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चैटजीपीटी के इस्तेमाल में भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ा, सैम ऑल्टमैन ने गिनाई देश में एआई के बढ़ते रुझान की वजहेंतकनीक
4 नव॰ 2026, 1:42 pm (2 मिनट पहले)· 0

चैटजीपीटी के इस्तेमाल में भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ा, सैम ऑल्टमैन ने गिनाई देश में एआई के बढ़ते रुझान की वजहें

ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन के अनुसार भारत अब चैटजीपीटी का सबसे बड़ा यूजर बेस बन चुका है, जहां लोग दैनिक कामों के अलावा नए स्टार्टअप और बिजनेस खड़ा करने में एआई का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं।

दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रसार के बीच भारत चैटजीपीटी के इस्तेमाल के मामले में सबसे आगे निकल चुका है। ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने यह स्पष्ट किया है कि यूजर्स की कुल संख्या के लिहाज से भारत अब अमेरिका को पीछे छोड़कर चैटजीपीटी का सबसे बड़ा बाजार बन गया है। भारतीय यूजर्स केवल सामान्य सवालों या दैनिक कामकाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे इस आधुनिक तकनीक के जरिए नए व्यापार शुरू करने और जटिल समस्याओं को हल करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।

तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और तकनीकी स्वीकार्यता

राज शमानी के पॉडकास्ट में चर्चा के दौरान जब यह सवाल उठा कि अमेरिका में एआई को लेकर लगातार संदेह और चिंताएं जताई जाती हैं, जबकि भारत में इसे लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है, तो सैम ऑल्टमैन ने इसके पीछे देश की आर्थिक प्रगति को मुख्य कारण बताया। उनका कहना है कि जिन मुल्कों की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही होती है, वहां की जनता नई तकनीकों को अपनाने में ज्यादा लचीलापन और सकारात्मकता दिखाती है। इसके विपरीत, परिपक्व और पूरी तरह विकसित हो चुकी अर्थव्यवस्थाओं में नए तकनीकी बदलावों को अक्सर अलग नजरिए या आशंकाओं के साथ आंका जाता है।

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विकासशील देशों के बाजार में अभी कई प्रकार के उत्पादों और आवश्यक सेवाओं की भारी मांग मौजूद है। ऐसे माहौल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन बुनियादी और व्यावसायिक आवश्यकताओं को तेजी से पूरा करने का एक बेहद कारगर जरिया साबित हो रहा है। यही मुख्य वजह है कि भारतीय समाज और यहां के पेशेवर एआई को किसी खतरे के रूप में देखने के बजाय तरक्की के एक बड़े और नए अवसर के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।

संसाधनों की कमी दूर करने में मददगार बनी तकनीक

सैम ऑल्टमैन ने बातचीत के दौरान भारत में इस तकनीक के रचनात्मक प्रयोग का एक वास्तविक उदाहरण भी साझा किया। उन्होंने एक युवा छात्र का प्रसंग बताया, जिसे अपने स्कूल के लिए फंड जुटाने का जिम्मा मिला था। उस छात्र के पास पहले से धन जुटाने या किसी पेशेवर अभियान को संचालित करने का कोई पूर्व अनुभव नहीं था। इसके बावजूद, उसने ओपनएआई के टूल्स का सहारा लेकर फंड जुटाने की पूरी योजना बनाई और उसे सफलतापूर्वक पूरा कर दिखाया।

इस घटना का हवाला देते हुए उन्होंने समझाया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उन सभी लोगों के लिए एक समान अवसर उपलब्ध करा रहा है, जिनके पास पारंपरिक अनुभव, विशेषज्ञता या भारी संसाधन मौजूद नहीं हैं। आधुनिक एआई टूल्स की मदद से साधारण लोग भी अब वे काम खुद करने में सक्षम हो रहे हैं, जिनके लिए पहले वर्षों का अनुभव या बड़ी टीमों की जरूरत होती थी।

नए उद्यमियों और स्टार्टअप संस्थापकों के लिए स्वर्णिम अवसर

ओपनएआई के प्रमुख के मुताबिक, मौजूदा दौर नई कंपनी स्थापित करने या अभूतपूर्व तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए मानव इतिहास के सबसे बेहतरीन समय में से एक है। उन्होंने नए उद्यमियों और इनोवेटर्स को ऐसे विचारों पर काम करने का सुझाव दिया, जिनकी उपयोगिता या क्षमता को फिलहाल व्यापक समाज तुरंत नहीं समझ पा रहा हो।

उनका मानना है कि व्यापार और नवाचार के क्षेत्र में सबसे बड़ी सफलताएं अक्सर उन लोगों को मिलती हैं, जो किसी उभरती हुई तकनीक की असली क्षमता को बाकी दुनिया के समझने से पहले भांप लेते हैं। भारत में उद्यमी इसी सोच के साथ नए प्रयोग कर रहे हैं, जिससे यह देश आने वाले समय में वैश्विक एआई परिदृश्य में और भी अहम भूमिका निभा सकता है।

सवाल-जवाब

सैम ऑल्टमैन के अनुसार चैटजीपीटी का सबसे बड़ा बाजार कौन सा देश बन गया है?
सैम ऑल्टमैन ने बताया कि यूजर्स की संख्या के आधार पर भारत अमेरिका को पछाड़कर चैटजीपीटी का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है।
भारत में एआई को लेकर लोगों का नजरिया अमेरिका से किस तरह अलग है?
अमेरिका में जहां लोग अक्सर एआई को लेकर सवाल और चिंताएं उठाते हैं, वहीं भारत में लोग इसे लेकर अधिक सकारात्मक और उत्साहित हैं।
भारत में एआई को अपनाने की मुख्य वजह सैम ऑल्टमैन ने क्या बताई?
उन्होंने देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और अनसुलझी बाजार जरूरतों को पूरा करने के लिए तकनीक को एक बड़े अवसर के रूप में देखे जाने को मुख्य वजह बताया।
सैम ऑल्टमैन ने पॉडकास्ट में भारतीय छात्र का क्या उदाहरण दिया?
उन्होंने बताया कि बिना किसी पूर्व अनुभव के एक भारतीय छात्र ने ओपनएआई टूल्स की मदद से अपने स्कूल के लिए फंड जुटाने की पूरी प्रक्रिया पूरी की।
सैम ऑल्टमैन ने नए स्टार्टअप संस्थापकों को क्या सलाह दी है?
उन्होंने सलाह दी कि संस्थापकों को ऐसे नए विचारों पर काम करना चाहिए जिनकी अहमियत दुनिया को अभी समझ नहीं आ रही है, ताकि वे तकनीक की क्षमता का पहले लाभ उठा सकें।
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