पौराणिक गाथाओं को सिनेमा के पर्दे पर उतारने का चलन इन दिनों भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में काफी तेजी से बढ़ रहा है। इसी सिलसिले में भगवान कृष्ण के जीवन और दर्शन पर आधारित फिल्म 'कृष्णावतारम: पार्ट 1 – हृदयम' ने सिनेमाप्रेमियों का भरपूर ध्यान खींचा था। यह फिल्म इस साल 7 मई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी। जब यह फिल्म बड़े पर्दे पर आई थी, तो इसकी कहानी के साथ-साथ इसके कई चुनिंदा दृश्यों और मेकिंग को लेकर भी काफी बातचीत हुई थी। अब इसी कड़ी में मेकर्स ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए इस फिल्म को भारत की सीमाओं से बाहर दुनिया भर के दर्शकों तक ले जाने का पक्का इरादा कर लिया है। 'हनुमान अंश' के 7 अगस्त को सिनेमाघरों में उतरने से लगभग तीन महीने पहले पर्दे पर आई कान्हा की यह अनोखी कथा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी गूंज बिखेरने की पूरी तैयारी में है।
'हनुमान अंश' से तीन महीने पहले सिनेमाघरों में आई थी फिल्म
इस साल पौराणिक विषयों पर बनी फिल्मों के लिहाज से एक दिलचस्प बात यह भी देखने को मिली कि 'कृष्णावतारम पार्ट 1' ने 7 मई को अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि इसके लगभग तीन महीने बाद 'हनुमान अंश' ने 7 अगस्त को सिनेमाघरों का रुख किया। इसका मतलब साफ है कि 'हनुमान अंश' के बड़े पर्दे पर आने से काफी पहले ही भगवान कृष्ण की कथा ने दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना ली थी। 'कृष्णावतारम पार्ट 1-हृदयम' में कृष्ण के जीवन प्रसंगों और उनकी दिव्य लीलाओं को एक नए सिनेमाई दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है। फिल्म के कई सीन्स ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया और इसके विजुअल ट्रीटमेंट की भी काफी सराहना हुई। भगवान कृष्ण के अलग-अलग रूपों और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को जिस भव्यता के साथ पर्दे पर उतारने का प्रयास किया गया, उसने इस प्रोजेक्ट को एक खास पहचान दिलाई है।
शानदार दृश्य और कृष्ण के विभिन्न रूपों ने खींचा ध्यान
इस फिल्म की रिलीज के बाद से ही इसके विजुअल सीन्स की खूब चर्चा रही है। कृष्ण की बाल अवस्था की लीलाओं से लेकर उनके व्यक्तित्व के अन्य पहलुओं तक, हर एक हिस्से को पर्दे पर बेहद प्रभावशाली ढंग से दिखाने पर पूरा जोर दिया गया है। पारंपरिक और पौराणिक माहौल के साथ-साथ भव्य दृश्यों और एक गहरी आध्यात्मिक भावना का मेल दर्शकों को अपनी ओर खींचने में सफल रहा। यही मुख्य वजह है कि फिल्म के रिलीज होने के तुरंत बाद से ही दर्शकों के बीच इसके खास दृश्यों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। फिल्म ने भगवान कृष्ण की इस कहानी को महज एक धार्मिक कथा के रूप में दिखाने के बजाय इसे एक संपूर्ण और भव्य सिनेमाई अनुभव में बदलने की पूरी कोशिश की है, जो हर वर्ग के दर्शक को अपने साथ जोड़ सके।
अब भारत की सीमाओं से बाहर पहुंचेगी कान्हा की कहानी
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर 'कृष्णावतारम' फिल्म को लेकर एक बहुत बड़ी रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की गई है। क्रिएटिवलैंड स्टूडियोज और आर्ट ऑफ लिविंग के वर्ल्ड फोरम फॉर आर्ट एंड कल्चर यानी WFAC ने इस फिल्म और इसकी पूरी ट्रिलॉजी को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने के लिए आपस में हाथ मिलाया है। इस महत्वपूर्ण सहयोग को आधिकारिक जामा पहनाने के लिए दोनों पक्षों के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी MOU पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पूरी पहल को आध्यात्मिक गुरु गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का बहुमूल्य मार्गदर्शन और पूरा समर्थन भी प्राप्त है। उनका यह जुड़ाव फिल्म को भारतीय संस्कृति, कला और प्राचीन आध्यात्मिक विरासत को पूरी दुनिया के सामने पेश करने वाले एक बहुत बड़े वैश्विक प्रोजेक्ट के रूप में स्थापित करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।
चार प्रमुख भाषाओं में होगा फिल्मों का ग्लोबल सफर
इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक सुलभ बनाने के लिए इसे हिंदी, तमिल, तेलुगु और अंग्रेजी जैसी चार प्रमुख भाषाओं में रिलीज करने की पुख्ता योजना बनाई गई है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य केवल विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के दर्शकों को अपने साथ जोड़ना नहीं है, बल्कि उन ग्लोबल दर्शकों तक भी भगवान कृष्ण की कहानी पहुंचाना है जिनकी भारतीय पौराणिक कथाओं और दर्शन में गहरी दिलचस्पी है। 'कृष्णावतारम' का विजन सिर्फ फिल्मों के दायरे तक ही सीमित नहीं रखा गया है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को आने वाले समय में वेब सीरीज, संगीत एलबम, लाइव एक्सपीरियंस शोज, गेमिंग, शिक्षा और इमर्सिव कल्चरल एक्सपीरियंस जैसे तमाम आधुनिक माध्यमों से भी जोड़ने की पूरी योजना सामने आई है। इसका मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में कृष्ण की इस कथा को आधुनिक टेक्नोलॉजी और माध्यमों के जरिए एक बड़े सांस्कृतिक अनुभव में बदलने का प्रयास किया जाएगा।



















