ब्राउज़र के मेनू आइकॉन पर क्लिक करने पर कई विकल्पों की एक सूची खुलकर सामने आती है। इसके बाद ऑप्शंस पर क्लिक करके सेटिंग्स पेज पर जाएं, जहां बाएं हाथ की तरफ प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी का विकल्प मिलता है। इस पेज पर नीचे स्क्रॉल करने पर परमिशन सेक्शन दिखाई देता है, जिसमें नोटिफिकेशन विकल्प के अंतर्गत सेटिंग्स टैब पर क्लिक करना होता है। इसके बाद एक पॉप-अप खुलता है जिसमें सभी वेबसाइट्स की सूची होती है, और नोटिफिकेशन की अनुमति देने के लिए संबंधित साइट के सामने स्टेटस हेड के तहत अलाउ विकल्प को चुनना होता है। बदलाव पूरे होने के बाद सेव चेंजेस पर क्लिक करके सेटिंग सुरक्षित कर ली जाती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक नए और बड़े मुकाम को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस छिड़ गई है, क्योंकि ओपनएआई के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) सैम ऑल्टमैन का मानना है कि दुनिया ने एआई सिंगुलारिटी की सीमा में कदम रख दिया है। दशकों से इस विषय पर वैज्ञानिक और तकनीक विशेषज्ञ चर्चा करते आए हैं, लेकिन अब इस पर नए सिरे से विचार किया जा रहा है।
एक पॉडकास्ट में अपनी बात रखते हुए सैम ऑल्टमैन ने कहा कि हम अब सिंगुलारिटी के दौर में पहुंच चुके हैं, जिससे यह साफ होता है कि एआई अब केवल भविष्य की कोई तकनीक नहीं रह गई है। यह वर्तमान समय में ही लोगों के काम करने के तरीके, सीखने की प्रक्रिया, व्यापार खड़े करने के तौर-तरीकों और फैसलों को तेजी से बदल रही है।
हालांकि, सैम ऑल्टमैन के इन बयों का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि विज्ञान कथाओं की तरह रोबोट्स ने अचानक पूरी दुनिया पर कब्जा कर लिया है। इसके बजाय उनका तर्क यह है कि समाज अब एक ऐसे कालखंड में प्रवेश कर चुका है जहां एआई अभूतपूर्व गति से दैनिक जीवन, अर्थव्यवस्था और कार्यस्थलों को नया रूप दे रहा है।
आसान शब्दों में समझें तो एआई सिंगुलारिटी वह स्थिति है जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता इंसानों से भी अधिक बुद्धिमान बन जाती है और बिना इंसानों की लगातार मदद के खुद में सुधार करना शुरू कर देती है। इस अवधारणा को इस प्रकार समझें कि आज के एआई सिस्टम को तैयार करने, प्रशिक्षित करने और अपडेट करने के लिए इंजीनियरों की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन सिंगुलारिटी के आने पर भविष्य का एआई इंसानों से अधिक तेजी से सीख सकेगा, खुद को नए सिरे से डिजाइन कर सकेगा और लोगों के सुधार करने का इंतजार किए बिना अपने सॉफ्टवेयर के बेहतर संस्करण तैयार करने में सक्षम हो जाएगा।
दशकों से वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या कभी ऐसा समय आएगा और यदि ऐसा होता है, तो क्या यह मानवता के लिए लाभदायक साबित होगा या फिर गंभीर खतरे पैदा करेगा। सैम ऑल्टमैन का मानना है कि बहुत से लोग सिंगुलारिटी को एक ऐसी नाटकीय घटना के रूप में देखते हैं जहां कोई शक्तिशाली एआई अचानक रातों-रात हर किसी से ज्यादा बुद्धिमान हो जाता है।
सैम ऑल्टमैन के अनुसार, एआई पहले से ही लोगों के लिखने, कोडिंग करने, पढ़ाई करने, रिसर्च करने, उत्पाद डिजाइन करने, डेटा का विश्लेषण करने, ग्राहकों के सवालों के जवाब देने और बिजनेस चलाने के तौर-तरीकों को बदल रहा है। एआई मॉडल्स की हर नई पीढ़ी अधिक काम तेजी से करती है, बेहतर परिणाम देती है और कुछ ही महीनों में करोड़ों उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध हो जाती है। उनके दृष्टिकोण से, इस क्रमिक लेकिन तेज बदलाव का मतलब है कि समाज एआई सिंगुलारिटी के शुरुआती चरण में पहुंच चुका है।
भले ही सैम ऑल्टमैन एआई के दीर्घकालिक फायदों को लेकर आश्वस्त नजर आते हैं, लेकिन कई शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि तकनीक की यह तेज रफ्तार नए तरह की चुनौतियां भी पैदा कर रही है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के दावे के मुताबिक, ओपनएआई का एक मॉडल आंतरिक परीक्षण के दौरान कुछ सुरक्षा प्रतिबंधों को लांघकर Hugging Face के बाहरी सर्वरों के संपर्क में आ गया था। हालांकि ऐसे परीक्षण सार्वजनिक रूप से लॉन्च करने से पहले कमियों का पता लगाने के लिए ही किए जाते हैं, लेकिन इस रिपोर्ट ने एआई सुरक्षा और निगरानी पर चल रही बहसों को और तेज कर दिया है।
शारीरिक श्रम के मुकाबले एआई का सबसे गहरा प्रभाव ऑफिस और ज्ञान आधारित नौकरियों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। कई एआई टूल्स अब कुछ ही सेकंड के भीतर ईमेल का मसौदा तैयार करने, प्रस्तुतियां बनाने, कंप्यूटर कोड लिखने, स्प्रैडशीट का विश्लेषण करने, मार्केटिंग अभियान चलाने, दस्तावेजों का अनुवाद करने, ग्राहकों के सवालों के उत्तर देने और रिपोर्ट जनरेट करने में सक्षम हैं।
इसका मतलब यह कतई नहीं है कि रातों-रात लाखों नौकरियां खत्म हो जाएंगी, बल्कि इसके विपरीत कई भूमिकाएं बदल सकती हैं जहां कर्मचारी एआई के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उसके साथ मिलकर काम करते नजर आएंगे। जो पेशेवर एआई का प्रभावी ढंग से उपयोग करना सीख जाएंगे, वे अपनी उत्पादकता में भारी इजाफा कर सकते हैं, जबकि जो कंपनियां इस तकनीक को अपनाने में विफल रहेंगी, उनके लिए बाजार में टिके रहना कठिन हो सकता है।
भारत उन देशों में शामिल है जहां एआई से पैदा होने वाले अवसरों और चुनौतियों दोनों का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है। देश के पास आईटी सेवाओं, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग, कस्टमर सपोर्ट, वित्त और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में दुनिया का सबसे बड़ा कार्यबल मौजूद है, और इन्हीं क्षेत्रों में एआई लगातार बार-बार किए जाने वाले कामों को स्वचालित बना रहा है।
इसी समय, भारतीय कंपनियां अपनी उत्पादकता सुधारने, लागत घटाने, नए उत्पाद विकसित करने और वैश्विक बाजारों में अपनी स्थिति मजबूत करने के वास्ते एआई का उपयोग करके लाभ कमा सकती हैं।
ब्राउज़र के मेनू आइकॉन पर क्लिक करने पर कई विकल्पों की सूची खुलती है, जहां से ऑप्शंस पर जाकर प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी सेक्शन तक पहुंचा जा सकता है।



















