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टोलीचौकी की गलियों में धड़कता है अफ्रीका, अनूठी संस्कृति और खानपान से आबाद हुई यह बस्तीतेलंगाना
5 अक्तू॰ 2026, 8:34 pm (53 मिनट पहले)· 0

टोलीचौकी की गलियों में धड़कता है अफ्रीका, अनूठी संस्कृति और खानपान से आबाद हुई यह बस्ती

हैदराबाद के टोलीचौकी इलाके में स्थित पैरामाउंट कॉलोनी और सनसिटी अफ्रीकी संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों और वैश्विक ताने-बाने का प्रमुख केंद्र बन चुके हैं.

चारमीनार की ऐतिहासिक पहचान, मोतियों की चमक और लजीज बिरयानी के लिए पहचाने जाने वाले हैदराबाद का एक कोना ऐसा भी है, जहां पहुंचते ही माहौल पूरी तरह बदल जाता है. शहर के टोलीचौकी क्षेत्र में आने वाली पैरामाउंट कॉलोनी और सनसिटी की गलियों में कदम रखते ही किसी अफ्रीकी देश के जीवंत बाजार का अहसास होने लगता है. स्थानीय लोग अब इस पूरे दायरे को 'लिटिल अफ्रीका' के नाम से पुकारते हैं. दिन ढलने के बाद यहां की रौनक देखते ही बनती है, जहां विदेशी जीवनशैली और भारतीय माहौल का अनूठा संगम देखने को मिलता है.

परंपरा, परिधान और मसालों की खुशबू

शाम होते ही इन सड़कों पर पारंपरिक लंबे कुर्ते पहने लोग टहलते दिखाई देते हैं. चारों तरफ अरबी और अफ्रीकी भाषाओं की गूंज सुनाई देती है, जबकि स्थानीय भोजनालयों और कैफे से उठती खास मसालों की महक हवा में घुल जाती है. यहां सोमालिया, सूडान, यमन, एरिट्रिया और नाइजीरिया जैसे तमाम मुल्कों के लोग बड़ी तादाद में रह रहे हैं. इस बस्ती की अपनी एक पूरी आत्मनिर्भर दुनिया है, जहां दुकानों पर अरबी और सोमाली भाषा के साइनबोर्ड लगे हैं, खास हेयर सैलून मौजूद हैं और किराना दुकानों पर विदेशों से आने वाली विशेष सामग्रियां आसानी से मिल जाती हैं. स्थानीय खान-पान के अड्डों पर फाउल, सबायाड, अगाशी चिकन और खास मसालों से तैयार की जाने वाली सोमाली चाय के मुरीद हर शाम जुटते हैं.

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सस्ती पढ़ाई और इलाज ने खींचा दायरा

हैदराबाद के इस हिस्से में अफ्रीकी समुदाय का यह जमावड़ा रातों-रात खड़ा नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे शहर के मजबूत शैक्षणिक और स्वास्थ्य संसाधन जिम्मेदार हैं. उस्मानिया यूनिवर्सिटी और इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेस यूनिवर्सिटी (EFLU) जैसे बड़े संस्थानों में अंग्रेजी माध्यम की गुणवत्तापूर्ण और किफायती उच्च शिक्षा अफ्रीकी नौजवानों को आकर्षित करती है. इसके साथ ही हैदराबाद के सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों का आधुनिक मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और वहां मिलने वाला सस्ता उपचार अफ्रीकी मुल्कों के मरीजों को मेडिकल टूरिज्म के जरिए यहां पहुंचाता है. छात्र और मरीज दोनों मिलकर इस इलाके को अपनी जरूरतों के मुताबिक ढाल चुके हैं.

निजामों के दौर से जुड़ा ऐतिहासिक नाता

हैदराबाद और अफ्रीकी महाद्वीप का यह संबंध कोई हालिया घटनाक्रम नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें इतिहास में काफी गहरी हैं. आसफ जाही रियासत के छठे निज़ाम महबूब अली पाशा ने अपने शासनकाल में अफ्रीकी सैनिकों की एक विशेष घुड़सवार टुकड़ी बनाई थी, जिसे 'अफ्रीकन कैवेलरी गार्ड्स' कहा जाता था. इसी सैन्य रेजिमेंट की याद में आज भी शहर में 'एसी गार्ड्स' नाम का इलाका आबाद है, जहां ऐतिहासिक सिद्दी समुदाय की पीढ़ियां पीढ़ियों से बसती आ रही हैं. इतिहास के उसी पुराने रिश्ते को आज टोलीचौकी का आधुनिक दायरा शिक्षा, व्यापार और चिकित्सा के दम पर एक नए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक विस्तार दे रहा है.

सवाल-जवाब

हैदराबाद के किस इलाके को 'लिटिल अफ्रीका' के नाम से जाना जाता है?
हैदराबाद में टोलीचौकी के अंतर्गत आने वाली पैरामाउंट कॉलोनी और सनसिटी के इलाके को 'लिटिल अफ्रीका' कहा जाता है.
इस इलाके में मुख्य रूप से किन देशों के नागरिक रहते हैं?
यहां सोमालिया, सूडान, यमन, एरिट्रिया और नाइजीरिया सहित कई अफ्रीकी मुल्कों के लोग बड़ी संख्या में बसे हैं.
अफ्रीकी छात्र मुख्य रूप से किन संस्थानों में पढ़ाई करने हैदराबाद आते हैं?
छात्र मुख्य रूप से उस्मानिया यूनिवर्सिटी और इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेस यूनिवर्सिटी (EFLU) जैसे संस्थानों में किफायती अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई के लिए आते हैं.
हैदराबाद का मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर विदेशी नागरिकों को कैसे आकर्षित करता है?
शहर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में मिलने वाला गुणवत्तापूर्ण और सस्ता इलाज मरीजों को मेडिकल टूरिज्म के तहत यहां खींचता है.
टोलीचौकी के भोजनालयों में कौन-से पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं?
यहां के कैफे और भोजनालयों में फाउल, सबायाड, अगाशी चिकन और खास मसालों वाली सोमाली चाय मुख्य रूप से मिलती है.
हैदराबाद के एसी गार्ड्स इलाके का इतिहास क्या है?
छठे निज़ाम महबूब अली पाशा ने अफ्रीकी सैनिकों की 'अफ्रीकन कैवेलरी गार्ड्स' नामक घुड़सवार टुकड़ी बनाई थी, जिसके नाम पर आज भी एसी गार्ड्स इलाका आबाद है.
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टिप्पणियाँ 1

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 मिनट पहले

पिछली बार जब मैं टोलीचौकी गया था, तो वहाँ एक छोटी सी दुकान पर सोमाली चाय पी थी। सच में, ऐसा लगा ही नहीं कि मैं हैदराबाद में हूँ, पूरा माहौल ही अलग था।

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