सामान्य तौर पर किसी भी देश या राज्य के संचालन के लिए सरकार, संविधान और कायदे-कानूनों की रूपरेखा तय की जाती है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक गणित शिक्षक ने इस अवधारणा को एक बिल्कुल ही अलग और अनूठा रूप दे दिया है। शिक्षक अमित चौधरी ने अपनी दैनिक जीवनचर्या और गतिविधियों को अधिक बेहतर ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से अपनी एक निजी सरकार का गठन किया है। इस अनूठी व्यवस्था के लिए उन्होंने बाकायदा एक संविधान तैयार किया, जिसमें विभिन्न नियम, धाराएं, पुरस्कारों का प्रावधान और गलतियों के लिए सजा तक तय की गई है। उनकी यह अनोखी पहल और गणित विषय को रोचक बनाने के उनके प्रयासों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान दिलाई है।
छात्र जीवन के विचारों से मिली प्रेरणा
क्षेत्र के छात्र उन्हें प्यार से अमित सर या अमित चौधरी मैथमेटिक्स टीचर के रूप में संबोधित करते हैं। अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए वह बताते हैं कि जब वह 12वीं कक्षा में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, उस दौर के विद्यालयों में यदि मैं प्रधानमंत्री होता तो क्या करता जैसे विषयों पर निबंध लिखने की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती थीं। इसी विचार ने उनके बाल मन पर गहरा प्रभाव डाला और आगे चलकर खुद की एक सरकार स्थापित करने का जुनून उनके भीतर पैदा हो गया। फिल्मों के मुहूर्त दृश्यों और विभिन्न सरकारों की कार्यप्रणालियों व योजनाओं से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने अपनी इस व्यक्तिगत संस्था की स्थापना की।
अपनी इस अनूठी व्यवस्था के बारे में वह आगे बताते हैं कि सरकार के गठन के लगभग दो साल बाद जब उन्हें यह महसूस हुआ कि कई महत्वपूर्ण कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरे नहीं हो रहे हैं और कार्यप्रणाली में कुछ त्रुटियां आ रही हैं, तब उन्होंने अपनी इस सरकार के लिए एक लिखित संविधान तैयार किया। इस संविधान में हर छोटी-बड़ी गतिविधि के लिए नियम, धाराएं, प्रोत्साहन के रूप में पुरस्कार और अनुशासनहीनता के लिए सजा निर्धारित की गई। उनका मानना है कि उनके द्वारा बनाया गया यह संविधान उनके लिए किसी धार्मिक ग्रंथ की भांति अत्यंत पवित्र और पूजनीय है।
गणित को सरल बनाने के लिए 17 साल का शोध
अमित चौधरी की यह विशिष्ट पहचान केवल उनकी इस निजी प्रशासनिक व्यवस्था तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। गणित जैसे डरावने माने जाने वाले विषय को छात्रों के लिए बेहद आसान और रुचिकर बनाने के लिए उन्होंने एब्सट्रैक्ट, एप्लाइड और वैदिक गणित की विधाओं को आपस में जोड़कर एक नवीन और एकीकृत प्रणाली विकसित की है। उनका दृढ़ विश्वास है कि गणित मूल रूप से कोई कठिन विषय नहीं है, बल्कि इसके लिए केवल विभिन्न अध्यायों और टॉपिक्स के बीच की आपसी कनेक्टिविटी को समझने की आवश्यकता होती है।
त्रिकोणमिति, कोऑर्डिनेट ज्योमेट्री, कैलकुलस, बीजगणित और प्रायिकता जैसे जटिल विषयों को एक साथ पिरोने के इस वैज्ञानिक और शैक्षणिक प्रयोग पर उन्होंने लगातार करीब 17 साल तक गहन अनुसंधान और कार्य किया। इस लंबी मेहनत के बाद उन्होंने देश भर के 11 अलग-अलग राज्यों का भ्रमण किया और हजारों मैथमेटिक्स शो के माध्यम से स्कूली बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी गणित पढ़ाने और सीखने के अत्यंत सरल तरीके समझाए।
किताब का विमोचन और विशेष डाक टिकट
शिक्षा जगत में उनके इन अमूल्य और अनूठे प्रयासों की गूंज उच्च स्तर तक पहुंच चुकी है। उनकी दूसरी पुस्तक मैथमेटिको ने साहित्यिक और शैक्षणिक हलकों में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इस पुस्तक के संबंध में उनका कहना है कि इसका आधिकारिक विमोचन देश के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ था। इसके अतिरिक्त, भारतीय डाक विभाग ने भी उनके इन विशिष्ट शैक्षणिक कार्यों और समाज को दिए गए योगदान का सम्मान करते हुए अपनी विशेष माय स्टैम्प योजना के अंतर्गत उनके नाम पर दो अलग-अलग डाक टिकट जारी किए थे।



















