सर्दियों के मौसम में घरेलू उपयोग के लिए वाटर हीटर या गीज़र खरीदते समय सही क्षमता का चयन करना सबसे महत्वपूर्ण फैसला होता है। यदि उपकरण जरूरत से ज्यादा बड़ा खरीद लिया जाए, तो भारी मात्रा में पानी को गर्म रखने के चक्कर में बिजली की जबर्दस्त बर्बादी होती है और हर महीने बिल का बोझ बढ़ जाता है। वहीं दूसरी तरफ, यदि बहुत कम क्षमता वाला मॉडल चुन लिया जाए, तो कड़ाके की ठंड में एक व्यक्ति के नहाते ही गर्म पानी खत्म हो जाएगा और बाकी सदस्यों को लंबा इंतजार करना पड़ेगा। दो से चार सदस्यों की सामान्य पारिवारिक इकाई के लिए उपकरण की क्षमता, ऊर्जा दक्षता और इस्तेमाल के सही तौर-तरीकों को समझना बेहद जरूरी है।
परिवार के आकार के हिसाब से क्षमता का सही गणित
घरेलू उपयोग के लिहाज से देखा जाए तो दो सदस्यों वाले छोटे परिवार के लिए 15 लीटर की क्षमता वाला स्टोरेज वाटर हीटर पूरी तरह पर्याप्त रहता है। सुबह और शाम के वक्त दैनिक स्नान और जरूरी कार्यों के लिए इस क्षमता में जरूरत भर का पानी आसानी से उपलब्ध हो जाता है। जब परिवार में सदस्यों की संख्या तीन या चार हो, तब 25 लीटर क्षमता वाला मॉडल सबसे व्यावहारिक और बेहतरीन विकल्प साबित होता है। इस क्षमता का सबसे बड़ा लाभ यह है कि दो से तीन सदस्य बिना किसी रुकावट के एक के बाद एक आसानी से स्नान कर सकते हैं और बीच में पानी ठंडा होने की परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।
इसके विपरीत, 10 लीटर क्षमता वाला मॉडल दो से चार लोगों के लिए काफी छोटा पड़ जाता है, क्योंकि अत्यधिक सर्दी के दिनों में नल से आने वाले पानी का तापमान बहुत कम होता है और अधिक गर्म पानी की आवश्यकता होती है। वहीं 35 लीटर या उससे अधिक क्षमता का बड़ा वाटर हीटर इस आकार के परिवार के लिए पूरी तरह अनावश्यक साबित होता है। इतना बड़ा वाटर हीटर लगाने से टैंक में मौजूद अतिरिक्त पानी को गर्म रखने के लिए लगातार भारी ऊर्जा खर्च होती रहती है, जिससे बिजली बिल में बेवजह बढ़ोतरी होती है।
ऊर्जा दक्षता रेटिंग और गीज़र के प्रकार
बाजार में उपकरण की खरीदारी करते समय केवल टैंक की क्षमता देखना काफी नहीं है, बल्कि उस पर दर्ज स्टार लेबल को जांचना भी उतना ही जरूरी है। सरकार के ऊर्जा दक्षता ब्यूरो यानी बीईई द्वारा उपकरणों को 1 से 5 स्टार तक की रेटिंग प्रदान की जाती है। इस प्रणाली में 5 स्टार लेबल वाला मॉडल सबसे कम बिजली की खपत करता है और ऊर्जा की सर्वाधिक बचत सुनिश्चित करता है। हालांकि 3 स्टार या 4 स्टार वाले उपकरण भी कार्यक्षमता के मामले में अच्छे होते हैं, किंतु लंबे समय के खर्च और मासिक बिलों के संदर्भ में 5 स्टार मॉडल ही सबसे ज्यादा किफायती साबित होता है।
प्रौद्योगिकी और उपयोग के आधार पर घरों में मुख्य रूप से इंस्टेंट और स्टोरेज वाटर हीटर इस्तेमाल होते हैं, जिनमें स्टोरेज मॉडल ज्यादा लोकप्रिय हैं। इंस्टेंट मॉडल बटन चालू करते ही तुरंत गर्म पानी उपलब्ध कराते हैं, लेकिन उनके पानी का बहाव यानी फ्लो काफी धीमा होता है। इसके उलट स्टोरेज मॉडल पहले से पर्याप्त मात्रा में पानी को गर्म करके सुरक्षित रखते हैं, जिससे स्नान के समय तेज बहाव के साथ भरपूर पानी मिलता है।
बिजली की बचत और रखरखाव के जरूरी नियम
दैनिक जीवन में कुछ साधारण सावधानियां अपनाकर बिजली की खपत को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे अहम नियम यह है कि हीटर को केवल जरूरत के समय ही चालू किया जाए। स्नान करने से लगभग 15 से 20 मिनट पहले उपकरण को ऑन करना चाहिए और स्नान पूरा होते ही तुरंत बंद कर देना चाहिए। कई घरों में लोग पूरी रात उपकरण का स्विच ऑन छोड़ देते हैं, जिसके कारण पानी बार-बार ठंडा होकर दोबारा गर्म होता रहता है और बिजली का मीटर तेजी से भागता है।
उपकरण के तापमान नियंत्रक यानी थर्मोस्टेट को हमेशा 50 से 60 डिग्री के बीच सेट रखना सबसे सुरक्षित और किफायती तरीका है। यदि तापमान को 60 डिग्री से ऊपर रखा जाए तो बिजली की खपत अनावश्यक रूप से बढ़ जाती है और साथ ही हीटिंग एलिमेंट पर खारे पानी का मैल यानी स्केल भी बहुत तेजी से जमने लगता है।
इसके अलावा हीटर के स्टोरेज टैंक और गर्म पानी ले जाने वाले पाइपों की इंसुलेशन गुणवत्ता दुरुस्त रहनी चाहिए। समय बीतने के साथ पुराने मॉडल्स की इंसुलेशन परत कमजोर पड़ जाती है, जिससे टैंक की आंतरिक गर्मी बाहर निकलने लगती है और मशीन को बार-बार चालू होना पड़ता है। ऑटोमैटिक टाइमर लगाने से तय समय बाद उपकरण खुद ही बंद हो जाता है, जिससे मानवीय भूल की गुंजाइश खत्म हो जाती है। यदि प्रारंभिक स्तर पर इलेक्ट्रिक हीटर ही चुनना है, तो उच्च स्टार रेटिंग वाला मॉडल ही प्राथमिकता होना चाहिए, हालांकि पर्यावरण के अनुकूल सोलर वाटर हीटर का विकल्प भी मौजूद रहता है। समय-समय पर हीटर की अंदरूनी सर्विसिंग और सफाई करानी चाहिए, ताकि जमा मैल के कारण हीटिंग में देरी न हो और बिजली व्यर्थ न बहे।



















