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भारत में निर्माण के बावजूद क्यों महंगे बिकते हैं आईफोन? जानिए दाम से जुड़े हर एक सवाल का जवाबतकनीक
10 सित॰ 2026, 7:51 am (48 दिन पहले)· 4

भारत में निर्माण के बावजूद क्यों महंगे बिकते हैं आईफोन? जानिए दाम से जुड़े हर एक सवाल का जवाब

भारत में आईफोन की असेंबली होने के बावजूद इनकी कीमतें क्यों आसमान छूती हैं? जानिए इंपोर्ट ड्यूटी, जीएसटी, महंगे कंपोनेंट्स और ऐपल की प्रीमियम ब्रांड रणनीति का पूरा गणित।

बाजार में हर नए आईफोन के आने के साथ ही दाम को लेकर बहस छिड़ जाती है कि आखिर ये फोन इतने महंगे क्यों होते हैं। इस बार भी यही स्थिति देखने को मिली है जब कंपनी ने अपने नए मॉडल पेश किए हैं। हाल ही में बाजार में उतारे गए आईफोन 18 प्रो, आईफोन 18 प्रो मैक्स और ऐपल के पहले फोल्डेबल फोन आईफोन डुओ ने इस पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है कि भारत में फोन बनने के बाद भी खरीदारों को भारी-भरकम कीमत क्यों चुकानी पड़ती है। यह सवाल केवल उन लोगों के जेहन में नहीं आता जो नया फोन खरीदने की सोचते हैं, बल्कि वे लोग भी हैरान रहते हैं जो सिर्फ कीमतें देखकर ही कतरा जाते हैं। ऐपल हर साल अपने नए मॉडल के साथ दाम का दायरा और बढ़ा देती है, जिससे आम आदमी की पहुंच से ये डिवाइस दूर होते जाते हैं।

भारी-भरकम कीमतें और नए मॉडल्स का गणित

अगर मौजूदा सीरीज की बात करें तो भारत में आईफोन 18 प्रो की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपये तय की गई है। वहीं इसके बड़े वर्जन यानी आईफोन 18 प्रो मैक्स की शुरुआती कीमत 1,79,900 रुपये है। इसके अलावा इस बार लॉन्च हुआ सबसे खास और नया फोन आईफोन डुओ है, जिसकी शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये रखी गई है। जब इन आंकड़ों की तुलना अमेरिका के बाजारों से की जाती है तो अंतर साफ नजर आता है कि भारत में ये फोन काफी ज्यादा महंगे बिकते हैं। उपभोक्ताओं के मन में यही मुख्य सवाल रहता है कि जब सरकार के मेक इन इंडिया अभियान के तहत फोन की असेंबली अब देश के भीतर ही हो रही है, तो फिर दामों में कोई खास राहत क्यों नहीं मिल रही है?

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आयातित पार्ट्स और टैक्स का भारी बोझ

इस पूरी पहेली का सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत में आईफोन का काम मुख्य रूप से केवल असेंबली तक ही सीमित है। इसका मतलब यह है कि पूरा फोन यहां डिजाइन और निर्मित नहीं होता, बल्कि इसके सबसे महंगे और जरूरी हिस्से जैसे प्रोसेसर, डिस्प्ले, कैमरा सेंसर और मेमोरी चिप अभी भी विदेशों से मंगवाए जाते हैं। ताइवान, साउथ कोरिया, जापान और चीन जैसे देशों से आने वाले इन कंपोनेंट्स पर भारी-भरकम इंपोर्ट ड्यूटी चुकानी पड़ती है। इसके बाद जब फोन पूरी तरह तैयार होता है, तो उस पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी भी जोड़ दिया जाता है। विभिन्न उद्योग अनुमानों के अनुसार, एक आईफोन की कुल खुदरा कीमत का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा केवल विभिन्न करों और शुल्कों की भेंट चढ़ जाता है, जिससे दाम सीधे ऊपर चले जाते हैं।

ऐपल की प्रीमियम ब्रांड रणनीति और स्टेटस सिंबल

सिर्फ टैक्स ही नहीं, बल्कि खुद ऐपल की व्यावसायिक रणनीति भी कीमतों को नियंत्रित रखने के बजाय ऊंचा बनाए रखने पर जोर देती है। कंपनी अपने उत्पादों को एक आम उपभोक्ता वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रीमियम और लग्जरी ब्रांड के तौर पर पेश करती है। बड़ी संख्या में कम कीमत पर फोन बेचने की बजाय ऐपल कम संख्या में लेकिन बेहद ऊंचे दामों पर अमीर और संपन्न ग्राहकों को अपना मुख्य टारगेट बनाती है। भारत जैसे बड़े बाजार में आईफोन को आज भी एक बड़े स्टेटस सिंबल के रूप में देखा जाता है, यही वजह है कि कंपनी कीमतों में कटौती करने के बारे में विचार नहीं करती। इसके उलट, हर साल फोन में नए हार्डवेयर, बेहतर कैमरा, तेज प्रोसेसर और आधुनिक एआई फीचर्स जोड़कर इसके दाम और ज्यादा बढ़ा दिए जाते हैं।

नई तकनीक और घटते रुपये का असर

आईफोन 18 सीरीज में इस बार कई बड़े तकनीकी बदलाव किए गए हैं, जिसमें ए20 प्रो चिप, वैरिएबल एपर्चर कैमरा और लंबी बैटरी लाइफ जैसी खूबियां शामिल हैं। वहीं आईफोन डुओ तो पूरी तरह से एक नए फॉर्म फैक्टर पर आधारित है। फोल्डेबल स्क्रीन, बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन और जटिल डिजाइन की वजह से इसकी लागत और भी ज्यादा आती है। इन तमाम आधुनिक तकनीकों पर होने वाले भारी रिसर्च और डेवलपमेंट का खर्च अंततः ग्राहकों से ही वसूला जाता है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आती कमजोरी भी कीमतों को बढ़ाने में एक अहम भूमिका निभाती है क्योंकि तमाम आयातित पार्ट्स का भुगतान डॉलर में ही किया जाता है। स्थानीय उत्पादन से कंपनी को टैक्स बचाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने का फायदा जरूर मिलता है, लेकिन वह पूरी राहत ग्राहकों तक नहीं पहुंचती क्योंकि कंपनियां अपना मुनाफा सुरक्षित रखती हैं।

सवाल-जवाब

भारत में आईफोन 18 प्रो की शुरुआती कीमत क्या है?
भारत में आईफोन 18 प्रो की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपये रखी गई है।
भारत में बनने के बावजूद आईफोन महंगे क्यों रहते हैं?
प्रोसेसर और डिस्प्ले जैसे महंगे पार्ट्स विदेशों से आयात किए जाते हैं जिन पर भारी इंपोर्ट ड्यूटी और 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है।
आईफोन की कुल कीमत का कितना हिस्सा टैक्स में जाता है?
कुछ अनुमानों के मुताबिक आईफोन की कुल कीमत का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ टैक्स और ड्यूटी का होता है।
आईफोन डुओ की शुरुआती कीमत कितनी है?
ऐपल के पहले फोल्डेबल फोन आईफोन डुओ की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये है।
क्या भारत में आईफोन का पूरा निर्माण होता है?
नहीं, भारत में आईफोन का ज्यादातर काम केवल असेंबली तक ही सीमित है।
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