चीन के ग्वांगझू में खेले गए फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रिया की युवा खिलाड़ी लिली टैगर को सीधे सेटों में मात देकर ब्रिटेन की हैरियट डार्ट ने अपने पेशेवर करियर की पहली डब्ल्यूटीए ट्रॉफी अपने नाम कर ली। फाइनल मुकाबले के तुरंत बाद डार्ट के फोन पर शुभकामना संदेशों की बाढ़ आ गई, लेकिन उनके पास इन संदेशों को देखने तक का समय नहीं था। जीत दर्ज करने के ठीक बाद उन्होंने सबसे पहला फोन नॉर्थ लंदन के एक लोकल टेनिस क्लब में मैच देख रहे अपने माता-पिता, निक और सूसी, तथा अपनी बहन फोएबे को लगाया। इसके तुरंत बाद उन्होंने जिस शख्स से संपर्क किया, वह थीं वर्ष 2013 की विंबलडन चैंपियन मेरियन बार्टोली, जिनके मेंटरशिप और कोचिंग ने डार्ट के करियर को एक नया मोड़ दिया है।
विंबलडन चैंपियन मेरियन बार्टोली का मार्गदर्शन और मजबूत भरोसा
फ्रांस की पूर्व विश्व नंबर सात खिलाड़ी मेरियन बार्टोली वर्ष की शुरुआत से ही डार्ट के साथ पार्ट-टाइम आधार पर कोच के रूप में काम कर रही हैं। 30 वर्ष की उम्र में कई लोगों का मानना था कि डार्ट के लिए टूर पर बड़ा खिताब जीतना अब संभव नहीं होगा, लेकिन बार्टोली के मार्गदर्शन ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया। फाइनल मुकाबले के दौरान बार्टोली खुद ग्वांगझू में मौजूद नहीं थीं और उन्होंने घर पर बैठकर ही अपनी शिष्या को खेलते देखा। दुनिया की 115वें नंबर की खिलाड़ी डार्ट ने वीडियो कॉल पर बात करते हुए साझा किया कि मेरियन के साथ काम करना अविश्वसनीय रहा है और वह भाग्यशाली हैं कि बार्टोली उनके साथ काम करने के लिए तैयार हुईं।
डार्ट ने अपनी खेल यात्रा के इस पड़ाव को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि वह अपने करियर के उस मोड़ पर हैं जो किसी 20 साल के खिलाड़ी से बिल्कुल अलग है। इसके बावजूद उनका मानना है कि उनके खेल में अभी भी काफी सुधार की गुंजाइश है और नई बढ़त हासिल की जा सकती है। डार्ट के अनुसार, मेरियन बार्टोली का उन पर अटूट विश्वास होना उनके लिए दुनिया की सबसे बड़ी बात है। जब एक ग्रैंड स्लैम चैंपियन किसी खिलाड़ी की क्षमताओं पर इतना भरोसा जताती है, तो उस खिलाड़ी का अपने खेल पर आत्मविश्वास स्वाभाविक रूप से कई गुना बढ़ जाता है।
दुबई में कड़ा अभ्यास और टूर का अनोखा तालमेल
जब हैरियट डार्ट ने मेरियन बार्टोली के साथ कोचिंग सत्र की शुरुआत की थी, तब उनकी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग 160 से भी बाहर फिसल चुकी थी। दोनों ही खिलाड़ी दुबई में एक-दूसरे के काफी करीब रहती हैं, जिससे उन्हें अभ्यास के बेहतरीन अवसर मिलते हैं। जब डार्ट विभिन्न अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के दौरे पर नहीं होतीं, तब वे दोनों दुबई में ही कड़े ट्रेनिंग ब्लॉक पूरे करती हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों और छोटे बच्चे होने के कारण 42 वर्षीय बार्टोली पूरे साल डार्ट के साथ लगातार यात्रा नहीं कर पाती हैं, लेकिन इस सीजन के ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों के दौरान दोनों ने कोर्ट पर प्रत्यक्ष रूप से साथ मिलकर काम किया है।
डार्ट का यह भी कहना है कि 42 वर्ष की उम्र में भी बार्टोली अभ्यास के दौरान गेंद पर बेहद सटीक और मजबूत प्रहार करती हैं, जिससे उन्हें कोर्ट पर अपनी टाइमिंग सुधारने का सीधा फायदा मिलता है। ग्वांगझू के दौरे पर डार्ट के साथ उनके फिटनेस ट्रेनर डारियो गोंफियांटिनी और बॉयफ्रेंड स्टीफन फाल्क मौजूद थे। मुख्य कोच की अनुपस्थिति में डार्ट को कोर्ट पर कई रणनीतिक फैसले खुद ही लेने पड़े, हालांकि बार्टोली घर से लगातार उनके मैचों के तकनीकी नोट्स और सूक्ष्म विश्लेषण भेजकर उनका मार्गदर्शन कर रही थीं।
शानदार दूसरा हाफ और रैंकिंग में 83वें पायदान की छलांग
