कठिन परिस्थितियों से जूझते हुए अपनी मेहनत के बल पर बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना हर कोई देखता है, लेकिन इसे हकीकत में बदलने वाले लोग बहुत कम होते हैं। राजस्थान से आने वाले अखंड स्वरूप पंडित ने ठीक ऐसा ही करिश्मा कर दिखाया है। एक समय पेट पालने और पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए मोबाइल फोन की दुकानों पर छोटा-मोटा काम करने वाले अखंड स्वरूप ने आज 2 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक वैल्यूएशन वाला एक विशाल व्यापारिक साम्राज्य खड़ा कर दिया है। सरकारी सेवा की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर उन्होंने द कैटलिस्ट ग्रुप की नींव रखी थी, जो आज कई सेक्टर्स में तेजी से पैर पसार रहा है।
मोबाइल दुकान से आईईएस अधिकारी बनने तक का संघर्ष
अखंड स्वरूप पंडित का शुरुआती जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा। आर्थिक तंगियों के बीच उन्होंने मोबाइल की दुकानों में काम करना शुरू किया, ताकि वे अपने खर्च निकाल सकें। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी पीछे नहीं छूटने दिया। निरंतर परिश्रम और लगन के बल पर उन्होंने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षाओं में से एक, इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज (आईईएस) की परीक्षा सफलतापूर्वक पास की। इस सफलता के बाद वे एक प्रशासनिक अधिकारी बन गए, जो किसी भी युवा के लिए एक सुरक्षित और प्रतिष्ठित करियर माना जाता है।
नौकरी छोड़ शुरू किया अपना संस्थान
एक प्रशासनिक अधिकारी के पद पर पहुंचने के बाद भी अखंड स्वरूप पंडित का मन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुआ। उनके भीतर उद्यमशीलता और छात्रों की मदद करने का गहरा जज्बा मौजूद था। उन्होंने अपनी सुरक्षित सरकारी नौकरी को अलविदा कह दिया और बिजनेस की दुनिया में कदम रखने का बड़ा फैसला लिया। प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर इंजीनियरिंग और तकनीकी सेवाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को सही मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से उन्होंने 'द कैटलिस्ट ग्रुप' की स्थापना की। राजस्थान की धरती से शुरू हुआ यह छोटा सा प्रयास देखते ही देखते हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण बन गया।
3 लाख से ज्यादा छात्रों का भरोसा और टॉप रैंकर्स
शुरुआती दौर में द कैटलिस्ट ग्रुप मुख्य रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग और मार्गदर्शन तक ही केंद्रित था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस संस्थान के जरिए अब तक 3 लाख से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षण शैली के कारण इसके 20 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में टॉप रैंक हासिल की है। शिक्षा के क्षेत्र में मिली इसी अपार सफलता और साख ने समूह को आगे बढ़ने की मजबूत आर्थिक और संस्थागत ताकत दी।
रियल एस्टेट और एफएमसीजी में विस्तार
शिक्षा जगत में गहरी पैठ बनाने के बाद अखंड स्वरूप पंडित ने अपने कारोबार को केवल एक ही क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने द कैटलिस्ट ग्रुप को एक मल्टी-सेक्टर बिजनेस इकोसिस्टम बनाने की योजना पर काम करना शुरू किया। समूह ने हाल के वर्षों में रियल एस्टेट, रोजमर्रा के उपभोग की वस्तुओं यानी एफएमसीजी और इंटरनेशनल ट्रेड जैसे बड़े उद्योगों में व्यापक स्तर पर विस्तार किया। विभिन्न वर्टिकल्स में समय पर किए गए इस समझदारी भरे विविधीकरण ने कंपनी की बाजार हैसियत को 2 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंचाने में सबसे अहम भूमिका निभाई।
उत्तर भारत के अन्य राज्यों में विस्तार की तैयारी
द कैटलिस्ट ग्रुप अब राजस्थान के पारंपरिक बाजार से बाहर निकलकर पूरे उत्तर भारत के अन्य राज्यों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने पर जोर दे रहा है। कंपनी प्रबंधन का मानना है कि एजुकेशन का मजबूत आधार हमेशा उनके साथ रहेगा, लेकिन कंपनी की दीर्घकालिक विकास रणनीति अब नए सेक्टरों में विस्तार और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक अवसरों को भुनाने पर केंद्रित है। एक मामूली दुकान के सहायक से लेकर अरबों रुपये के समूह के प्रमुख बनने तक का अखंड स्वरूप का यह सफर देश के लाखों युवाओं को अपने सपनों पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।


















