बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े गंभीर मुद्दे पर भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा को सख्त संदेश दिया है। मंत्रालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि फेसबुक भारतीय कानूनों का उल्लंघन करता है, तो उसे 'सेफ हार्बर' के तहत कानूनी सुरक्षा का अधिकार नहीं मिलेगा। सरकार ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि उसकी मंशा किसी भी तरह की सेंसरशिप लागू करना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल क्षेत्र में भारतीय कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से होने वाले संभावित नुकसान को नियंत्रित करना है।
एल्गोरिदम की पारदर्शिता और वैश्विक जिम्मेदारी
सरकार के साथ हुई बातचीत के दौरान मेटा की ओर से अपने तकनीकी तंत्र और एल्गोरिदम के काम करने के तरीके के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही डिजिटल सामग्री पर निर्णय लेने की आंतरिक प्रक्रियाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी है। बातचीत के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया से उत्पन्न होने वाले खतरों को लेकर चिंताएं केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अन्य देशों में भी इस तरह के नुकसान से निपटने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि इन खतरों को रोकने और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्राथमिक जिम्मेदारी खुद प्लेटफॉर्मों की ही है।
एआई सामग्री की लेबलिंग और व्हाट्सऐप यूजरनेम की जांच
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से तैयार होने वाली सामग्री के विषय में भी सरकार ने अपने स्पष्ट रुख की जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार कानून में यह प्रावधान पूरी तरह साफ है कि एआई से तैयार की गई हर सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य है। देश में काम करने वाले सभी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्मों को इस नियम का कड़ाई से पालन करना होगा।
इसके अतिरिक्त, व्हाट्सऐप यूजरनेम से जुड़े विवाद की भी व्यापक स्तर पर जांच की जा रही है। जांच प्रक्रिया का दायरा केवल व्हाट्सऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य मैसेजिंग ऐप्स को भी इसमें शामिल किया गया है। वर्तमान में डिजिटल सुरक्षा, उपयोगकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा और भारतीय विधिक ढांचे का पालन सुनिश्चित कराने के लिए नियामक स्तर पर व्यापक विचार-विमर्श का दौर जारी है।



