ग्वांगझू ओपन का खिताब जीतने के बाद डार्ट सोमवार को जारी होने वाली डब्ल्यूटीए रैंकिंग में 83वें स्थान पर पहुंच जाएंगी। यह उपलब्धि इस सीजन के दूसरे हिस्से में उनके असाधारण प्रदर्शन का शानदार परिणाम है। विंबलडन के बाद से हार्ड कोर्ट पर खेले गए 24 मैचों में से डार्ट ने 19 मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज की है। इस लय के दम पर इस वर्ष डब्ल्यूटीए टूर पर उनका समग्र रिकॉर्ड 34 मैचों में 23 जीत का हो गया है, जो उनके पेशेवर जीवन का अब तक का सबसे बेहतरीन जीत प्रतिशत है।
डार्ट ने अपने कोच के मानवीय पक्ष की सराहना करते हुए कहा कि एक बेहतरीन टेनिस खिलाड़ी बनाने से पहले मेरियन एक शानदार इंसान हैं जो व्यक्तिगत स्तर पर उनकी परवाह करती हैं। अपने समृद्ध अनुभवों को साझा करके बार्टोली ने डार्ट के खेल को तराशा है। डार्ट ने कहा कि उन्होंने अपने कोच से बहुत कुछ सीखा है और आने वाले वर्ष में वे साथ में और अधिक सप्ताह बिताने की योजना बना रही हैं। संन्यास लेने के बाद 42 वर्षीय बार्टोली कई शीर्ष खिलाड़ियों को कोचिंग दे चुकी हैं, जिनमें वर्ष 2017 की फ्रेंच ओपन चैंपियन येलेना ओस्टापेंको का नाम भी शामिल है।
कमजोरियों पर विजय और मानसिक मजबूती का प्रदर्शन
हैरियट डार्ट वर्ष 2024 में अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग 70 पर पहुंची थीं, जब उन्होंने विंबलडन के तीसरे दौर और यूएस ओपन के दूसरे दौर में जगह बनाई थी। हालांकि, पिछले दो सत्रों के अधिकांश समय वह शीर्ष 100 से बाहर ही संघर्ष करती रहीं। इस दौर में उनके खेल की कुछ तकनीकी कमियां साफ उजागर हो गई थीं। प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों ने उनकी धीमी दूसरी सर्विस का फायदा उठाना शुरू कर दिया था, जिस पर वह दबाव में अक्सर डबल फॉल्ट कर बैठती थीं। इसके अलावा महत्वपूर्ण मौकों पर उनके कोर्ट टेम्परामेंट और दबाव झेलने की क्षमता पर भी सवाल खड़े किए जा रहे थे।
ग्वांगझू में डार्ट ने इन तमाम संशयों को अपने जुझारू खेल से धो दिया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने कई मौकों पर पिछड़ने के बाद जबरदस्त वापसी की और मानसिक दृढ़ता की नई मिसाल पेश की। ब्रिटेन की महिला टीम की कप्तान ऐनी कियोथावोंग ने भी डार्ट के इस नए रूप की जमकर तारीफ की है। कियोथावोंग ने बताया कि डार्ट की कार्यशैली हमेशा से लाजवाब रही है और उन्होंने अपने पेशेवर रवैये का स्तर बहुत ऊंचा रखा है, लेकिन वर्तमान में उनके खेल में विश्वास और आत्मबल का स्तर बेहद ऊंचा दिखाई दे रहा है। वर्षों की कठिन मेहनत के बाद डार्ट को इस बड़े मुकाम पर पहुंचते देखना प्रेरणादायक है।
ब्रिटिश महिला टेनिस के लिए एशियाई हार्ड-कोर्ट स्विंग की सफलता
ऐनी कियोथावोंग ने सितंबर में आयोजित बिली जीन किंग कप फाइनल्स के लिए डार्ट को अपनी ब्रिटिश टीम में शामिल किया था। हालांकि डार्ट को उस मुकाबले में खेलने का मौका नहीं मिला था, लेकिन अभ्यास सत्रों के दौरान गेंद पर उनके कड़े प्रहारों ने कप्तान को काफी प्रभावित किया था। उसी अभ्यास के स्तर को अंतरराष्ट्रीय टूर पर उतारने से डार्ट को बड़ी सफलता मिली है। यह जीत ब्रिटिश महिला टेनिस के लिए एशियाई हार्ड-कोर्ट स्विंग के दौरान मिली सामूहिक सफलताओं की कड़ी को आगे बढ़ाती है।
हाल के हफ्तों में सोनाय कार्तल ने वुहान में आयोजित डब्ल्यूटीए 1000 टूर्नामेंट के फाइनल तक का सफर तय किया, जबकि केटी बोल्टर ने ओसाका में डब्ल्यूटीए 250 प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इसके अलावा पिछले सप्ताह युवा खिलाड़ी हन्ना क्लुगमैन ने दूसरे दर्जे के चैलेंजर टूर पर डब्ल्यू100 रेक्सहैम ओपन का खिताब जीता, जो उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी जीत है। कप्तान कियोथावोंग ने जोर देकर कहा कि सीजन के अंतिम पड़ाव में, जब पूरे साल के खेल की थकान हावी होती है, सभी ब्रिटिश खिलाड़ियों का ऐसा उत्कृष्ट प्रदर्शन करना उनकी कड़ी मेहनत का वास्तविक इनाम है और यह ब्रिटिश टेनिस के भविष्य के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।



















