पेशेवर टेनिस में लंबे अंतराल के बाद मुख्य ड्रॉ में कदम रखने वाली ब्रिटेन की टेनिस खिलाड़ी जोडी बरेज के लिए वापसी का अनुभव बेहद कड़वा साबित हुआ है। चेन्नई ओपन के पहले दौर में मिली हार के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर उन्हें अभद्र संदेशों और जान से मारने की धमकियों का सामना करना पड़ा। कोर्ट पर कड़े संघर्ष के बाद हार झेलने वाली खिलाड़ी को इंटरनेट पर जिस तरह की नफरत और अपमानजनक भाषा का शिकार होना पड़ा, उसने खेल जगत में खिलाड़ियों की मानसिक और व्यक्तिगत सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
16 महीने बाद डब्ल्यूटीए मुख्य ड्रॉ में वापसी और मुकाबला
27 वर्षीय जोडी बरेज लगभग 16 महीनों के बाद डब्ल्यूटीए टूर के किसी मुख्य एकल मुकाबले में खेलने उतरी थीं। वर्तमान में विश्व रैंकिंग में 474वें स्थान पर मौजूद बरेज का सामना भारत की वैष्णवी अडकर से हुआ। इस कड़े मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी ने पहले सेट में पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी की और ब्रिटिश प्रतिद्वंद्वी को 3-6, 6-3, 7-5 से पराजित कर दिया। बरेज पूर्व में सितंबर 2023 के दौरान अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 85वीं विश्व रैंकिंग हासिल कर चुकी हैं। इसके अलावा ब्रिटिश नंबर 15 बरेज का क्वालीफायर मुकाबलों को छोड़कर डब्ल्यूटीए टूर पर पिछला मुकाबला जुलाई 2025 में हुआ था, जहां विंबलडन के पहले दौर में उन्हें कैथरीन मैकनेली के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा और साथी खिलाड़ी का समर्थन
हार के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आई धमकियों और गालियों को लेकर लंदन की रहने वाली जोडी बरेज ने गहरी निराशा जाहिर की। उन्होंने इस कड़वे बर्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए संदेश में लिखा, "टूर पर शानदार स्वागत। मुझे याद आ गया कि मैं क्यों दूर गई थी।" इस घटना के बाद साथी खिलाड़ियों ने भी उनके समर्थन में आवाज उठाई। जर्मनी की टेनिस खिलाड़ी ईवा लिस ने बरेज के प्रति एकजुटता दिखाते हुए अपने इंस्टाग्राम हैंडल से डब्ल्यूटीए को टैग किया और सवाल उठाया, "आखिर कब कोई कदम उठाया जाएगा?"
सट्टेबाजों से जुड़ा ऑनलाइन नफरत का बड़ा नेटवर्क
टेनिस खिलाड़ियों को मिलने वाली ऑनलाइन धमकियों और गालियों के पीछे एक संगठित और डरावना पैटर्न काम कर रहा है। सिग्निफाई ग्रुप की थ्रेट मैट्रिक्स सेवा, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक से ऑनलाइन सामग्री की पहचान करती है, के आंकड़ों के अनुसार 2025 में दर्ज किए गए अपमानजनक पोस्ट की संख्या 2024 के लगभग बराबर रही। इसी समूह द्वारा दो साल पहले जारी की गई एक रिपोर्ट में सामने आया था कि अपमानजनक माने गए 48 प्रतिशत पोस्ट के पीछे नाराज सट्टेबाज थे। नए आंकड़ों में यह बात और स्पष्ट हुई कि वर्ष 2025 में सत्यापित दुर्व्यवहार के 42 प्रतिशत मामलों तथा गंभीर किस्म के दुर्व्यवहार के 59 प्रतिशत मामलों के लिए सट्टेबाज ही जिम्मेदार थे।
खिलाड़ियों की सुरक्षा पर डब्ल्यूटीए का रुख
टूर पर खिलाड़ियों के साथ होने वाले इस दुर्व्यवहार पर डब्ल्यूटीए का प्लेयर बोर्ड पहले भी कड़ा रुख अपना चुका है। प्लेयर बोर्ड ने ऐसे अपमानजनक आचरण की निंदा करते हुए इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया था। बोर्ड के अनुसार इस तरह के ऑनलाइन हमलों का खिलाड़ियों पर गहरा और गंभीर असर पड़ सकता है। खेलों में सट्टेबाजी के बढ़ते प्रभाव और सोशल मीडिया पर अनियंत्रित नफरत के बीच पेशेवर एथलीटों के लिए डिजिटल सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।



















