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वरदा रेड्डी ने पारंपरिक फसलों को छोड़ उमाया एवोकाडो, आंध्र प्रदेश के किसान ने बदली किस्मतसक्सेस स्टोरी
20 अक्तू॰ 2026, 7:28 pm (9 दिन पहले)· 5

वरदा रेड्डी ने पारंपरिक फसलों को छोड़ उमाया एवोकाडो, आंध्र प्रदेश के किसान ने बदली किस्मत

आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कडपा जिले के युवा किसान वरदा रेड्डी ने टमाटर और केले की खेती में घाटा होने के बाद एवोकाडो की खेती शुरू की और शानदार मुनाफा कमाया।

पारंपरिक खेती में लगातार हो रहे वित्तीय नुकसान से उबरने के लिए आंध्र प्रदेश के एक युवा किसान ने एक अनूठा कदम उठाया है। वाईएसआर कडपा जिले के लिंगाल मंडल के रहने वाले वरदा रेड्डी ने अपनी मेहनत और सूझबूझ से कृषि के क्षेत्र में एक अलग मुकाम हासिल किया है। कम औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने रायलसीमा के गर्म और शुष्क मौसम में एवोकाडो जैसे विदेशी फल की सफल पैदावार करके सभी को अचंभित कर दिया है।

दिसंबर 2022 का महीना उनके कृषि सफर में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ जब उन्होंने लीक से हटकर कुछ अलग करने की ठानी। इससे पहले वे मुख्य रूप से केला और टमाटर जैसी पारंपरिक फसलें ही उगाते थे। हालांकि, कृषि बाजारों में अस्थिरता और फसलों के उचित दाम न मिलने के कारण उन्हें अक्सर बड़े पैमाने पर आर्थिक घाटे का सामना करना पड़ता था।

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बाजार की मांग को पहचानकर उठाया कदम

बाजार में पौष्टिक और विदेशी फलों की बढ़ती मांग का आकलन करने के बाद वरदा रेड्डी ने अधिक मुनाफा देने वाली फसल की तलाश शुरू की। चूंकि उन्हें इस विदेशी पौधे के बारे में कोई पूर्व अनुभव नहीं था, इसलिए उन्होंने बागवानी विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधा। विभागीय मार्गदर्शन और गहन शोध के माध्यम से उन्हें पता चला कि देश में एवोकाडो की ऐसी प्रजातियां भी उपलब्ध हैं जो रायलसीमा के कड़े तापमान को आसानी से झेल सकती हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी करीब चार एकड़ जमीन पर एवोकाडो के पौधे रोपे, जिस पर शुरुआती निवेश लगभग डेढ़ लाख रुपये आया था।

कम लागत और बेहतरीन मुनाफे का मॉडल

इस फसल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके रखरखाव पर बहुत कम खर्च करना पड़ता है। पौधों को नियमित रूप से पानी और जैविक खाद मिलने पर वे प्राकृतिक रूप से तेजी से विकसित होते हैं। इनकी देखभाल करना काफी हद तक आम के पेड़ों की देखभाल करने जैसा ही सरल है। इस सफल प्रयोग के बाद वरदा रेड्डी को काफी अच्छा मुनाफा मिल चुका है और वे आने वाले समय में अपनी आय को और अधिक बढ़ाने की दिशा में योजना बना रहे हैं। कम लागत में तैयार होने वाली इस फसल ने उनकी आर्थिक बुनियाद को बेहद मजबूत कर दिया है।

स्थानीय स्तर पर मिल रही है सीधी बिक्री

इस विदेशी फल की मार्केटिंग के लिए उन्हें दूरदराज की मंडियों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। स्थानीय स्तर पर जूस की दुकानें चलाने वाले व्यापारी और स्वास्थ्य को लेकर सजग ग्राहक सीधे उनके खेतों का रुख करते हैं और वहीं से फल खरीदकर ले जाते हैं। एवोकाडो में मौजूद औषधीय गुणों और इसकी उच्च गुणवत्ता के कारण इसकी मांग लगातार ऊपर जा रही है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान पारंपरिक लीक को छोड़कर नई तकनीक अपनाएं, तो प्रतिकूल मौसम में भी शानदार फसल उगाकर अपनी माली हालत सुधारी जा सकती है।

सवाल-जवाब

वरदा रेड्डी कहाँ के रहने वाले हैं?
वरदा रेड्डी आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कडपा जिले के लिंगाल मंडल के रहने वाले हैं।
उन्होंने एवोकाडो की खेती कब शुरू की?
उन्होंने दिसंबर 2022 में पारंपरिक फसलों को छोड़कर एवोकाडो की खेती शुरू की थी।
एवोकाडो की खेती पर शुरुआती खर्च कितना आया था?
उनकी लगभग चार एकड़ जमीन पर एवोकाडो लगाने का शुरुआती खर्च करीब डेढ़ लाख रुपये आया था।
वे पहले कौन सी फसलें उगाते थे?
वे मुख्य रूप से केला, टमाटर और अन्य पारंपरिक फसलें उगाते थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·8 दिन पहले

कड़पा की गर्मी में एवोकाडो उगाना सच में कमाल है। डेढ़ लाख के शुरुआती निवेश से चार एकड़ में ऐसी फसल तैयार करना जो सीधे खेत से बिक जाए, वाकई लीक से हटकर सोचना है।

Ananya Iyer@ananya-iyer·8 दिन पहले

एवोकाडो उगाना सुनने में तो अच्छा है, पर रायलसीमा की गर्मी में बिना किसी झटके के फसल बच कैसे गई?

Divya Reddy@divya-reddy·8 दिन पहले

अरे अनन्या, जब मैं पिछले साल कडपा गई थी, तब एक किसान ने मुझे खुद ऐसे ही अमरुद के पेड़ दिखाए थे जो उन्होंने कभी सोचे भी नहीं थे कि वहाँ उगेंगे।

Tanvi Desai@tanvi-desai·8 दिन पहले

एवोकाडो उगाना सुनने में तो बहुत बढ़िया लगा, पर आंध्र की गर्मी में बिना किसी झटके के यह फसल चार एकड़ में ऐसे ही पनप जाएगी, इस पर थोड़ा शक है।

Kavya Nair@kavya-nair·8 दिन पहले

तनवी, कैलिफ़ोर्निया के खेतों में भी तो तेज़ धूप रहती है। बागवानी विभाग की मदद से अब कई वैरायटी आ गई हैं जो गर्म मौसम झेल लेती हैं।

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