वैश्विक वित्तीय बाजारों में बुधवार को उथल-पुथल तेज हो गई जब अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड नई ऊंचाइयों पर जा पहुंची। 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.35 प्रतिशत और 30-वर्षीय यील्ड 5.724 प्रतिशत के स्तर को छू गई, जो बीते 24 वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है। निवेशक मुद्रास्फीति की लगातार बनी चिंताओं और अमेरिकी राजकोषीय नीति को लेकर अतिरिक्त प्रीमियम मांग रहे हैं, जिससे डेट मार्केट में सरकारी प्रतिभूतियों की बिकवाली तेज हो गई है। कारोबार के दौरान 10-वर्षीय यील्ड तीन आधार अंकों से अधिक चढ़कर 5.31 प्रतिशत से ऊपर बनी रही। यील्ड में आए इस तेज उछाल ने अमेरिकी डॉलर को भारी मजबूती दी है, जिसके चलते अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.47 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा।
कर्ज बाजार में ऐतिहासिक उछाल और आगामी नीलामी का असर
अमेरिकी डेट मार्केट में यह हलचल ऐसे समय में आई है जब निवेशक फेडरल रिजर्व की सितंबर की बैठक के ब्योरे जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। इस नीतिगत ब्योरे से आगे की ब्याज दरों की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद की जा रही है। इसके साथ ही बाजार प्रतिभागियों की करीबी नजर 10-वर्षीय बॉन्ड की ताजा नीलामी पर भी टिकी हुई है, क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग 39 अरब डॉलर के 10-वर्षीय नोट्स बेचने की योजना पर काम कर रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी बॉन्ड बाजार में उतारे जाने से यील्ड पर लगातार दबाव बना हुआ है।
जुलाई के अंत के बाद से 10-वर्षीय ट्रेजरी नोट की यील्ड में 60 आधार अंकों से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया है। जुलाई के अंत में ही पश्चिम एशिया में तनाव नए सिरे से भड़क उठा था, जिसने कच्चे तेल की कीमतों को झटका दिया और उस दौरान वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की जोरदार उछाल आई थी। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने मुद्रास्फीति के दबाव को दोबारा जिंदा कर दिया, जिसके बाद केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की आशंकाएं बढ़ गईं। हालांकि अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में ठहराव की संभावनाएं जताई जा रही हैं, लेकिन ब्याज दर वायदा बाजार में दिसंबर की बैठक में बढ़ोतरी की आशंका लगभग 85 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है।
केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का आर्थिक गणित
वित्तीय संस्थान कर्जदारों से ऋण पर जो ब्याज वसूलते हैं और जमाकर्ताओं व बचतकर्ताओं को जो ब्याज देते हैं, वह सीधे तौर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा तय की जाने वाली आधार ब्याज दरों से प्रभावित होता है। केंद्रीय बैंकों का प्राथमिक दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना होता है, जिसके तहत अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाओं में लगभग 2 प्रतिशत की कोर मुद्रास्फीति दर का लक्ष्य रखा जाता है। जब मुद्रास्फीति इस लक्षित दायरे से नीचे फिसलती है, तो केंद्रीय बैंक आर्थिक गतिविधियों और कर्ज वितरण को बढ़ावा देने के लिए आधार दरों में कटौती करते हैं। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ऊपर निकल जाती है, तो मुद्रास्फीति पर लगाम कसने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाती है।
उच्च ब्याज दरें किसी देश की मुद्रा को मजबूती प्रदान करती हैं, क्योंकि वे वैश्विक निवेशकों के लिए अपनी पूंजी पार्क करने का अधिक आकर्षक जरिया बन जाती हैं। दूसरी ओर, फेडरल फंड्स रेट वह ओवरनाइट दर होती है जिस पर अमेरिकी वाणिज्यिक बैंक आपस में अल्पकालिक उधार लेनदेन करते हैं। यह फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) द्वारा तय की जाने वाली मुख्य सुर्खियां बटोरने वाली नीतिगत दर है। इसे एक दायरे में तय किया जाता है, जैसे कि 4.75 प्रतिशत से 5.00 प्रतिशत, जिसमें ऊपरी सीमा को उद्धृत आंकड़ा माना जाता है। भविष्य की फेड फंड्स दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को सीएमई फेडवॉच टूल ट्रैक करता है, जो आगामी मौद्रिक नीति के फैसलों के अनुमान पर दुनिया भर के वित्तीय बाजारों के रुख को आकार देता है।
