अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं पर तेज बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है, जिससे सोना, चांदी और प्लैटिनम तीनों ही धातुओं में नरमी आई है। कमोडिटी ट्रेडिंग एडवाइजर्स (सीटीए) की ओर से की जा रही मुनाफावसूली ने इस गिरावट को बढ़ाया है। इसके बावजूद बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोने के लिए लंबी अवधि के बुनियादी कारक और पूंजी प्रवाह पूरी तरह अनुकूल बने हुए हैं, जिससे कीमतों में आने वाली किसी भी बड़ी गिरावट पर संस्थागत खरीदारी का जोरदार रुझान देखने को मिल सकता है। वास्तविक ब्याज दरों में उछाल और अमेरिकी डॉलर में मजबूती के कारण पीली धातु पर दबाव जरूर बना है, लेकिन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में लगातार पूंजी प्रवाह और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीद सोने को एक ठोस आधार प्रदान कर रही है।
केंद्रीय बैंकों का संचय और ईटीएफ निवेश बना सुरक्षा कवच
सोने की कीमतों को संभालने में सबसे अहम भूमिका वैश्विक केंद्रीय बैंकों और ईटीएफ निवेशकों की बनी हुई है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) ने सितंबर के दौरान अपने विदेशी मुद्रा भंडार में 23 टन सोना जोड़कर लगातार 23वें महीने सोने की शुद्ध खरीदारी दर्ज की है। रणनीतिक निवेशकों, विवेकाधीन ट्रेडर्स और केंद्रीय बैंकों की यह संगठित मांग मिलकर सर्राफा बाजार के लिए एक मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार कर रही है। विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिम, अनियंत्रित वित्तीय चिंताएं, अमेरिकी डॉलर की साख में कमी, गैर-डॉलर व्यापार का विस्तार और स्टैगफ्लेशन का बढ़ता डर वे बुनियादी कारण हैं जो निवेशकों की भूख को बनाए रखेंगे। यही वजह है कि वास्तविक दरों में वृद्धि के बावजूद सोने में दीर्घकालिक संचय स्थिर रहने की पूरी संभावना है।
करेंसी बाजार में हलचल और एफओएमसी मिनट्स पर टिकी नजरें
मुद्रा बाजार के मोर्चे पर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) जोड़ी हालिया सुधार को बनाए रखने में असमर्थ रही और बुधवार के एशियाई सत्र में 0.7000 के स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करती दिखी। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) के सख्त रुख की उम्मीदों के बावजूद, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नए उछाल और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच अमेरिकी डॉलर में आई खरीदारी ने इस जोड़ी पर दबाव बनाए रखा। बाजार सहभागियों की निगाहें अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एफओएमसी मिनट्स पर टिकी हैं, जो आगामी ब्याज दरों की दिशा तय करेंगे।
इसी तरह, यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) बुधवार के एशियाई सत्र में 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर पर कारोबार करता नजर आया। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) की ओर से नरम रुख के बयानों और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई तेजी ने डॉलर को नए खरीदार दिए हैं। तकनीकी तौर पर आगे की बढ़त दर्ज करने से पहले खरीदार 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) की बाधा को पार करने का इंतजार कर रहे हैं।
सोने का तकनीकी परिदृश्य और 4,000 डॉलर का दायरा
सोने ने मंगलवार की बढ़त को गंवाते हुए बुधवार को प्रति ट्रॉय औंस 4,000 डॉलर के प्रमुख स्तर से ठीक ऊपर के दायरे में कदम रखा। यह तीव्र पुलबैक अमेरिकी डॉलर में तेज मजबूती और ट्रेजरी यील्ड में उछाल के साथ हुआ है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, सोने का वायदा भाव (GC=F) 4,125 डॉलर के आसपास चल रहा है, जो पिछले बंद स्तर 4,187 डॉलर के मुकाबले 1.48 प्रतिशत नीचे है। इसका 52-हफ्तों का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि मौजूदा कारोबारी वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.75 गुना है।
तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई (RSI) 33 के स्तर पर है, जो अत्यधिक बिकवाली के करीब पहुंच रहा है। एमएसीडी (MACD) -71.05 पर है जो सिग्नल लाइन -53.32 से नीचे रहते हुए मंदी का संकेत दे रहा है। 50-दिवसीय ईएमए 4,324 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,439 डॉलर के साथ चार्ट पर डेथ क्रॉस बना हुआ है, जबकि 20-दिवसीय ईएमए 4,269 डॉलर पर है। बोलिंजर बैंड 4,085 डॉलर से 4,493 डॉलर के बीच फैला है और 14-दिवसीय एटीआर (ATR) 93.43 पर दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। ट्रेडिंग के लिए पिवट स्तर 4,138 डॉलर है, जिसमें रेजिस्टेंस R1 4,185 डॉलर और R2 4,245 डॉलर पर है, जबकि सपोर्ट S1 4,078 डॉलर और S2 4,031 डॉलर पर मौजूद है। विश्लेषकों के बीच चर्चा इस बात पर भी है कि क्या सोना 4,100 डॉलर और 4,200 डॉलर के बीच स्थिरता बनाए रख पाएगा।
क्रिप्टोकरेंसी और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की दुविधा
डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में भी व्यापक सुधार देखा गया है। बिटकॉइन में हालिया गिरावट 87,200 डॉलर के आपूर्ति क्षेत्र से खारिज होने के बाद शुरू हुई। पूरा ऑल्टकॉइन बाजार सुधारात्मक दौर में है, जिसमें एथेरियम 2,600 डॉलर के अपने अगले मुख्य सपोर्ट स्तर की ओर फिसल रहा है, जबकि रिपल (एक्सआरपी) 1.45 डॉलर के मांग क्षेत्र के करीब अपने निचले चरण को आगे बढ़ा रहा है।
दूसरी ओर, यूरोप में आर्थिक समीकरण जटिल होते जा रहे हैं। जब मुद्रास्फीति अपने तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तब यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के पास सामान्य स्थिति में ब्याज दरें बढ़ाना ही एकमात्र सीधा समाधान होता। हालांकि, मौजूदा हालात बेहद असामान्य हैं क्योंकि बॉन्ड बाजार पहले ही अपनी तरफ से वित्तीय सख्ती कर चुका है। इस स्थिति ने ईसीबी के नीति निर्माताओं को एक गंभीर असमंजस में डाल दिया है, जिससे भविष्य की मौद्रिक नीति को संतुलित करना अत्यधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।




















