भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने देशभर के मोबाइल और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। नियामक ने दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण विनियम, 2026 अधिसूचित कर दिया है, जिससे टेलीकॉम ऑपरेटरों और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं की मनमानी पर लगाम लगेगी। नए नियमों के प्रभावी होने के बाद कंपनियों के लिए ग्राहकों की तकनीकी अथवा बिलिंग से जुड़ी समस्याओं को टालना संभव नहीं रहेगा। इस बदलाव के तहत हर टेलीकॉम कंपनी को सातों दिन चौबीसों घंटे ग्राहक सेवा सहायता उपलब्ध करानी होगी। इसके साथ ही मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने पर सेवा प्रदाताओं के खिलाफ कड़े वित्तीय जुर्माने का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
हेल्पलाइन अब 24 घंटे खुली रहेगी और मानव सहायकों की मौजूदगी होगी जरूरी
ट्राई ने सेवा प्रदाताओं के शिकायत केंद्रों के संचालन समय को प्रतिदिन 16 घंटे से बढ़ाकर हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे कर दिया है। तकनीकी प्रगति के दौर में ऑपरेटरों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI चैटबॉट्स और स्वचालित तकनीकी प्रणालियों के उपयोग की छूट दी गई है, लेकिन नियामक ने यह स्पष्ट किया है कि केवल रोबोटिक जवाबों के भरोसे ग्राहकों को नहीं छोड़ा जा सकता। इन स्वचालित प्रणालियों की सतत निगरानी के लिए मानव कर्मियों की तैनाती अनिवार्य होगी। नए दिशानिर्देशों के तहत प्रतिदिन कम से कम 16 घंटे इंसानी प्रतिनिधियों की सक्रिय उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी, ताकि उपभोक्ता सीधे बात करके अपनी जटिल तकनीकी समस्याओं का समाधान पा सकें।
मोबाइल ऐप से सीधे दर्ज होंगी शिकायतें और अपील
पारंपरिक कॉल सेंटर पर लगने वाली लंबी प्रतीक्षा अवधि और ईमेल पत्राचार के झंझट को समाप्त करने के लिए नियमों को पूरी तरह डिजिटल माध्यमों के अनुकूल बनाया गया है। ग्राहकों को मौजूदा वेबसाइटों, वेब पोर्टल्स और टेलीफोन कॉल सेंटरों के अलावा अब एक अतिरिक्त सशक्त विकल्प मिलेगा। उपभोक्ता अब अपने सेवा प्रदाता के आधिकारिक मोबाइल ऐप्लिकेशन का इस्तेमाल करके सीधे शिकायत पंजीकृत करा सकेंगे, आवश्यक सर्विस रिक्वेस्ट सबमिट कर सकेंगे और असंतोष की स्थिति में अपील भी दायर कर सकेंगे।
10,000 ग्राहकों वाले इंटरनेट सेवा प्रदाता भी दायरे में शामिल
नियामक ने नियमों के दायरे का विस्तार करते हुए ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं को बड़ी राहत दी है। पहले केवल 5 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार वाले प्रदाताओं पर यह नियम लागू होते थे, लेकिन अब उस टर्नओवर शर्त को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। नए प्रावधान के तहत वे सभी इंटरनेट सेवा प्रदाता (आईएसपी) इन कड़े नियमों के दायरे में आएंगे, जिनके पास पिछले वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 10,000 से अधिक सक्रिय ग्राहक दर्ज थे। इससे देश के छोटे और मझोले ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जुड़े लाखों उपभोक्ताओं को भी बेहतर सेवा गारंटी मिल सकेगी।
अपील प्रक्रिया के लिए 15 दिन की सख्त समयसीमा
यदि कोई ग्राहक शिकायत निवारण के बाद कंपनी द्वारा दिए गए समाधान से संतुष्ट नहीं होता है, तो उसे समाधान मिलने के 15 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर करने का अधिकार होगा। कंपनी के भीतर गठित अपीलीय प्राधिकरण को ऐसी अपील प्राप्त होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर संपूर्ण जांच पूरी करके अपना अंतिम निर्णय देना अनिवार्य होगा। जवाबदेही को उच्च स्तर पर सुनिश्चित करने के लिए ट्राई ने यह नियम तय किया है कि अपीलीय प्राधिकरण में कंपनी के प्रबंधन स्तर से जुड़े ऐसे नियमित अधिकारी ही शामिल होंगे, जिनके पास कम से कम 5 वर्ष का कारपोरेट कार्य अनुभव हो।
संतुष्टि सर्वे और बोर्ड स्तर पर त्रैमासिक जवाबदेही
सिर्फ शिकायत के रिकॉर्ड को बंद यानी क्लोज दिखा देना कंपनियों के लिए पर्याप्त नहीं माना जाएगा, बल्कि समाधान की वास्तविक गुणवत्ता को प्रमाणित करना होगा। प्रत्येक शिकायत या अपील का निपटारा होने के पश्चात सेवा प्रदाता को 5 अंकों के पैमाने पर एक अनिवार्य ऑनलाइन फीडबैक सर्वेक्षण संचालित करना होगा। इस पैमाने पर 5 का अर्थ 'पूरी तरह संतुष्ट' और 1 का अर्थ 'पूरी तरह असंतुष्ट' निर्धारित किया गया है। सेवा प्रदाताओं को इस संतुष्टि सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट प्रत्येक तिमाही अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करनी होगी। इसके अलावा, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर तिमाही शिकायतों, अपीलों और फीडबैक के समग्र आंकड़ों की विस्तृत रिपोर्ट सीधे कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और निदेशक मंडल के समक्ष समीक्षा हेतु प्रस्तुत की जाएगी। यदि कोई कंपनी निर्धारित समयसीमा का पालन करने में विफल रहती है या सेवा मानकों का उल्लंघन करती है, तो उस पर वित्तीय जुर्माना लगाया जाएगा।
दिव्यांग उपभोक्ताओं के लिए सुलभता और विशेष हेल्प डेस्क
दिव्यांगजनों की संचार आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सभी सेवा प्रदाताओं को अपने कॉल सेंटरों और उपभोक्ता सहायता केंद्रों में समर्पित हेल्प डेस्क अथवा विशेष हेल्पलाइन स्थापित करनी होगी। इन केंद्रों पर प्रशिक्षित स्टाफ और सहायक प्रौद्योगिकियां तैनात रहेंगी। इसके साथ ही, दूरसंचार कंपनियों को अपने मोबाइल ऐप्लिकेशन और आधिकारिक वेब पोर्टलों को दिव्यांगजनों के लिए जारी अनिवार्य सरकारी डिजिटल सुलभता मानकों के पूर्णतः अनुरूप तैयार करना होगा।



















