से ऑनलाइन माध्यमों से संपर्क स्थापित कर सकते हैं। स्नेहा ग्राहकों की सुविधा के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से नवीनतम डिजाइनों की स्पष्ट तस्वीरें साझा करती हैं, जिससे लोग घर बैठे अपनी पसंद तय कर सकें। ग्राहक सीधे मोबाइल नंबर 7632815112 पर कॉल अथवा संदेश भेज सकते हैं, या फिर इंस्टाग्राम के आधिकारिक माध्यम से संपर्क साध सकते हैं।

सवाल-जवाब

हाउस ऑफ थ्रेड की शुरुआत किसने और कहां की है?
इसकी शुरुआत पटना की रहने वाली स्नेहा ने शादी के बाद अपनी नौकरी छोड़कर की है।
इस ब्रांड के कपड़ों की क्या खासियत है?
यहाँ मिलने वाले सभी परिधान मशीनी नहीं, बल्कि पूरी तरह लखनऊ के कुशल कारीगरों द्वारा हाथ से तैयार किए जाते हैं।
हाउस ऑफ थ्रेड में किस तरह के परिधान मिलते हैं?
यहाँ कुर्तियों से लेकर कॉर्ड सेट, थ्री पीस सेट और मुकेश वर्क वाले पार्टी वियर कपड़े उपलब्ध हैं।
कपड़ों की मूल्य सीमा क्या है?
कपड़ों की शुरुआती कीमत 1,000 रुपये है, जो कारीगरी और डिजाइन के आधार पर 5,000 से 6,000 रुपये तक जाती है।
इस व्यवसाय की शुरुआत कितने कपड़ों के साथ हुई थी?
स्नेहा ने इस काम की शुरुआत मात्र 50 पीस के छोटे से स्टॉक के साथ की थी।
क्या इस ब्रांड के उत्पाद किसी प्रदर्शनी में लगाए गए हैं?
हाँ, पटना के ज्ञान भवन में आयोजित प्रदर्शनी में इसके उत्पादों का स्टॉल लगाया जा चुका है।
खरीदारी या पूछताछ के लिए ग्राहक कैसे संपर्क कर सकते हैं?
ग्राहक मोबाइल नंबर 7632815112 पर कॉल या व्हाट्सएप कर सकते हैं, अथवा इंस्टाग्राम के जरिए संपर्क साध सकते हैं।
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