39 वर्ष की उम्र में नोवाक जोकोविच के पास वह सब कुछ है जिसे हासिल करने का सपना दुनिया का हर टेनिस खिलाड़ी देखता है। पुरुष टेनिस इतिहास में सबसे ज्यादा 24 ग्रैंड स्लैम एकल खिताब और सर्वाधिक मास्टर्स 1000 ट्रॉफियां उनके नाम दर्ज हैं। इसी वर्ष जनवरी में ऑस्ट्रेलिया ओपन के फाइनल तक का सफर तय करने वाले इस सर्बियाई खिलाड़ी ने दिग्गज प्रतिद्वंद्वी यानिक सिनर जैसे युवा खिलाड़ियों को हराकर फिर साबित किया कि उनका दबदबा बरकरार है। इसके बावजूद, अमेज़न पर आई एक नई वृत्तचित्र में जोकोविच ने अपनी मानसिक स्थिति और अंदरूनी संघर्षों पर खुलकर बात की है। उनका कहना है कि वे कभी अपनी उपलब्धियों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो पाते और हर पल खुद को और बेहतर बनाने की होड़ में वे खुद ही अपनी सोच के बंदी बन जाते हैं।
अपनी ही क्षमताओं पर लगातार सवाल उठाने वाला चैंपियन
टेनिस की दुनिया में नोवाक जोकोविच का नाम सफलता का दूसरा पर्याय बन चुका है। साल 2023 में अमेरिका ओपन जीतकर उन्होंने 24वें ग्रैंड स्लैम पर कब्जा जमाया था और ऑस्ट्रेलिया की महान महिला खिलाड़ी मारग्रेट कोर्ट के सर्वकालिक सर्वाधिक 24 एकल ग्रैंड स्लैम रिकॉर्ड की बराबरी की थी। हालांकि, इतनी विशाल सफलताओं के बाद भी जोकोविच का मानना है कि वे खुद के सबसे बड़े आलोचक हैं। उनका कहना है कि वे हर रोज अपनी सीमाओं को पीछे धकेलने और खुद को गलत साबित करने में जुटे रहते हैं।
उनकी पत्नी येलेना जोकोविच ने भी इस महान खिलाड़ी की मनोदशा पर बात की है। येलेना के अनुसार, संन्यास को लेकर जोकोविच के मन में हमेशा तरह-तरह के विचार आते रहते हैं। वे एक ऐसा मानसिक बोझ लेकर चलते हैं जहां उन्हें लगता है कि वे चाहे जितना भी हासिल कर लें, वह कभी पर्याप्त नहीं होगा। येलेना बताती हैं कि कोर्ट ही वह अकेली जगह है जहां जोकोविच खुद को सबसे ज्यादा सुरक्षित, सार्थक और योग्य महसूस करते हैं।
युद्ध के साए और गरीबी में बीता बचपन
नोवाक जोकोविच की इस अजेय मानसिकता की जड़ें उनके कठिन बचपन से जुड़ी हुई हैं। बेलग्रेड में जन्मे जोकोविच ने वर्ष 1999 में मार्च से जून के दौरान सर्बिया की राजधानी पर हुए नाटो के बमवर्षक छापों का सामना किया था। उस समय वे महज एक छोटे बच्चे थे। वे याद करते हैं कि कैसे रात के समय बमबारी शुरू होने पर उनका परिवार बिना बम शेल्टर वाली इमारत से भागकर दूसरी सुरक्षित जगह जाने की कोशिश करता था। एक बार भागते समय वे सड़क पर गिर गए थे और पूरा परिवार आगे निकल गया था। जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, तो एक लड़ाकू विमान ने पास के अस्पताल पर दो बम गिरा दिए थे।
उन कठिन दिनों में उनके परिवार को दैनिक राशन के लिए हर रोज कई घंटों तक ब्रेड और दूध की लाइनों में खड़ा रहना पड़ता था। एक इंटरव्यू में जोकोविच ने कहा था कि उन चुनौतियों ने ही उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी और बेहतर इंसान बनाया है। वे उन बुरे दिनों को लेकर कोई शिकायत या गुस्सा नहीं रखते, बल्कि उन परिस्थितियों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं क्योंकि उन्हीं घटनाओं ने उनके चरित्र की नींव रखी। बचपन के एक पुराने टेलीविजन इंटरव्यू में भी जब उनसे टेनिस के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने इसे एक बड़ी जिम्मेदारी बताया था और कहा था कि उनका इकलौता लक्ष्य दुनिया का चैंपियन बनना है।
एलीट खेल में बाहरी खिलाड़ी का संघर्ष
टेनिस पारंपरिक रूप से एक बेहद खर्चीला और कुलीन वर्ग का खेल माना जाता रहा है। जोकोविच का परिवार बेहद साधारण था। अपने शुरुआती करियर को आर्थिक सहारा देने के लिए उनके पिता को गलत लोगों से भारी ब्याज पर कर्ज तक लेना पड़ा था। जब जोकोविच ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखा, तब दुनिया पर रोजर फेडरर और राफेल नडाल की प्रतिद्वंद्विता का जादू छाया हुआ था। दर्शकों के पसंदीदा इन दोनों खिलाड़ियों के बीच जोकोविच ने अपनी जगह बनाई।
अपनी शुरुआती यात्रा में जोकोविच कोर्ट पर बेहद भावुक और मुखर रहते थे, जिसके कारण कई बार उन्हें दर्शकों का वह प्यार नहीं मिला जो उनके प्रतिद्वंद्वियों को मिलता था। जोकोविच बताते हैं कि उन्हें बचपन की कई भावनाओं को दबाकर रखना पड़ता था, जो बाद में मैच के दौरान कोर्ट पर बाहर निकलती थीं। उन्होंने टेनिस कोर्ट को अपनी सुरक्षा का जरिया बनाया, जहां वे अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर सकते थे।
संन्यास की अटकलें और 2028 ओलंपिक का लक्ष्य
ग्रैंड स्लैम मुकाबलों में जोकोविच की हर हार के बाद उनके संन्यास की खबरें तेजी से फैलने लगती हैं। वर्ष 2026 के अमेरिका ओपन अभियान के बाद भी इस तरह की चर्चाएं होना तय माना जा रहा है। उनके पुराने प्रतिद्वंद्वी रोजर फेडरर ने साल 2022 में और राफेल नडाल ने साल 2024 में चोटों से परेशान होकर संन्यास ले लिया था। इसके विपरीत जोकोविच ने अपनी ढलती उम्र को देखते हुए चुनिंदा प्रतियोगिताओं में ही हिस्सा लेने की रणनीति अपनाई है और बड़े ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट्स पर ध्यान केंद्रित किया है।
जोकोविच का कहना है कि उन्होंने अभी अपने करियर के अंत की कोई तारीख तय नहीं की है। जब तक वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों से मुकाबला करने में सक्षम हैं और उनमें जीतने का जुनून कायम है, तब तक वे खेलना जारी रखेंगे। साल 2024 के पेरिस ओलंपिक में कार्लोस अल्काराज को हराकर स्वर्ण पदक जीतना उनके करियर का सबसे गौरवशाली क्षण था। अब उनकी निगाहें साल 2028 में अमेरिका के लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक खेलों पर टिकी हैं। वे अपने कंधे पर सर्बिया का राष्ट्रीय ध्वज उठाकर अपने शानदार करियर को अंतिम विदाई देना चाहते हैं।



















