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डूंगरपुर के स्कूल में गिरी जर्जर कमरे की छत, टला बड़ा हादसाराजस्थान
25 अग॰ 2026, 3:39 pm (1 घंटे पहले)· 3

डूंगरपुर के स्कूल में गिरी जर्जर कमरे की छत, टला बड़ा हादसा

राजस्थान के डूंगरपुर जिले में एक सरकारी स्कूल के जर्जर कमरे की छत का हिस्सा ढह गया। गनीमत रही कि कमरा पहले से बंद था जिससे कोई हताहत नहीं हुआ।

राजस्थान के डूंगरपुर जिले में सरकारी भवनों की बदहाली का एक और डरावना वाकया सामने आया है। यहां एक राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में सोमवार को एक जर्जर कमरे की छत का बड़ा हिस्सा अचानक नीचे आ गिरा। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी छात्र या शिक्षक को चोट नहीं आई, क्योंकि सुरक्षा के मद्देनजर इस खास कमरे को लगभग एक साल पहले से ही पूरी तरह बंद कर रखा गया था।

अचानक तेज आवाज से सहमे बच्चे और शिक्षक

हादसे के वक्त विद्यालय के अन्य कमरों में छात्र अपनी पढ़ाई कर रहे थे। अचानक छत गिरने की तेज और भयानक आवाज गूंज उठी, जिससे परिसरों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। डर के मारे छात्र और शिक्षक फौरन अपनी-अपनी कक्षाओं से दौड़कर बाहर खुले मैदान में आ गए।

दस में से दो कमरे पहले ही घोषित किए जा चुके थे असुरक्षित

एक जिम्मेदार अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि स्कूल प्रबंधन ने पहले ही दो कमरों को खतरनाक और असुरक्षित मान लिया था। एहतियात के तौर पर उन कमरों के भीतर पढ़ाई करवाना रोक दिया गया था। पूरे विद्यालय परिसर में कुल 10 कमरे बने हुए हैं, जिनमें से दो की हालत बेहद जर्जर है। सोमवार को इन्हीं में से एक कमरे की छत का प्लास्टर और मलबा भरभराकर गिर पड़ा, जबकि दूसरा कमरा भी किसी भी वक्त हादसे को न्योता दे रहा है।

मलबे में तब्दील हुआ कमरा

अधिकारियों ने इस बात पर राहत जताई कि समय रहते असुरक्षित कमरों का उपयोग बंद कर दिया गया था, वरना एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो सकता था। छत गिरने के बाद भारी मात्रा में मलबा जमीन पर फैल गया, जिसमें सीमेंट के भारी पत्थर, ईंटें और लोहे के मुड़े हुए सरिए साफ नजर आ रहे थे।

स्थानीय लोगों और नेताओं में आक्रोश

इस खतरनाक घटना के सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों के बीच भारी रोष व्याप्त है। लोगों का सवाल है कि आखिर सरकारी शिक्षण संस्थानों के प्रति इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है। कक्षों की हालत खराब होने के बावजूद समय रहते उनकी मरम्मत क्यों नहीं करवाई गई। लोगों का कहना है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था। इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस नेता विनोद झाखड़ ने X पर लिखा कि सरकार की इस उदासीनता के कारण बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती थी।

सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने का तीन साल का प्लान

इस बीच राज्य सरकार ने प्रदेशभर के सरकारी विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए एक ठोस योजना तैयार की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने शिक्षा ढांचे के कायाकल्प के लिए तीन साल का एक व्यापक रोडमैप बनाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से लेकर 2028-29 की अवधि के दौरान इस पूरी योजना पर लगभग 12,500 करोड़ रुपये की भारी राशि खर्च की जाएगी।

बड़े पैमाने पर होंगे मरम्मत और निर्माण कार्य

इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत पूरे प्रदेश में कुल 3,587 नए सरकारी स्कूल भवनों का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 83,783 नए कक्षा-कक्ष बनाए जाएंगे, 22,589 विद्यालयों में सुरक्षा और बड़े स्तर पर मरम्मत के कार्य संपन्न कराए जाएंगे तथा 13,616 नए शौचालय परिसरों को भी तैयार किया जाएगा ताकि छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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सवाल-जवाब

डूंगरपुर में यह घटना किस स्कूल में हुई?
यह घटना डूंगरपुर जिले के एक राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल में हुई।
क्या इस हादसे में कोई घायल हुआ?
नहीं, इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ क्योंकि जर्जर कमरा पिछले करीब एक साल से बंद था।
स्कूल में कुल कितने कमरे हैं?
इस स्कूल में कुल 10 कमरे हैं, जिनमें से दो जर्जर अवस्था में थे।
सरकार स्कूलों के कायाकल्प के लिए क्या योजना बना रही है?
सरकार ने तीन साल का रोडमैप तैयार किया है जिसके तहत 2026-27 से 2028-29 के बीच करीब 12,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 मिनट पहले

डूंगरपुर की यह घटना प्रशासनिक उदासीनता और संभावित आपराधिक लापरवाही की गंभीर बानगी है। गनीमत रही कि कमरा बंद था, अन्यथा एक बड़े हादसे से मासूमों की जान जा सकती थी। इस मामले में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को यह जाँच करनी चाहिए कि समय पर मरम्मत क्यों नहीं हुई। यदि जर्जर भवनों में बच्चों को बैठाया जाता, तो यह भारतीय न्याय संहिता के तहत जनहानि की श्रेणी में आता। सरकार के तीन साल के रोडमैप के तहत केवल घोषणाएँ नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करते हुए तुरंत धरातल पर काम होना चाहिए ताकि कानून और सुरक्षा का पालन सुनिश्चित हो सके।

Rohan Verma@rohan-verma·30 मिनट पहले

डूंगरपुर की इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक सुस्ती को उजागर किया है। यद्यपि सरकार ने 2026-29 के दौरान 12,500 करोड़ रुपये के बजट से नए भवनों और कक्षाओं के निर्माण का रोडमैप तैयार किया है, लेकिन धरातल पर इन कार्यों की गति और गुणवत्ता की मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है। यदि समय रहते जर्जर कमरों की पहचान कर उन्हें पूरी तरह सील नहीं किया जाता, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। केवल लंबी अवधि की योजनाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि तत्काल प्रभाव से हर जिले में असुरक्षित परिसरों का ऑडिट होना चाहिए।

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