मजबूत डॉलर और बढ़ती यील्ड के बीच सोने पर दबाव
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल और डॉलर की तेजी का सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा है। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर सोने की कीमतों पर दबाव डालती हैं क्योंकि वे ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों या बैंक में नकदी रखने की तुलना में बिना ब्याज वाली संपत्ति जैसे सोना रखने की अवसर लागत को बढ़ा देती हैं। इसके अलावा, ऊंची दरों के कारण अमेरिकी डॉलर महंगा होता है, और चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना डॉलर में ही मूल्यांकित होता है, इसलिए मजबूत डॉलर का सीधा असर सोने के भाव में गिरावट के रूप में दिखता है।
सोने ने मंगलवार की अपनी बढ़त गंवा दी और प्रति ट्रॉय औंस 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के ठीक ऊपर टिके रहने का प्रयास किया। बाजार के लाइव आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमत 4,128 डॉलर पर दर्ज की गई, जो पिछले बंद भाव 4,187 डॉलर की तुलना में 1.42 प्रतिशत कम है। इसका 52 हफ्तों का ट्रेडिंग दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच बना हुआ है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 0.75 गुना पर आ गया है। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 34 के स्तर पर कमजोर बना हुआ है, जबकि एमएसीडी -70.85 के स्तर पर अपने सिग्नल -53.28 से नीचे मंदी का संकेत दे रहा है। 20-दिवसीय घातीय चलती औसत (EMA) 4,269 डॉलर, 50-दिवसीय 4,325 डॉलर और 200-दिवसीय 4,439 डॉलर पर है। 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसलने से डेथ क्रॉस बना हुआ है, जो लंबी अवधि के डाउनट्रेंड की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय समर्थन स्तर लगभग 4,091 डॉलर और प्रतिरोध 4,480 डॉलर पर है, जबकि दैनिक आधार पर पिवट स्तर 4,139 डॉलर के पास है।
वैश्विक विदेशी मुद्रा और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में हलचल
बॉन्ड यील्ड के बढ़ने से विदेशी मुद्रा बाजार में भी तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) अपनी हालिया सुधार की चाल को आगे बढ़ाने में विफल रही और बुधवार को एशियाई सत्र में नकारात्मक रुझान के साथ 0.7000 के नीचे कारोबार करती दिखी। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच अमेरिकी यील्ड में ताजा उछाल ने डॉलर में खरीदारी को दोबारा सक्रिय कर दिया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक के सख्त रुख की उम्मीदों के बावजूद यह जोड़ी दबाव में बनी हुई है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी (USD/JPY) बुधवार के एशियाई सत्र में 158.50 के स्तर के पास डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर के करीब मंडराती रही। डॉलर के खरीदार अब आगे की तेजी के लिए 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज की बाधा को पार करने का इंतजार कर रहे हैं। बैंक ऑफ जापान की ओर से नीतिगत नरमी के संकेतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने इस जोड़ी को मजबूती दी है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के समक्ष भी नीतिगत दुविधाएं गहरी हो गई हैं। सामान्य परिस्थितियों में मुद्रास्फीति के लक्ष्य से दोगुना होने पर केंद्रीय बैंक आसानी से ब्याज दरें बढ़ाता है, लेकिन मौजूदा समय में बॉन्ड बाजार खुद ही वित्तीय स्थितियों को कड़ा कर रहा है, जिससे ईसीबी के लिए निर्णय लेना जटिल हो गया है। उधर, डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। 87,200 डॉलर के पास आपूर्ति का सामना करने के बाद बिटकॉइन में करेक्शन जारी रहा। अन्य प्रमुख क्रिप्टोकरेंसीज भी गिरावट के दौर में रहीं, जहां एथेरियम 2,600 डॉलर के अगले प्रमुख सपोर्ट की ओर फिसल गया और रिपल अपने 1.45 डॉलर के मांग क्षेत्र के करीब आ गया।


















