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मेरठ के नगली गांव की महिलाएं मूर्ति निर्माण से संवार रही हैं अपना भविष्य, स्टार्टअप से कमा रही हैं बंपर मुनाफासक्सेस स्टोरी
27 जून 2026, 12:04 pm (45 दिन पहले)· 4

मेरठ के नगली गांव की महिलाएं मूर्ति निर्माण से संवार रही हैं अपना भविष्य, स्टार्टअप से कमा रही हैं बंपर मुनाफा

मेरठ के नगली गांव में महिलाएं अब मूर्ति बनाने का हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपना खुद का स्टार्टअप चलाकर लाखों की कमाई कर रही हैं।

मेरठ के पश्चिमी इलाके में इन दिनों एक नई आर्थिक क्रांति की लहर दिखाई दे रही है, जहां महिलाएं स्टार्टअप की ओर कदम बढ़ाकर न केवल अपना बल्कि अपने परिवार का भविष्य भी संवार रही हैं। मेरठ का नगली गांव इस पहल का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहां महिलाएं विभिन्न प्रकार की कलात्मक मूर्तियां तैयार करने का प्रशिक्षण ले रही हैं। यह पहल उन महिलाओं के लिए एक नया रास्ता है, जो अपने कौशल के दम पर आर्थिक आजादी हासिल करना चाहती हैं।

मूर्तिकला: एक उभरता हुआ सफल स्टार्टअप

इस हुनर को सीखने वाली बबीता ने बताया कि मूर्ति निर्माण का कारोबार आज के समय में आय का एक बहुत ही शानदार जरिया बन चुका है। बबीता के अनुसार, उनके गांव के समीप की कुछ महिलाओं ने पहले इस काम का प्रशिक्षण लिया और फिर अपना छोटा सा व्यवसाय शुरू किया। आज उन महिलाओं के साथ 10 से ज्यादा अन्य महिलाएं मिलकर काम कर रही हैं और उनका सालाना टर्नओवर लाखों रुपये तक पहुंच गया है। उनकी कामयाबी से प्रभावित होकर बबीता ने भी गांव की अन्य महिलाओं को प्रेरित किया और आज वहां करीब 50 से अधिक महिलाएं मूर्ति बनाने की कला में निपुण हो रही हैं।

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घर संभालते हुए आर्थिक स्वावलंबन

संजना जैसी अन्य प्रशिक्षु महिलाओं का मानना है कि बाहर किसी दफ्तर में 8 घंटे की नौकरी करना उनके लिए व्यावहारिक रूप से कठिन था, क्योंकि घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। ऐसे में मूर्ति निर्माण का काम उनके लिए वरदान साबित हुआ है। संजना कहती हैं कि घर के तमाम कामकाज निपटाने के बाद वह यह प्रशिक्षण लेती हैं। सबसे खास बात यह है कि प्रशिक्षण के साथ-साथ अब उनकी कमाई भी शुरू हो गई है। बाजार में इन मूर्तियों की मांग काफी अधिक रहती है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है। उनका मानना है कि यदि हर महिला घर से ही ऐसा कोई काम शुरू करे, तो वे अपने बच्चों का भविष्य बेहतर तरीके से संवार सकती हैं। वहीं, हिना का कहना है कि एक सुंदर मूर्ति को पूरी तरह तैयार करने में उन्हें केवल 20 मिनट का समय लगता है।

प्रशिक्षण और निरंतर मार्गदर्शन

अक्ष एजुकेशन सोसाइटी के प्रतिनिधि दीपक विकल्प ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत महिलाओं को हुनरमंद बनाकर आत्मनिर्भर बनाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने सोनिया का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह उन्होंने पहले ट्रेनिंग ली और फिर एक समूह बनाकर बड़ा स्टार्टअप खड़ा किया, जिसके जरिए वह हर साल लाखों रुपये का कारोबार कर रही हैं। यह प्रक्रिया यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं की 6 महीने तक पूरी मॉनिटरिंग की जाती है। इन महिलाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के ट्रेड फेयर में स्टॉल लगाने का मौका भी दिया जाता है, ताकि वे अपने बिजनेस को बाजार में स्थापित कर सकें। घरों की सजावट के लिए इन सुंदर आकृतियों वाली मूर्तियों को लोग काफी पसंद भी कर रहे हैं, जिससे इन महिलाओं का उत्साह और बढ़ रहा है।

सवाल-जवाब

मेरठ के नगली गांव में महिलाएं क्या काम सीख रही हैं?
यहां महिलाएं विभिन्न प्रकार की सजावटी मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
कितनी महिलाएं इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा हैं?
वर्तमान में नगली गांव में 50 से अधिक महिलाएं मूर्ति बनाने का काम सीख रही हैं।
महिलाओं को अपने व्यवसाय को बढ़ाने में कौन मदद कर रहा है?
अक्ष एजुकेशन सोसाइटी के माध्यम से इन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 6 महीने तक इनकी मॉनिटरिंग की जाती है।
क्या इन मूर्तियों की बाजार में मांग है?
हां, ये सजावटी मूर्तियां विभिन्न आकृतियों में तैयार की जाती हैं और घर की शोभा बढ़ाने के लिए बाजार में इनकी काफी मांग है।
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